scorecardresearch
 

असम में Japanese Encephalitis का कहर, 16 लोगों की मौत, 121 मरीज सामने आए

असम के स्वास्थ्य मंत्री केशव महंत की उपस्थिति में JE और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) की स्थिति पर समीक्षा बैठक की गई है. बयान में कहा गया है कि यह निर्णय लिया गया कि स्वास्थ्य मंत्री गुरुवार को जिलेवार स्थिति की विस्तार से समीक्षा करेंगे.

X
JE संक्रमित मच्छरों से फैलने वाले वायरस के कारण होता है. -सांकेतिक तस्वीर
JE संक्रमित मच्छरों से फैलने वाले वायरस के कारण होता है. -सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2014 में असम में JE और AES से 525 मरीजों की हुई थी मौत
  • 2021 सितंबर तक AES के 435 और JE के 212 मामले आए थे

असम में जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis) का कहर देखने को मिला है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि असम में जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) के कारण तीन और लोगों की मौत हो गई. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम ने बयान में कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान JE के कारण करीमगंज में दो और शिवसागर में एक व्यक्ति की मौत हुई है.

बताया गया कि इन मौतों के साथ राज्य में JE के कारण कुल 16 लोगों की जान चली गई है. असम में 1 जुलाई से अब तक JE के कुल 121 मामले सामने आए हैं. इसके अलावा, JE के तीन नए मामले धेमाजी में, दो नए केस मोरीगांव में और एक डिब्रूगढ़ में पाए गए हैं. 

बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, असम में 2021 सितंबर तक 435 एईएस मामले सामने आए थे जिनमें से 80 मरीजों की मौत हो गई थी. वहीं जेई के 212 मामले सामने आए थे जिनमें से 39 मरीजों की मौत हो गई थी. पिछले साल सितंबर तक देश में एईएस और जेई से होने वाली मौतों में असम की हिस्सेदारी क्रमश: 60.15 फीसदी और 76.47 फीसदी थी.

क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस (JE)

जापानी इंसेफेलाइटिस एक गंभीर बीमारी है. JE एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में संक्रमित मच्छरों द्वारा फैले वायरस के कारण होता है. JE वायरस मच्छर से फैलने वाले वायरस के एक समूह में से एक है जो मस्तिष्क की सूजन (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है. जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस (JEV) भारत में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम का प्रमुख कारण है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2014 से 2020 के बीच असम में एईएस और जेई संक्रमण के कारण 2 हजार 400 से अधिक लोगों की जान चली गई. रिपोर्टों के अनुसार, असम में 2014 में जेई और एईएस के कारण 525, 2015 में 395, 2016 में 279, 2017 में 265, 2018 में 277, 2019 में 514 और 2020 में 147 मौतें दर्ज की गईं थीं.

 

TOPICS:
आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें