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असम में अमन की राह में बड़ा कदम, 8 आदिवासी गुटों ने केंद्र सरकार से किया शांति समझौता

असम के 8 आदिवासी गुटों ने सरकार के साथ शांति समझौता किया है. अब ये गुट मुख्यधारा में लौटेंगे. इस समझौते को लेकर गृह मंत्रालय में बैठक हुई. ये गुट पिछले साल संघर्ष विराम पर राजी हुए थे. इन 8 गुटों के करीब 1100 सदस्य हैं, जिन्होंने हथियार छोड़े हैं. शांति बहाली की दिशा में सरकार का यह बड़ा कदम है.

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गृहमंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
गृहमंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

असम में शांति बहाली की दिशा में गुरुवार का दिन बहुत अहम रहा. 8 आदिवासी गुटों ने सरकार के साथ शांति समझौता किया है. इससे राज्य के विकास को भी सीधा फायदा होगा. साथ ही शांति समझौते के बाद ये गुट मुख्यधारा में लौटेंगे.

राजधानी दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में 8 आदिवासी गुटों ने समझौता किया. इस समझौते को लेकर गृह मंत्रालय में बैठक हुई. ये गुट संघर्षविराम पर पिछले साल राजी हुए थे.

समझौते में शामिल गुटों में ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी, द आदिवासी कोबरा मिलिटेंट ऑफ असम, बिरसा कमांडो फोर्स, संथाल टाइगर फोर्स, आदिवासी पीपुल आर्मी समेत तीन अन्य ग्रुप हैं.

आज के अहम शांति समझौते से इन गुटों के करीब 1100 सदस्य मुख्यधारा में लौटे हैं असम में शांति बहाली की दिशा में गृह मंत्रालय का बड़ा कदम है. बता दें कि देश के सबसे बड़े उग्रवादी गिरोहों में से एक उल्फा भी असम में कई दशकों से सक्रिय रहा है. 

आज का दिन बहुत खास- अमित शाह
इस मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर के लिए आज का दिन बहुत खास है. पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए मोदी सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं. विभिन्न गुटों के 1100 के करीब सदस्यों ने हथियार छोड़े हैं. हम चाहते हैं कि असम के साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र नशा मुक्त, आतंक मुक्त और झगड़ा मुक्त होकर पूरी तरह विकसित हो. इस दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है.

बांग्लादेश से घुसपैठ के कारण यहां खून-खराबा आम बात रही है. असम बेहद संवेदनशील राज्य है और यहां की समस्याएं देश के अन्य राज्यों से अलग हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य और केंद्र सरकार ने गंभीरता के साथ बड़ा कदम उठाया है. 

साल 2012 में 1855 उग्रवादियों ने किया था आत्मसमर्पण
पूर्वोत्तर क्षेत्र में साल 2012 में 9 गुटों के 1855 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था. इनके मुख्यधारा में लौटने की खुशी पर रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ था. उग्रवादियों ने अफने कमांडरों के नेतृत्व में हथियार और गोलाबारूद सौंप दिया था. आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी, संथाल टाइगर फोर्स, बिरसा कमांडो फोर्स, आदिवासी कोबरा मिल्रिटी ऑफ असम, कुकी लिबरेशन आर्मी, कुकी लिबरेशन आर्गेनाइजेशन, हमार पीपुल्स कन्वेंसन, युनाइटेड कुकीगाम डिफेंस आर्मी और कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी के थे. समर्पण करने वालों में आदिवासी संथाल संगठन के पांच बड़े जातीय समूहों के उग्रवादी शामिल थे जो ऊपरी असम में सक्रिय थे.


 

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