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'जब मैं नई थी, तब साथी पुरुष जजों का मजाक पसंद नहीं आता था', रिटायरमेंट स्पीच में बोलीं SC जज इंदिरा बनर्जी

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी शुक्रवार को रिटायर हो गईं. अब सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या सिर्फ 3 रह गई है. रिटायरमेंट के मौके पर उन्होंने अपने करियर के उतार-चढ़ाव से जुड़ी कई बातें शेयर कीं. उन्होंने बताया कि जब वो नई थीं तब उन्हें अपने साथी पुरुष जजों का मजाक कई बार पसंद नहीं आता था.

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जस्टिस इंदिरा बनर्जी (File Photo) जस्टिस इंदिरा बनर्जी (File Photo)

देश की सर्वोच्च अदालत की जस्टिस इंदिरा बनर्जी शुक्रवार को रिटायर हो गईं. मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित के अलावा इस मौके पर कई और साथी जज मौजूद रहे. उन्होंने अपनी रिटायरमेंट स्पीच में अपने जीवन के कई अनुभव शेयर किए. उन्होंने बताया कि उनके वक्त में ये पेशा महिलाओं के लिए कितना मुश्किल हुआ करता था. अब समय बदल गया है, लेकिन अपने समय में उन्हें कई बार अपने साथी पुरुष जजों का मजाक पसंद नहीं आया करता था.

जस्टिस इंदिरा बनर्जी के विदाई समारोह में सुप्रीम कोर्ट की तीन अन्य महिला जज जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस बीवी नागरथ भी मौजूद रहीं. लीगल फील्ड में 35 साल का लंबा समय बिताने वाली जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने इस मौके पर कहा कि वह अपने सीनियर जजों से अनुरोध करेंगी कि उनके जाने के बाद महिला जजों की संख्या को बरकरार रखा जाए. अगर कॉलेजियम की लिस्ट में कोई सीनियर महिला जज ना हो तो बार एसोसिएशन से किसी वकील को जज के तौर पर एलिवेट करके इस कमी को पूरा किया जाए. जस्टिस इंदिरा बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की सदस्य रही हैं.

'हमारा समय आसान नहीं था'

अपनी रिटायरमेंट के मौके पर जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने अपनी शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह इस फील्ड में आई तब युवा महिलाओं का इस पेशे में आना और काम कर पाना मुश्किल होता था. तब बहुत कम महिलाएं इस काम को करती थी. अब तो हमारे पास विशाखा गाइडलाइन्स है, लोग भी संवेदनशील हुए हैं. पहले के दिनों में महिलाओं के काम करने की बात 'हंसी-मजाक' (all in jest and humour) में होती थी. अगर तब मैं लाइब्रेरी जाकर किसी वकील से बात करती थी, तो अन्य साथी वकील उसे चिढ़ाया (jocular comments)करते थे कि सुंदर महिलाएं तुमसे मिलने क्यों आ रही हैं.'

'कई बार पसंद नहीं आता था मजाक'

जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने कहा कि अब मैं शायद उन बातों पर हंसती हूं, लेकिन जरा सोचिए कि किसी युवा और फील्ड में नई-नई आई महिला को कैसा लगता होगा? मुझे अक्सर उनका ये मजाक पसंद नहीं आता था. जब वह हाई कोर्ट की जज बनी तब भी उन्हें अपने पुरुष जजों से अक्सर ये सुनना पड़ता था कि उनके महिला होने की वजह से उन्हें वकील से जज बनाया गया है.

उन्होंने अपनी मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि महिला वकीलों के साथ इस पेशे में सबसे बड़ी दिक्कत 'समय की मांग' को लेकर आती है. ये पेशा बहुत समय मांगता है. हालांकि इस मौके पर उन्होंने बार एसोसिएशन की सदस्य महिला जजों से कहा कि उन्हें युवा महिला वकीलों को प्रोत्साहित करना चाहिए. ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस पेशे में आएं. उन्हें एक दूसरे का सपोर्ट करना चाहिए.

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