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111 राजनीतिक दलों ने किया चंदा का पैसा हजम, तो निर्वाचन आयोग ने किया 'खेल खत्म'!

इलेक्शन कमीशन ने फर्जी पते और आधार पर चलने वाली 111 राजनीतिक पार्टियों पर एक्शन लिया है. इन सभी पार्टियों ने जो जानकारियां आयोग को मुहैया कराई, उनमें गड़बड़ियां मिलीं.

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चुनाव आयोग ने गलत जानकारियां मिलने पर कई गैर राजनीतिक दलों पर एक्शन लिया है
चुनाव आयोग ने गलत जानकारियां मिलने पर कई गैर राजनीतिक दलों पर एक्शन लिया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गैर राजनीतिक दलों पर इलेक्शन कमीशन का एक्शन
  • 87 राजनीतिक पार्टियों को लिस्ट से डिलीट किया

फर्जी पते और आधार पर चलने वाली 111 राजनीतिक पार्टियों पर निर्वाचन आयोग की गाज गिरी है. आयोग ने इन रजिस्टर्ड लेकिन गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का खेल खत्म कर दिया है. जानकारी के मुताबिक अनाप शनाप चंदा वसूल कर काले धन के कारोबार और कानूनी संरक्षण के मजे लेने वाले इन राजनीतिक दलों ने अपने आय व्यय का हिसाब तक नहीं दिया. जिन्होंने उल्टा सीधा हिसाब दिया भी तो उसमें अनगिनत गड़बड़ियां मिलीं. आयोग ने पिछले महीने ऐसी ही 87 राजनीतिक पार्टियों को लिस्ट से डिलीट कर दिया था. 

आयोग ने इन 111 पार्टियों में से तीन के खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश राजस्व विभाग से कर दी है. बताया जा रहा है कि इनके खिलाफ आर्थिक अपराधिक कारनामों के सबूत आयोग को मिले हैं. इसके अलावा आयोग ने 2017 से अपने आय व्यय और चंदे की जानकारी का हिसाब किताब जमा नहीं करने वाले 2351 राजनीतिक पार्टियों की सूची आयकर विभाग को सौंपी है. ताकि इनकी कुंडली खंगाली जा सके.

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 बीते महीने मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद भार संभालने के फौरन बाद राजीव कुमार ने 'सुधार अभियान' शुरू कर दिया था. आत्म सुधार के साथ साथ आयोग की भी सफाई मुहिम भी शुरू कर दी. आयोग ने 25 मई को गैर मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड पार्टियों के खिलाफ सफाई मुहिम शुरू करते हुए ऐसी 66 पार्टियों के खिलाफ नोटिस भेजा. इन पार्टियों की ओर से 2020 में आयकर घोषणा में गड़बड़ी की शिकायतें सही पाई गईं. देश में अभी 2796 रजिस्टर्ड गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं.

ऐसे में रजिस्टर्ड गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों पर निर्वाचन आयोग का शिकंजा कसा और आयोग के अधिकारियों ने एक एक पार्टी को खंगालना शुरू किया तो ऐसी 87 पार्टियों के रजिस्टर्ड पते पर कोई दफ्तर नहीं मिला. उन्होंने दफ्तर बदलने की कोई सूचना तक आयोग को नहीं दी. जिसके बाद आयोग ने ऐसे दलों को नोटिस भेजा.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने पद संभालने के बाद दूसरा बड़ा कदम राजनीतिक दलों की छंटनी का उठाया. सबसे पहला कदम तो आयोग ने आयकर और विशेष भत्ते ना लेने का प्रस्ताव पारित कर उठाया था. हर महीने हजारों रुपए के मेजबानी भत्ता और साल में तीन बार परिवार के साथ मुफ्त यात्रा की सुविधा में से दो यात्राओं को मना कर दिया. इसके अलावा कुछ विशेष भत्ते भी आयुक्त नहीं लेंगे.

 

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