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जस्टिस एएम खानविलकर SC से रिटायर, ऐसा रहा वकील से सुप्रीम कोर्ट के जज तक का सफर

सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एएम खानविलकर रिटायर हो गए हैं. युवावस्था में एक धावक रहे जस्टिस खानविलकर ने सौ किलोमीटर दौड़ लगाई थी. साल 2000 में बॉम्बे हाईकोर्ट में जज नियुक्त हुए जस्टिस खानविलकर कई महत्वपूूर्ण फैसले देने वाली बेंच का हिस्सा रहे. सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट बार एसोशिएशन ने जस्टिस खानविलकर के लिए विदाई समारोह आयोजित कर उन्हें विदाई दी.

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जस्टिस खानविलकर ने कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं. जस्टिस खानविलकर ने कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 1982 में वकालत से कॅरियर की शुरुआत की थी
  • 2016 में SC में जज बनकर आए थे जस्टिस खानविलकर

सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस एएम खानविलकर शुक्रवार को रिटायर हो गए. उन्होंने 40 साल पहले वकालत से कॅरियर की शुरुआत की थी. जबकि 22 साल से जज के रूप में सेवाएं दे रहे थे. जस्टिस खानविलकर सुप्रीम कोर्ट में 6 साल से पदस्थ थे. जस्टिस खानविलकर युवा अवस्था में अच्छे धावक भी थे. उन्होंने 100 किमी तक दौड़ लगाई थी.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से विदाई समारोह आयोजित किया गया. इस दौरान जस्टिस खानविलकर ने बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को 'प्यार और स्नेह' के लिए धन्यवाद दिया. 30 जुलाई 1957 को पुणे में जन्मे जस्टिस खानविलकर ने मुंबई के एक लॉ कॉलेज से एलएलबी किया. उन्होंने फरवरी 1982 में एक वकील के रूप में सेवाएं देना शुरू किया. बाद में 29 मार्च 2000 को वे बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किए गए.

2016 में सुप्रीम कोर्ट में जज बने थे

खानविलकर को 4 अप्रैल 2013 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस और बाद में 24 नवंबर, 2013 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था. जस्टिस खानविलकर को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया. उन्होंने 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट में पदभार संभाला था.

सुप्रीम कोर्ट में 6 साल सेवा दी

जस्टिस खानविलकर अपनी युवावस्था में एक उत्साही धावक थे. यहां तक ​​कि उन्होंने मुंबई से अलीबाग तक, लगभग 100 किलोमीटर दौड़ लगाई थी. जस्टिस खानविलकर ने अपने सेवाकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले सुनाने वाली बेंच का भी हिस्सा रहे.

वकीलों ने जुड़ाव को याद किया

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने शीर्ष अदालत के वकील और हाईकोर्ट और SC के जज के रूप में जस्टिस खानविलकर के साथ अपने जुड़ाव को याद किया. विकास सिंह ने कहा कि 'जब कोई जज रिटायर होता है तो हमारे लिए यह हमेशा मुश्किल होता है. यह तब और मुश्किल होता है जब एक जज, जो हमारा हिस्सा रहा है और वह रिटायर हो जाता है. 

उन्होंने आगे कहा कि वह हमारे एक सहयोगी के रूप में वहां रहे हैं. एक समय हम बार के सदस्य के रूप में सुप्रीम कोर्ट में एक ही गलियारे में अपने कक्ष शेयर करते थे. हमने खानविलकर को हाईकोर्ट का जज बनते देखा और फिर सुप्रीम कोर्ट में जज बनकर यहां वापस आए. विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की भी वकालत की. 

चेहरे पर मुस्कान को याद करेंगे

वहीं, कोरोनोवायरस की वजह से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वर्चुअल मोड के जरिए विदाई समारोह से जुड़े. मेहता ने कहा कि हम वास्तव में जस्टिस खानविलकर को याद करेंगे. हम उनके चेहरे पर मुस्कान को याद करेंगे. हर कोई मेरी इस बात से सहमत होगा कि याचिका खारिज करते वक्त भी जस्टिस खानविलकर के चेहरे पर मुस्कान देखी जाती थी. हमने भी कभी कटुता के साथ कोर्ट रूम नहीं छोड़ा.

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा- मी लॉर्ड जस्टिस खानविलकर को अब लगभग चार दशक से एक सहयोगी के रूप में जानना और फिर उनके सामने एक अलग अवतार में पेश होना एक सम्मान और खुशी की बात है और मैं सिर्फ एक ही बात कहूंगा कि कृपया इसे दूसरी पारी की शुरुआत के रूप में मानें. सेवानिवृत्ति नहीं.

सुप्रीम कोर्ट में टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया: सीजेआई

विदाई समारोह में चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि जस्टिस खानविलकर ने अगस्त 2021 से सुप्रीम कोर्ट में लीगल की अध्यक्षता संभाली थी, तब से उन्होंने समिति के कामकाज में टेक्नोलॉजी के उपयोग को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया. उन्होंने सभी के लिए न्याय तक पहुंच को सक्षम करने के लिए SCLSC ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया.

CJI ने कहा कि कॉलेजियम में उनके अनुभव से मुझे बहुत फायदा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में खाली पदों को भरने में हमने जो प्रगति की है, उनके सहयोग ने उसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

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