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कोलकाता: कोर्ट ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता को 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा

ED ने कोर्ट में बताया कि कुल 49.8 करोड़ रुपए की बरामदगी हुई है. ईडी का कहना था कि 1 नवंबर 2012 को पार्थ और अर्पिता ने साझेदारी की शुरुआत की थी. उन्होंने बेलघोरिया फ्लैट में कंपनी बनाई, जहां से कैश वसूल किया गया था. दोनों के फोन का डेटा भी बरामद किया गया है.

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ईडी ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में अरेस्ट किया है. ईडी ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में अरेस्ट किया है.

मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को एक बार फिर झटका लगा है. शुक्रवार को कोलकाता के सिटी सेशन कोर्ट में जमानत पर सुनवाई की गई. कोर्ट ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. यानी दोनों 18 अगस्त तक ज्यूडिशियल कस्टडी में रहेंगे. ईडी ने दोनों की कस्टडी मांगी थी. ईडी का कहना था कि अभी दोनों से जरूरी पूछताछ होना बाकी है. 

कोर्ट में अर्पिता मुखर्जी के वकील ने कहा कि उनकी जान को खतरा है. हम उनके (अर्पिता) लिए एक डिवीजन 1 कैदी कैटेगिरी चाहते हैं. उनके भोजन और पानी की पहले जांच की जानी चाहिए और फिर उन्हें दिया जाना चाहिए. ईडी के वकील ने भी समर्थन किया कि अर्पिता की सुरक्षा बढ़ा देना चाहिए. अर्पिता को 4 से ज्यादा कैदियों के साथ नहीं रखा जा सकता है.

ईडी ने कोर्ट में कहा है कि अर्पिता मुखर्जी को लेकर खतरे की आशंका है. अर्पिता को सुरक्षा दी जानी चाहिए. ईडी ने कहा कि टेस्ट करने के बाद ही अर्पिता को भोजन और पानी दिया जाना चाहिए. वहीं, पार्थ को लेकर कोई खतरा नहीं जताया है.

ED ने कोर्ट में बताया कि कुल 49.8 करोड़ रुपए की बरामदगी हुई है. ईडी का कहना था कि 1 नवंबर 2012 को पार्थ और अर्पिता ने साझेदारी की शुरुआत की थी. उन्होंने बेलघोरिया फ्लैट में कंपनी बनाई, जहां से कैश वसूल किया गया था. दोनों के फोन का डेटा भी बरामद किया गया है. यह भी पूछताछ की जा रही है कि क्या ये कंपनियां मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल थीं, इसलिए दोनों की न्यायिक हिरासत देना जरूरी है. इसके साथ ही ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के लिए सुरक्षा की मांग भी की. ईडी ने बताया कि अब तक 50 अकाउंट की जांच की जा रही है.

वहीं, पार्थ के वकील ने कहा कि ये एक ऐसे शख्स हैं जो भागेंगे नहीं. वह 72 साल के हैं और बीमार हैं. पार्थ चटर्जी के लिए लगातार दवा की जरूरत होती है. इसलिए हम जमानत की प्रार्थना करते हैं. अर्पिता मुखर्जी को जेल में टेस्टिंग के बाद खाना-पानी दिया जाए.

पार्थ चटर्जी के वकील ने कहा कि सीबीआई ने मामले में आरोपी को सीधे तौर पर पैसे लेते या मांगते नहीं देखा है. इस मामले में कोई गवाह नहीं है कि पार्थ चटर्जी ने पैसे मांगे हैं. पार्थ चटर्जी का किसी को पैसे के लिए प्रेरित करने का कोई उदाहरण नहीं है. दस्तावेज कहां है. ये सब आरोप हैं. पार्थ चटर्जी का आय से कोई लेना-देना नहीं है.

ईडी मामले में कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुए हैं. वह लंबे समय से हिरासत में थे. लेकिन हिरासत का नतीजा क्या है. सिर्फ यह कहना कि पार्थ चटर्जी सहयोग नहीं कर रहे हैं, मानदंड नहीं है. अगर कोई इसमें शामिल नहीं है तो वह इसे कैसे स्वीकार कर सकता है. ईडी ने दावा किया था कि 31 एलआईसी पॉलिसियां ​​मिली हैं जिनमें पार्थ चटर्जी नामित हैं. यह आरोप सिर्फ रंग देने वाला है. नियम के अनुसार पार्थ चटर्जी अर्पिता मुखर्जी के नॉमिनी नहीं हो सकते हैं.

पार्थ के वकील का दावा है कि ज्वाइंट प्रॉपर्टी डीड जाली हैं. संयुक्त कार्यों के मामले में वे जाली हैं. वह एक आम आदमी हैं और वह भी विधायक से इस्तीफा देने की सोच रहे हैं. पार्थ के वकील ने IPC 420 को कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि इस मामले में यहां आईपीसी 420 कैसे लागू होता है? ईडी को यह भी साबित करना चाहिए कि पार्थ चटर्जी ने पैसे की मांग की और उन्होंने पैसे स्वीकार कर लिए. ऐसा कोई आरोप नहीं है. ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के आधार पर जांच शुरू की.

बता दें कि बंगाल में एसएससी भर्ती घोटाले में सीबीआई ने पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के खिलाफ केस दर्ज किया है. इस मामले में रुपयों के लेन-देन की वजह से ईडी की एंट्री हुई. बीते माह ईडी ने पार्थ की करीबी अर्पिता के ठिकानों पर छापा मारा था और 49 करोड़ से ज्यादा कैश बरामद किया था. इसके साथ ही सोना और जेवर बरामद किया था. ईडी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था. अर्पिता और पार्थ को ईडी ने 13 दिन पहले अरेस्ट किया था. तब से दोनों की हिरासत में पूछताछ चल रही है.

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