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आज का दिनः सपा के हाथ से कैसे निकल गए रामपुर और आजमगढ़?

उत्तर प्रदेश में इक्का दुक्का सीटों पर होने वाला उपचुनाव भी बेहद दिलचस्प होता है और इसकी बानगी कल देखने को भी मिली. आजमगढ़ और रामपुर दोनों ही सीटें जहां समाजवादी पार्टी का वर्चस्व रहा, वहां कल कमल खिल गया.

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अखिलेश यादव (फाइल फोटो) अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में इक्का दुक्का सीटों पर होने वाला उपचुनाव भी बेहद दिलचस्प होता है और इसकी बानगी कल देखने को भी मिली. आजमगढ़ और रामपुर दोनों ही सीटें जहां समाजवादी पार्टी का वर्चस्व रहा, वहां कल कमल खिल गया. एक तरफ आजमगढ़ में भोजपुरी सिनेमा के स्टार और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रत्याशी दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने सपा प्रत्याशी और अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को हराया है. हालांकि काउंटिंग के दौरान निरहुआ और धर्मेंद्र के बीच कांटे का मुकाबला रहा और जीत का अंतर भी करीब साढ़े 8 हजार वोट के आसपास है.

वहीं दूसरी तरफ आजम के गढ़ यानी आजम खान का मजबूत किला कहे जाने वाले रामपुर में भी बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है. यहां आजम खान के समर्थक सपा प्रत्याशी मोहम्मद आसिम रजा को बीजेपी कैंडिडेट घनश्याम सिंह लोधी ने करीब 42 हजार वोट के बड़े अंतर से पटखनी दे दी. बीजेपी अपनी इस जीत पर फूले नहीं समा रही है. पीएम मोदी ने इस जीत के लिए डबल इंजन सरकार को लोगों का समर्थन और स्वीकृति करार दिया.

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन नतीजों से जनता ने परिवारवादी ताकतों को स्पष्ट संदेश दिया है. आजमगढ़ और रामपुर जैसी सीटें अखिलेश यादव और आजम खान जैसे सपा के दिग्गज नेताओं के छोड़ने पर खाली हुईं. बावजूद इसके यहां उनकी राजनीतिक विरासत को कोई संभाल क्यों नहीं पाया. उनके नाम का असर क्यों नहीं दिखाई पड़ा. घनश्याम लोधी की जीत उनका अपना राजनीतिक रसूख का फल है या ये रामपुर को सपा की अनदेखी करने का नतीजा?  

3 महीने में ही संगरूर क्यों हार गई आप?

पंजाब में संगरूर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सत्ता में रहते हुए आम आदमी पार्टी हार गई. यहां से गुरमेल सिंह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार थे और ये सीट सूबे के मुखिया भगवंत मान के विधायक बनने के बाद खाली हुई थी. ये एक इकलौती लोकसभा सीट थी जो आम आदमी पार्टी के पास थी लेकिन भगवंत मान के सीट छोड़ने के तीन महीने बाद ही पार्टी का किला ढह गया है. इस सीट पर शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के उम्मीदवार सिमरनजीत सिंह मान ने जीत हासिल की है. तो संगरूर की ये सीट जिस पर होने वाले उपचुनाव को आम आदमी पार्टी की प्रतिष्ठा की लड़ाई कहा जा रहा था वहां उसकी ऐसी शर्मनाक हार क्यों हुई?

राजेंद्र नगर में AAP ने विरोध के बीच कैसे साधे समीकरण?

पंजाब में आप को हार का मुंह देखना पड़ा लेकिन दिल्ली में उसका जलवा कायम रहा. राजेंद्र नगर सीट पर विधानसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दुर्गेश पाठक ने भारतीय जनता पार्टी के राजेश भाटिया को हरा दिया. राघव चड्ढा के राज्यसभा पहुंचने के बाद ये सीट खाली हुई थी और इस सीट पर आम आदमी पार्टी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी भी देखने को मिली थी. दरअसल, मसला ये था कि राजेंद्र नगर से विधायक रहे राघव चड्ढ़ा, दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी थे लेकिन वे यहां के लोगों को पानी की समस्या हल नहीं कर सके. सड़कों की बदहाली को लेकर भी यहां आवाज उठती रही. बावजूद यहां आम आदमी पार्टी समीकरण साधने में कामयाब कैसे रही?

किसके सिर बंधा रणजी में मध्य प्रदेश की जीत का सेहरा?

भारत और आयरलैंड की टीम के बीच दो मैचों की टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला बारिश की वजह से रविवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे शुरू हो सका. भारत ने 7 विकेट से ये मैच जीत लिया लेकिन इससे पहले दिन में क्रिकेट के इतिहास में एक और अध्याय लिखा गया. दरअसल, रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में पहली बार मध्य प्रदेश ने जीत हासिल की है. मध्य प्रदेश ने फाइनल मुकाबले में 41 बार की चैंपियन मुंबई को छह विकेट से शिकस्त देकर इस बार रणजी ट्रॉफी उठा ली.

आखिरी दिन मुंबई ने एमपी के सामने जीत के लिए 108 रनों का लक्ष्य रखा था जिसे टीम ने 30 वें ओवर की एक गेंद रहते ही हासिल कर लिया. तो रणजी में 5 दिन चले मैच में किस तरह का घटनाक्रम देखने को मिला और पहली बार विजेता बने मध्य प्रदेश के लिए इस जीत के क्या मायने हैं? कोच चंद्रकांत पंडित की सरपरस्ती में ये जीत हासिल हुई है. छठवीं बार किसी टीम को उन्होंने रणजी चैंपियन बनाया है तो उनका कितना बड़ा रोल रहा इस जीत में?

इन खबरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताजा हेडलाइंस, देश-विदेश के अखबारों से सुर्खियां, आज के दिन की इतिहास में अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.

27 जून 2022 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें...

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