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आज का दिन: अमेरिकी रिपोर्ट और सरकारी कोरोना मौत के आंकड़ों में इतना अंतर क्यों है?

अमेरिका की एक संस्था है, सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट. इसने एक रिपोर्ट जारी की है, जो बताती है कि भारत में कोविड से मरने वालों की संख्या 34 से 49 लाख के बीच है. ये संख्या सरकारी आँकड़े से कई गुना ज़्यादा है.

भारत में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े सवालों के घेरे में. (फोटो- पीटीआई) भारत में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े सवालों के घेरे में. (फोटो- पीटीआई)

कोरोना की दूसरी लहर थम चुकी है. लेकिन इस पर सियासत नए सिरे से सुलग रही है. ताज़ा राजनीति शुरू हुई केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉक्टर भारती प्रवीण कुमार के संसद में इस बयान से कि दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है, कम से कम उनको राज्य की ओर से इस बाबत कोई जानकारी नहीं दी गयी है, मंत्री महोदय के बयान आते ही बहस छिड़ गई और कई राज्यों ने मंत्री के बयान का समर्थन भी किया.

इसी के बरक्स , ब्रिटेन में भी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का एक टेक्स्ट लीक हुआ है. इसमें वो कह रहे हैं कि जितने भी लोग ब्रिटेन में कोरोना से मरे हैं, वे सब 80 की उम्र पार कर चुके हैं. और उनकी औसत उम्र उनकी पूरी हो ही चुकी थी. वहाँ, विपक्षी दल अब इस पर जॉनसन को माफी मांगने को कह रहे हैं. 

खैर, अब अपने देश पर वापस आते हैं. यहां एक चीज और है जिसे लेकर अभी भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है. वो है कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा. हालांकि हमारे यहां कोरोना से मरने वालों का आधिकारिक आँकड़ा 4 लाख के करीब है. लेकिन इस पर कई सवाल दूसरी लहर के बीच में ही उठनी शुरू हो गए थे. कई संस्थाओं और बिपक्ष ने ये दावा किया की भारत सरकार मौतों के आंकड़ों को छुपा रही है. और सरकार हमेशा इस बात को नकारती रही है.

अब अमेरिका की एक संस्था है, सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट. इसने एक रिपोर्ट जारी की है, जो बताती है कि भारत में कोविड से मरने वालों की संख्या 34 से 49 लाख के बीच है. ये संख्या सरकारी आँकड़े से कई गुना ज़्यादा है. यही नहीं रिपोर्ट ये भी कहती है कि देश के बंटवारे के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी मानव त्रासदी है. इतने बड़े पैमाने पर कभी जान नहीं गयी. 

इस यूएस बेस्ड रिपोर्ट के  को ऑथर फॉर्मर इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यन है जिन्होंने इंडिया टुडे को इस रिपोर्ट के बारे में इंटरव्यू दिया है. उनके इंटरव्यू की और इस रिपोर्ट की कुछ मेजर फाइंडिंग्स क्या है और किस आधार पर कहा जा रहा है कि इतनी मौतें हुई है भारत में?

आइसीएमआर ने कहा है कि देश में तक़रीबन 67 फीसदी लोग इम्यून हो चुके है. तो दूसरी ओर अगस्त में तीसरी लहर की चेतावनी भी दी जा रही है. वहीं  प्रधानमंत्री मोदी वायरस को लेकर कई दफ़ा चेताते रहे हैं, अपने एक संबोधन में उन्होंने कहा था कि "ये वायरस अपना स्वरूप बदलने में माहिर है. या ये कहें कि यह बहुरूपिया तो है ही, धूर्त भी है." उनकी ये बात कहीं न कहीं सही भी है. क्योंकि पहले हमने वायरस का अल्फा, फिर डेल्टा, डेल्टा प्लस, कप्पा और अब डबल इंफेक्शन का केस भी देखा था. 

लेकिन कल ही देश में असम की एक महिला डॉक्टर में अल्फा और डेल्टा दोनों वैरिएंट एकसाथ पाए गए हैं, भारत में डबल म्यूटेशन का ये पहला केस है, हालांकि कुछ एक देशों में पहले भी ऐसा केस संज्ञान में आया था. और तो और महिला डॉक्टर ने वैक्सीन की दोनों डोज़ ले रखी थी. तो आख़िर ये  इन्फेक्शन हो कैसे जाता है? ये कितना फ्रीक्वेंट और घातक है? क्या ये इंडिकेट कर रहा है कि हमें बूस्टर डोज देने की भी जरूरत पड़ेगी ?

एक समय था जब जजेज़ कांस्टीट्यूशनल पोस्ट पर रहने के चलते अपने व्यूज़ पब्लिक में रखने से बचते थे. तभी बाहर बोलते हुए दिखाई देते थे जब उन्हें एकेडमिक लेक्चर्स वग़ैरह में आमंत्रित किया जाता था.. लेकिन अब वक़्त बदला है. ख़ासकर अप्रैल में एमवी रमना के चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया बनने के बाद ये ज़्यादा दिखा.

 ख़ुद रमना 10 बार इवेंट्स में अपनी बात रख चुके हैं अलग अलग टॉपिक्स पर. तो अब जो जजेज़ में थोड़ी मुखरता दिखी है उसके बाद कई लोग कहने लगे हैं कि क्या जज इसके ज़रिए कोई मैसेज भी दे रहे हैं? आजतक रेडियो रिपोर्टर नलिनी शर्मा, जो सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ख़बरें कवर करती हैं. एनवी रमना और भी कई जजेस की 17 भाषणों का विश्लेषण उन्होंने किया और मायने तलाशने की कोशिश की. उनसे जानेंगे कि भाषणों में कौन से मुद्दे न्यायधीशों ने उठाए हैं? इनका क्या अर्थ है?

मॉनसून सत्र के ही बरक्स किसान अपने आंदोलन को धार देने में आज से जुट गया है,  इस कड़ी में किसान आज से जंतर मंतर पर धरना देने की तैयारी में है। शुरू में दिल्ली में उनकी इंट्री को लेकर चीज़े अटकी हुई थी ख़ासकर कोविड प्रोटोकॉल और पहले हुई हिंसा के मद्देनजर. लेकिन फिर दिल्ली पुलिस के साथ हुई बैठक और बातचीत के बाद कल आखिरकार किसानों के प्रदर्शन को हरी झंडी दे दी,  पुलिस के बाद प्रर्दशन की अनुमति संयुक्त किसान मोर्चा को DDMA यानी Department Of Delhi Disaster Management Authority ने  दे दी है.

 22 जुलाई से 9 अगस्त तक वे लोग जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करेंगे, हालाँकि इस दौरान 200 लोगों के प्रदर्शन और किसान संसद लगाने की इजाज़त होगी. दिल्ली पुलिस की अनुमति से आगे इस प्रदर्शन को जो आम आदमी पार्टी की ओर से समर्थन मिल रहा है, उस पर बहुत बात हो रही है, क्या हैं इसके पॉलिटिकल मायने?

22 जुलाई 2021 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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