scorecardresearch
 

रक्षा मंत्रालय के 7000 कर्मचारियों को दूसरी बिल्डिंग में क्यों किया जा रहा शिफ्ट?

जानकारी मिली है कि ये शिफ्टिंग प्रक्रिया में कुछ समय जाने वाला है. सभी को एक साथ शिफ्ट करने की तैयारी नहीं है. बल्कि एक प्रक्रिया के तहत कुछ महीनों के भीतर इस काम को पूरा किया जाएगा.

रक्षा मंत्रालय के 7000 कर्मचारियों को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्टिंग रक्षा मंत्रालय के 7000 कर्मचारियों को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्टिंग
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रक्षा मंत्रालय के 7000 कर्मचारियों की शिफ्टिंग
  • सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की वजह से ये शिफ्टिंग
  • पीएम मोदी करेंगे नए कार्यलयों का उद्घाटन

केंद्र की महत्वकांक्षी परियोजना सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है. एक नए सदन के साथ नया पीएम कार्यलय भी बनाया जा रहा है. अब इस प्रोजेक्ट की वजह से रक्षा मंत्रालय के 7000 कर्मचारियों को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है. सभी को अफ्रीका एवेन्यू और कस्तूरबा गांधी मार्ग पर स्थित कार्यलयों में भेजने की तैयारी है.

रक्षा मंत्रालय के 7000 कर्मचारियों की शिफ्टिंग

ये शिफ्टिंग यूं अचानक नहीं की जा रही है. बल्कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत अब वहां पर पीएम कार्यलय से जुड़ा कंस्ट्रक्शन काम किया जाएगा. लेकिन इस काम के दौरान सरकार द्वारा रक्षा मंत्रालय के उन कर्मचारियों का भी पूरा ध्यान रखा गया है. उनके लिए बकायदा 775 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं. इतने रुपये में ही अफ्रीका एवेन्यू और कस्तूरबा गांधी में नए कार्यलयों का निर्माण किया गया है. खुद पीएम नरेंद्र मोदी 16 सितंबर को नए कार्यलयों का उद्घाटन करने जा रहे हैं. 

जानकारी मिली है कि ये शिफ्टिंग प्रक्रिया में कुछ समय जाने वाला है. सभी को एक साथ शिफ्ट करने की तैयारी नहीं है. बल्कि एक प्रक्रिया के तहत कुछ महीनों के भीतर इस काम को पूरा किया जाएगा. वैसे खबर ये भी है कि अफ्रीका एवेन्यू एक सात मंजिला इमारत होने जा रही है जहां सिर्फ रक्षा मंत्रालय के कार्यलय होंगे, वहीं कस्तूरबा बिल्डिंग में आठ मंजिल होंगी, ऐसे में वहां ज्यादा कार्यलय के लोग साथ काम करते दिख जाएंगे.

क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट?

बता दें कि 22 लाख वर्गफीट भूभाग पर सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए संसद भवन और सचिवालय समेत अन्य इमारतों का निर्माण होना है. इस परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है. हालांकि, माना यही जा रहा है कि परियोजना के पूरा होने में जितनी देर होगी, इसकी लागत बढ़ती जाएगी. वैसे बीच में इस परियोजना पर स्पीड ब्रेकर लगाने की भी तैयारी थी. कोर्ट में इस परियोजना के खिलाफ ही याचिका दायर कर दी गई है. ये अलग बात रही कि कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया और केंद्र के इस प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दिखा दी.


 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें