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पानी नहीं 'जहर' पी रहे हैं हम! देशभर से आए ये आंकड़े चौंकाते ही नहीं, डराते भी हैं

देश में पानी की क्वालिटी खराब होती जा रही है. केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि देश के लगभग सभी राज्यों के ज्यादातर जिलों के हिस्सों में ग्राउंड वाटर में जहरीली धातुओं की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई गई हैं. सरकार ने बताया है कि देश के 209 जिलों में ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक और 491 जिलों में आयरन की मात्रा ज्यादा मिली है. इनके अलावा सीसा, यूरेनियम, क्रोमियम और कैडमियम की मात्रा भी ग्राउंड वाटर में ज्यादा मिली है.

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प्रदूषित पानी पीने से कैंसर और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. (फाइल फोटो-PTI) प्रदूषित पानी पीने से कैंसर और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 29 राज्यों के 491 जिलों में आयरन की मात्रा ज्यादा
  • 209 जिलों में ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक ज्यादा मिला

एक व्यक्ति को जिंदा रहने के लिए पानी पीना बहुत जरूरी है. हमारे शरीर में 66% पानी होता है. हमारे दिमाग में 75%, हड्डियों में 25% और खून में 83% पानी होता है. कोई भी इंसान बिना खाने के महीनेभर तक जिंदा रह सकता है, लेकिन बिना पानी के सिर्फ एक हफ्ते. एक व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी में औसतन 75 हजार लीटर पानी पीता है. किसी इंसान को स्वस्थ रहने के लिए हर दिन कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए. लेकिन क्या ये पानी हमें वाकई हेल्दी बना रहा है? इसका जवाब शायद 'नहीं' है.

दरअसल, आज के समय में हम पानी तो पी रहे हैं, लेकिन वो 'जहर' बन चुका है. ये बात सरकार ने संसद में मानी है. सरकार ने राज्यसभा में जो आंकड़े दिए हैं, वो सिर्फ चौंकाते ही नहीं है, बल्कि डराते भी हैं. ये आंकड़े डराते हैं कि हम अब तक जो पानी पीते आ रहे हैं, वो 'जहरीला' है. क्योंकि, देश के लगभग सभी राज्यों के ज्यादातर जिले ऐसे हैं, जहां ग्राउंड वाटर में जहरीली धातुओं की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई गई है. 

क्या कहते हैं आंकड़े?

- 25 राज्यों के 209 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है. 

- 29 राज्यों के 491 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में आयरन की मात्रा 1 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है.

- 21 राज्यों के 176 जिले ऐसे हैं, जहां के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में सीसा तय मानक 0.01 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है.

- 11 राज्यों के 29 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में कैडमियम की मात्रा 0.003 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा पाई गई है.

- 16 राज्यों के 62 जिलों के कुछ हिस्सों में ग्राउंड वाटर में क्रोमियम की मात्रा 0.05 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा मिली है.

- वहीं, 18 राज्यों के 152 जिले ऐसे हैं जहां के कुछ हिस्सों में ग्राउंट वाटर में यूरेनियम 0.03 मिलिग्राम प्रति लीटर से ज्यादा पाया गया है. 

80% आबादी को जहरीला पानी!

जल शक्ति मंत्रालय के एक दस्तावेज के मुताबिक, देश की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी को पानी ग्राउंड वाटर से ही मिलता है. लिहाजा, ग्राउंड वाटर में खतरनाक धातुओं की मात्रा तय मानक से ज्यादा होने का मतलब है कि पानी 'जहर' बन रहा है. 

राज्यसभा में सरकार ने उन रिहायशी इलाकों की संख्या का आंकड़ा भी दिया है, जहां पीने के पानी के स्रोत प्रदूषित हो चुके हैं. इसके मुताबिक, 671 इलाके फ्लोराइड, 814 इलाके आर्सेनिक, 14079 इलाके आयरन, 9930 इलाके खारापन, 517 इलाके नाइट्रेट और 111 इलाके भारी धातु से प्रभावित हैं.

शहरों से ज्यादा गंभीर समस्या गांवों में है. क्योंकि भारत की आधी से ज्यादा आबादी गांवों में रहती है. यहां पीने के पानी का मुख्य स्रोत भी हैंडपंप, कुआं या नदी-तालाब होते हैं. यहां सीधे ग्राउंड वाटर से ही पानी आता है. इसके अलावा इस पानी को साफ करने का कोई तरीका भी गांवों में आमतौर पर नहीं होता है. लिहाजा, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं. 

स्वास्थ्य के लिए कितने खतरनाक है ये पानी?

आमतौर पर माना जाता है कि एक व्यक्ति हर दिन औसतन 3 लीटर पानी पीता होगा. हालांकि, सरकारी दस्तावेजों की मानें तो हेल्दी रहने के लिए कम से कम 2 लीटर पानी रोज पीना चाहिए. अगर 2 लीटर पानी भी हर रोज पी रहे हैं, तो कुछ न कुछ मात्रा में जहर भी आ रहा है. 

ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक, आयरन, सीसा (लीड), कैडमियम, क्रोमियम और यूरेनियम की मात्रा तय मानक से ज्यादा होने का सीधा-सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है.

- आर्सेनिक ज्यादा होना मतलब त्वचा से जुड़ी बीमारियां और कैंसर का खतरा बढ़ना.

- आयरन ज्यादा होने का मतलब अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियां हो सकतीं हैं.

- पानी में सीसा की मात्रा ज्यादा होना हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है.

- कैडमियम की मात्रा ज्यादा होने से किडनी से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है.

- क्रोमियम की मात्रा ज्यादा होने से छोटी आंत में हाइपरलेशिया डिफ्यूज हो सकता है, जिससे ट्यूमर होने का खतरा बढ़ जाता है.

- पीने के पानी में यूरेनियम की मात्रा ज्यादा होने से किडनी से जुड़ी बीमारियां और कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.

'जहर' पीने से रोकने के लिए क्या कर रही सरकार?

- संसद में केंद्र सरकार ने बताया कि पानी राज्य का विषय है, इसलिए लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्यों की है. हालांकि, केंद्र सरकार भी पीने का साफ पानी मुहैया कराने के लिए कई योजनाएं चला रही है.

- 21 जुलाई को सरकार ने लोकसभा में बताया था कि अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन शुरू किया गया था. इसके तहत 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को नल के जरिए पीने के पानी की आपूर्ति की जाएगी. सरकार के जवाब के मुताबिक, अभी तक देश के 19.15 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 9.81 करोड़ परिवारों के घर पर नल से पानी पहुंचाया जा रहा है.

- इलके अलावा अक्टूबर 2021 में केंद्र सरकार की ओर से अमृत 2.0 योजना शुरू की गई है. इसके तहत अगले 5 साल में यानी 2026 तक सभी शहरों में नल से पानी पहुंचाने का टारगेट तय किया गया है.

 

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