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आज का दिन: मंत्रिमंडल बंटवारे में क्या RJD के सामने JDU को झुकना पड़ेगा?

क्या नीतीश इस बार तेजस्वी को दे देंगे गृह मंत्रालय? तालिबान राज के एक साल में अफ़गानिस्तान ने कितनी तरक़्क़ी की और कहां पिछड़ा? खिलौना इंडस्ट्री में भारत के सामने क्या हैं चुनौतियां? और अटल बिहारी बाजपेयी की हाज़िर जवाबी के क़िस्से.

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नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

आजतक रेडियो पर हम रोज लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’ जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की खबरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अखबारों की सुर्खियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. जानिए, आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं?

मंत्रिमंडल बंटवारे में क्या RJD के सामने JDU को झुकना पड़ेगा?

पिछला हफ्ता, मंगलवार ही का दिन, 11/12 बजे का लगभग समय था. राजद और जदयू के विधायक इस बात पर मंत्रणा कर रहें थे कि अब आगे क्या. जदयू… बीजेपी को टाटा-बाय-बाय और राजद… जदयू को हेलो-हाय करने का मन बना रही थी. एन्ड रिजल्ट ये रहा, तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री हो गए और नीतीश कुमार नए गठबंधन जिसे महागठबंधन कहा जा रहा, उसके नेता और सूबे के मुख्यमंत्री बन गए. आज दोपहर साढ़े 11 बजे रिपोर्ट्स के मुताबिक नए सिरे से कैबिनेट का गठन होगा. महागठबंधन में कुल सात पोलिटिकल पार्टीज हैं. इनमें जदयू, राजद, कांग्रेस, भाकपा-माले, हम, भाकपा और सीपीएम शामिल है. इन्ही के बूते 24 अगस्‍त को नीतीश विश्‍वास प्रस्‍ताव का सामना भी विधानसभा में करेंगे. ऐसे में, इन पार्टीज की भागीदारी और दावेदारी के बीच नीतीश कुमार ने किस तरह का बैलेंस बिठाया है, पटना में फिलहाल क्या है माहौल और राजद और जदयू में कौन होने जा रहा है बड़ा भाई औऱ किन विधायकों की किस्मत चमकती हुई नज़र आ रही


तालिबान राज के एक साल में कितनी बेहतर हुई अफ़ग़ानों की ज़िंदगी?

ग्रेवयार्ड ऑफ एम्पायर्स यानी साम्राज्यों की क़ब्रगाह कहे जाने वाले अफगानिस्तान की अब बात. पिछले बरस आज के दिन तक अमेरीकी सैनिकों की अफगानिस्तान से वतन वापसी के बाद तालिबानी लड़ाकों ने काबुल पर कब्जा कर लिया था. बाद में उन्होंने सरकार बनाई. लम्बे-चौड़े वायदे किए. शांति, स्थिरता क़ायम करने का, कट्टर इस्लामिक नियमों से इतर लचीला रुख़ अपनाने का. मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा कि तुलनात्मक तौर पर शांति ज़रूर आयी है लेकिन लड़कियों के सेकेंडरी स्कूल बंद कर, लड़कों को दाढ़ी रखने जैसे नियमों को ज़रूरी कर तालिबान पुराने लाइन पर लौट आया है. तो तालिबान के इस एक बरस में लोगों की ज़िंदगी किन मोर्चों पर हुई है बेहतर और कहां हालात हुए हैं बदतर?


खिलौना इंडस्ट्री में भारत चीन को पीछे कर देगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बात के लिए तारीफ़ करनी होगी. वे छोटी-छोटी बातों से बड़ी मैसेज देने की कोशिश करते हैं. ख़ासकर ऐसे सामान्य लोग जिनकी पढ़ाई-लिखाई उतनी दुरुस्त नहीं, वे भी उससे एक सम्बन्ध क़ायम कर लें. कल ऐसा ही कुछ उन्होंने अपने इंडिपेंडेंस डे वाले सम्बोधन के साथ किया. उनका एक बयान ख़ूब पढ़ा, सुना गया जिसमें वे भारतीय खिलौना उद्योग की तरफ़ इशारा करते हुए बोलें कि 'मैंने सुना है कि अब 5-7 साल के बच्चे भी विदेशी खिलौनों के साथ खेलने से मना कर रहे हैं. जब पांच साल के बच्चे विदेशी खिलौनों के साथ नहीं खेलने का प्रण ठान लें तो इसमें आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखती है.' लेकिन सवाल ये है कि पीएम ने खिलौने ही को क्यों चुना, क्या वाक़ई इस इंडस्ट्री में हम कमाल कर रहे हैं?

इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के दिन की इतिहास में अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.

16 अगस्त 2022 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें...

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