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पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 से चीन का पीछे हटना सीमा पर ‘एक समस्या कम’ होने जैसा है: एस. जयशंकर

भारत-चीन के बीच इस साल जुलाई महीने में 16वें दौर की उच्च स्तर की सैन्य वार्ता के बाद हॉट स्प्रिंग्स-गोगरा क्षेत्र से दोनों देशों की सेनाएं हटी हैं. इसको लेकर बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सीमा पर एक समस्या कम हुई है. फ्रांस की विदेश मंत्री के साथ मीटिंग के बाद संवाददाता सम्मेलन में जयशंकर ने ये बात कही.

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विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो)
विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 से भारत और चीन की सेनाओं का पीछे हटना सीमा पर ‘एक समस्या कम' होने जैसा है. जयशंकर ने कहा कि पीपी-15 से दोनों देश की सेनाओं का पीछे हटने का काम पूरा हो गया है, सीमा पर एक समस्या कम हुई है. फ्रांस की विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना के साथ मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने ये बात कही. 

भारत-चीन के बीच इस साल जुलाई महीने में 16वें दौर की उच्च स्तर की सैन्य वार्ता के बाद हॉट स्प्रिंग्स-गोगरा क्षेत्र से दोनों देशों की सेनाएं हटी हैं. यह वार्ता चुशुल-मोल्दो मीटिंग पॉइंट पर हुई थी. LAC पर दोनों देशों की सेनाएं उस समय पीछे हटी हैं, जबकि उज्बेकिस्तान के समरकंद में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की वार्षिक बैठक में हिस्सा ले रहे हैं.  

दोनों देशों के बीच 2020 से सैन्य गतिरोध बढ़ा 

मई 2020 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच गतिरोध के 4 मुख्य बिंदु हॉट स्प्रिंग्स का पेट्रोलिंग प्वाइंट15 (PP-15), गोगरा पोस्ट के पास PP-17ए, गलवान घाटी के पास PP-14 और पैंगोंग त्सो झील का उत्तरी किनारा है. चीनी सैनिक LAC में घुसपैठ कर PP-15 और PP-17ए सहित इन प्वाइंट्स में दाखिल हुए, जिससे इन इलाकों में भारतीय सेना के साथ गतिरोध पैदा हुआ. 

पेट्रोलिंग प्वाइंट पर विवाद के अलावा जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे जबकि चीन के 30 जवान मारे गए थे. हालांकि, चीन ने बाद में दावा किया कि इस झड़प में उनके सिर्फ चार जवान मारे गए. 

ईयू का अहम सदस्य है फ्रांस: जयशंकर 

इसके साथ ही फ्रांस की विदेश मंत्री के साथ संवाददाता सम्मेलन कर रहे जयशंकर ने कहा कि फ्रांस यूरोपीय संघ का एक प्रमुख सदस्य है और हमने व्यापार, निवेश और भौगोलिक संकेतकों पर भारत-ईयू को आगे बढ़ाने पर चर्चा की.  

भारत को यूएन में स्थायी सदस्यता के पक्ष में फ्रांस 

फ्रांस की विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि फ्रांस यूएन की अध्यक्षता करेगा और भारत को स्थायी सदस्यता के लिए फ्रांस दूसरे देशों को लामबंद करेगा. कोलोना दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं. उनके दौरे का लक्ष्य अगले साल 25वीं वर्षगांठ से पहले भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और महत्वाकांक्षा योजना के साथ आगे बढ़ना है. 

 

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