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झारखंडः नेशनल कराटे चैंपियन की मदद को आए CM सोरेन, अफसरों को दिया ये निर्देश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जानकारी दी गई कि रांची निवासी विमला मुंडा ने कराटे में कई मेडल और सर्टिफिकेट हासिल किए हैं. विमला नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट भी रही हैं, लेकिन प्रतिभा की धनी खिलाड़ी की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से किसी प्रकार वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है.

राष्ट्रीय कराटे चैॆपियन विमला का झारखंड सरकार करेगी मदद राष्ट्रीय कराटे चैॆपियन विमला का झारखंड सरकार करेगी मदद
स्टोरी हाइलाइट्स
  • CM ने दिए हर तरह की मदद पहुंचाने के आदेश
  • चावल की बीयर बेचने के लिए मजबूर हैं विमला
  • 34वें राष्ट्रीय खेलों में झारखंड को दिलाया था कांस्य

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कराटे में गोल्ड मेडलिस्ट विमला मुंडा की खराब आर्थिक स्थिति को गंभीरता से लिया है. मुख्यमंत्री ने उपायुक्त रांची को अविलंब मामले में संज्ञान लेने एवं खेल सचिव से समन्वय स्थापित कर विमला को हर तरह की मदद करने का निर्देश दिया है.

साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यवासियों को बताया कि आगामी खेल नीति के क्रियान्वित होने पर खिलाड़ियों का भविष्य भी संवरेगा. 

इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जानकारी दी गई कि रांची निवासी विमला मुंडा ने कराटे में कई मेडल और सर्टिफिकेट हासिल किए हैं. विमला नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट भी रही हैं, लेकिन प्रतिभा की धनी खिलाड़ी की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से किसी प्रकार वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है.

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मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा कि उपायुक्त रांची अविलंब संज्ञान लें एवं खेल सचिव से समन्वय स्थापित कर बहन विमला को हर तरह की मदद पहुंचाते हुए सूचित करें. साथ ही राज्यवासियों को बताना चाहूंगा की हमारी आगामी खेल नीति के क्रियान्वित होने पर खिलाड़ियों का भविष्य संवरेगा. 

विमला ने राज्य के लिए ढेर सारे इनाम जीते, लेकिन गरीबी से जूझ रही इस राष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी को आजीविका चलाने और अपने परिवार को सहारा देने के लिए चावल की बीयर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. वह कॉमर्स से ग्रेजुएट हैं और रांची के कांके ब्लॉक में पतरा गोंडा में अपने नाना के साथ रहती हैं. विमला ने 34वें राष्ट्रीय खेलों में झारखंड के लिए एक कांस्य पदक जीता था.

कोरोना महामारी की वजह अन्य लोगों की तरह विमला और उसके परिवार को खासा संघर्ष करना पड़ रहा है. उन्होंने युवाओं को कराटे सिखाने के लिए एक प्रशिक्षण संस्थान खोला था लेकिन लॉकडाउन की वजह से मार्च में बंद करना पड़ गया.

इंडिया टुडे ग्रुप के लल्लनटॉप प्लेटफॉर्म ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया था और मामला सबकी नजर में आया. फिर सोशल मीडिया में विमला के संघर्ष की कहानी ट्रेंड करने लगी.

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