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सर्जिकल स्ट्राइक से नॉर्थ ईस्ट में ऑपरेशन तक, ये उपलब्धियां हैं CDS रावत के नाम

भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत को ले जाने वाला सेना का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. सीडीएस बिपिन रावत के अलावा उनकी पत्नी और सेना के अन्य अधिकारी समेत 14 लोग इस हेलीकॉप्टर में मौजूद थे. इसमें 13 लोगों की मौत हो गई, जिसमें सीडीएस भी शामिल थे.

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जनरल बिपिन रावत फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स जनरल बिपिन रावत फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स
स्टोरी हाइलाइट्स
  • देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत नहीं रहे
  • पिछले चार दशकों में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशन्स को दिया अंजाम

तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार दोपहर बहुत बड़ा हादसा देखने को मिला. भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत को ले जाने वाला सेना का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. सीडीएस बिपिन रावत के अलावा उनकी पत्नी और सेना के अन्य अधिकारी समेत 14 लोग इस हेलीकॉप्टर में मौजूद थे. इसमें 13 लोगों की मौत हो गई, जिसमें सीडीएस भी शामिल थे. इस हादसे में सिर्फ ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह बच पाए, जिनका इलाज चल रहा है. सीडीएस रावत ने पिछले चार दशकों में देश के लिए कई बड़े ऑपरेशनों में अपना योगदान दिया था.

सीडीएस बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को देहरादून में हुआ था. उनके पिताजी एल एस रावत भी फौज में थे और उन्हें लेफ्टिनेंट जनरल एलएस रावत के नाम से पहचाना जाता था. सीडीएस रावत सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकसला के पूर्व छात्र हैं.

उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम. फिल की डिग्री हासिल की है और मैनेजमेंट और कंप्यूटर स्टडीज में डिप्लोमा हासिल किया है.  दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से ग्यारह गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में उन्हें नियुक्त किया गया. उन्हें यहां 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' से भी सम्मानित किया जा चुका है.

ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्र और आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशनों के विशेषज्ञ सीडीएस रावत

जनरल बिपिन रावत ने सैन्य मीडिया रणनीतिक अध्ययन पर अपना शोध भी पूरा किया और 2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी से उन्हें सम्मानित किया गया. वे 'राष्ट्रीय सुरक्षा' और 'लीडरशिप' पर कई लेख लिख चुके हैं जो विभिन्न पत्रिकाओं और प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं.

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जनरल बिपिन रावत को उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्र और आतंकवाद रोधी अभियानों में कमान संभालने का अनुभव है. वे 1986 में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर इंफैंट्री बटालियन के प्रमुख की भूमिका निभा चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स के एक सेक्टर और कश्मीर घाटी में 19 इन्फेन्ट्री डिवीजन की अगुआई भी की है. वे कॉन्गो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन का नेतृत्व भी कर चुके हैं.  

सीडीएस बिपिन रावत की अगुआई में भारतीय सेना ने कई ऑपरेशन्स को भी अंजाम दिया है. उन्होंने पूर्वोत्तर में आतंकवाद को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. जून 2015 में मणिपुर में आतंकी हमले में 18 सैनिक शहीद हो गए थे. इसके बाद 21 पैरा कमांडो ने सीमा पार जाकर म्यांमार में आतंकी संगठन एनएससीएन-के कई आतंकियों को ढेर किया था. तब 21 पैरा थर्ड कॉर्प्स के अधीन थी, जिसके कमांडर बिपिन रावत ही थे.

इसके अलावा 29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर कई आतंकी शिविरों और आतंकियों को मार गिराया था. उरी में सेना के कैंप और पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए हमले में कई जवान शहीद हो जाने के बाद भारतीय सेना ने ये एक्शन लिया था.  
 

पिछले चार दशकों से देश की सेवा कर रहे सीडीएस रावत 

साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश की तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और बेहतर बनाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS का नया पद बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद ही भारतीय सेना प्रमुख के पद से रिटायर होने के बाद बिपिन रावत ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पदभार ग्रहण किया था. 

अपने चार दशकों की सेवा के दौरान, जनरल रावत ने ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी) दक्षिणी कमान, सैन्य संचालन निदेशालय में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2, मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रांच में कर्नल सैन्य सचिव और उप सैन्य सचिव और जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं.

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