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कृषि बिल पर क्यों नहीं कराया गया मत विभाजन? सरकार ने विपक्ष पर फोड़ा ठीकरा

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उपसभापति के जरिए कई बार कहा गया कि अगर उन्हें डिवीजन चाहिए तो वो अपनी सीट पर जाएं. लेकिन विपक्षी सांसद एक-दूसरे की पीठ पर चढ़कर सदन में नारे लगा रहे थे.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (PTI फोटो) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (PTI फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राज्यसभा में कृषि बिल पास
  • ध्वनि मत से पास हुए दो बिल
  • विपक्ष का बिल के विरोध में हंगामा

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी दो कृषि विधेयकों को पास करवाया जा चुका है. राज्यसभा में ध्वनि मत से विधेयकों को पारित किया गया. हालांकि इस दौरान विपक्ष ने भी जमकर हंगामा और नारेबाजी की. हालांकि कृषि बिल पर मत विभाजन क्यों नहीं कराया गया, इसका ठीकरा भी सरकार ने विपक्ष पर फोड़ा है.

दरअसल, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत केंद्र सरकार के 6 मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इनमें राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, प्रहलाद जोशी, पीयूष गोयल, थावर चंद गहलोत और मुख्तार अब्बास नकवी शामिल रहे. ध्वनि मत से बिल को पास करवाए जाने के मुद्दे पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जब राज्यसभा के उपसभापति के जरिए विभाजन के लिए कहा गया तो वे सभी विपक्षी सांसद वेल में थे, वे हिंसक हो रहे थे.

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उपसभापति के जरिए कई बार कहा गया कि अगर उन्हें डिवीजन चाहिए तो वो अपनी सीट पर जाएं. वे एक-दूसरे की पीठ पर चढ़कर नारे लगा रहे थे. वहीं डिवीजन के मुद्दे पर राजनाथ सिंह ने कहा, 'क्या आपको हिंसक होना चाहिए? क्या प्रश्नपत्र फाड़ना और माइक तोड़ना चाहिए?'

कांग्रेस का आरोप

वहीं विभाजन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कई लोगों ने अपनी सीट से डिवीजन मांगा. 12.40 बजे के आस-पास मंत्रीजी ने अपना भाषण शुरू किया. एक बजे से कुछ मिनट पहले उपसभापति ने कहा कि समय कम है. ऐसे में अगर उनके पास बहुमत होता तो इसे कल सुन लेते. इसे कल पारित कराया जा सकता था.

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हालांकि इन्होंने 10 मिनट में इतना व्यापक बिल पास करा लिया. अगर हर क्लॉज पर डिवीजन मांगा जाता तो इस पूरी प्रक्रिया में करीब 1-2 घंटे और लगते. जब उन्हें लगा कि उनके पास बहुमत नहीं है तो ये ड्रामा करवाया गया. वहीं अब कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के जरिए राज्यसभा के उपसभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है.

 

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