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Best commando in India: घातक, गरुड़, मार्कोस...दुश्मन के लिए काल हैं भारत की ये 10 खतरनाक कमांडो फोर्स

best commando in India
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दुनिया के सभी देशों के पास अपनी कमांडो फोर्स है. भारत के पास भी स्पेशल फोर्सेज हैं. जिन्हें कमांडो कहते हैं. इनका मुख्य काम होता है आतंकी हमला रोकना, होस्टेज सिचुएशन से लोगों को बचाना, सीक्रेट ऑपरेशन करना, सर्जिकल स्ट्राइक या फिर कॉम्बैट रीकॉनसेंस. युद्ध में ये दुश्मन को धूल चटा देते हैं. जमीन, जल या वायु कहीं भी और किसी भी तरह के युद्धक मिशन को पूरा करने के लिए हमेशा तैयार रहना. ये मारने और मरने दोनों के लिए तैयार रहते हैं. आइए जानते हैं भारत की ऐसी 10 घातक कमांडो फोर्स के बारे में... 

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पैरा एसएफ (Para SF) : पैरा एसएफ (Para SF) के जवानों ने डोगरा रेजिमेंट की घातक टुकड़ी के साथ मिलकर पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की थी. इन्हें पैराशूट कमांडो भी कहते हैं. इस कमांडों फोर्स को 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय बनाया गया था. इनकी ट्रेनिंग 9 महीने की होती है. जिसमें 65 किलोग्राम वजन के साथ कई किलोमीटर की दौड़ भी शामिल होती है. खतरनाक और जानलेवा ट्रेनिंग के बाद तो कैडेट पास होता है उसे मरून टोपी (Maroon Barrett) मिलती है. ये टोपी ही बताती है कि ये जवान पैरा एसएफ है. इनके यूनिफॉर्म में कैमोफ्लॉज की सुविधा होती है. यानी अलग-अलग स्थानों के हिसाब से छिपने में मदद करता है. ये 30 से 35 हजार की ऊंचाई से छलांग लगाने की भी प्रैक्टिस करते हैं. देश में पैरा एसएफ की कुल 9 बटालियन है. (फोटोः इंडिया टुडे आर्काइव)

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मार्कोस कमांडो फोर्स (Marcos Commando Force): इन्हें भारत का नेवी सील्स (Navy Seals) कहा जाता है. इन्हें भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया जाता है लेकिन ये जमीन और आसमान में कहीं भी दुश्मन से लोहा लेने के लिए तैयार और ट्रेन्ड होते हैं. इनकी ट्रेनिंग अमेरिकी नेवी सील्स की तरह ही होती है. मार्कोस फोर्स में फिलहाल 1200 कमांडो हैं. यह फोर्स 1987 में बनाई गई थी. इन्हें दुनिया के सभी आधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. इनके पास बेहतरीन स्नाइपर्स होते हैं, जो दूर से ही दुश्मन की माथे के बीचो-बीच गोली मार देते हैं. ये कई तरह के असॉल्ट राइफल्स चलाने में माहिर होते हैं. (फोटोः इंडियन नेवी)
 

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कोबरा कमांडो (CoBRA Commando): ये कमांडो टीम 2008 में बनाई गई थी. कोबरा कमांडो फोर्स का पूरा नाम कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन (CoBRA) है. इनकी तीन महीने की ट्रेनिंग होती है. फिलहाल इस फोर्स में 10 हजार कमांडो हैं. आमतौर पर इन्हें गोरिल्ला ट्रेनिंग और नक्सल वॉरफेयर के लिए ट्रेन्ड किया जाता है. इन्हें दुनिया की बेस्ट पैरामिलिट्री फोर्स में गिना जाता है. यह दुश्मनों पर लगातार हमला करने में एक्सपर्ट होते हैं. राष्ट्रपति भवन और संसद समेत कई महत्वपूर्ण इमारतों की सुरक्षा का काम इनके पास है. (फोटोः गेटी)

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एनएसजी कमांडो फोर्स (NSG Commando Force): जब भी देश में बड़े आतंकी हमले हुए हैं चाहे वह 26/11 हो या फिर अक्षरधाम मंदिर का हमला हो. एनएसजी कमांडो फोर्स (NSG Commando Force) ने ही आतंकियों को ढेर किया है. ये हैं देश के ब्लैक कैट्स. एनएसजी का पूरा नाम राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard) है. इस फोर्स को 1984 में बनाया गया था. फिलहाल इसमें 10 हजार सक्रिय कमांडो हैं. जिन्हें अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग टीमों में बांटा गया है. ये आतंकरोधी अभियानों में पूरी तरह से प्रशिक्षित होते हैं. इसमें देश के किसी भी सैन्य, अर्द्धसैनिक बल या पुलिस से जवान शामिल हो सकते हैं. इनकी ट्रेनिंग 14 महीने की होती है. यह गृह मंत्रालय के तहत काम करते है. यह वीआईपी सिक्योरिटी, हाईजैकिंग रोकने, बम का पता लगाने जैसे अन्य कामों में भी तैनात किए जाते हैं. (फोटोः पीटीआई)

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गरुड़ कमांडो फोर्स (Garud Commando Force): यह भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) की घातक कमांडो फोर्स है. इस फोर्स को फरवरी 2004 में बनाया गया था. इनका मुख्य काम एयर असॉल्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, क्लोज प्रोटेक्शन, सर्च एंड रेसक्यू, आतंकरोधी अभियान, डायरेक्ट एक्शन, एयरफील्ड्स की सुरक्षा आदि. इनकी ट्रेनिंग 72 हफ़्तों की होती है जो सभी कमांडो से सबसे ज्यादा लंबी होती है. गरुड़ कमांडो रात में हवा और पानी में मार करने के लिए एक्सपर्ट होते हैं. हवाई हमले के लिए इन्हें अलग से ट्रेनिंग दी जाती है. फिलहाल इस फोर्स में 1780 गरुड़ कमांडो हैं. (फोटोः इंडियन एयरफोर्स)

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एसपीजी कमांडो फोर्स (SPG Commando Force): एसपीजी कमांडो बनाने की वजह थी की साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या. 1985 में एसपीजी फोर्स बनाई गई. इस फोर्स में कुल 3000 सक्रिय जवान  हैं. जिनका मुख्य काम होता है प्रधानमंत्री की सुरक्षा. इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इकलौते हैं, जिनका प्रोटेक्शन एसपीजी के हाथ में है. ये अक्सर सूट-बूट में दिखते हैं. सूट के अंदर कई तरह के हथियार छिपे होते हैं. हाथ में क्लोज कॉम्बैट के लिए असॉल्ट राइफल होती है. अगर कोई भी दुश्मन प्रधानमंत्री के पास आया तो सेकेंड्स में उसकी मौत तय है. इनके पास करीब एक दर्जन हथियार होते हैं. (फोटोः AFP)

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घातक कमांडो फोर्स (Ghatak Commando Force): ये कमांडो फोर्स अपने नाम की तरह ही बहुत घातक है. इसे 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बनाया गया था. घातक प्लाटून आमने-सामने की लड़ाई के लिए दक्ष होती है. इनकी ट्रेनिंग भी पैरा कमांडो की तरह होती है. जब कोई खास मिशन होता है तो कुछ बटालियन में से चुस्त ताकतवर और घातक सैनिकों को तैनात किया जाता है. पाकिस्तान में हुई सर्जिकल स्ट्राइक में पैरा-एसएफ के साथ इसी टुकड़ी ने हमला किया था. इसमें फिलहाल 7000 कमांडो हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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फोर्स वन कमांडो (Force One Commando): मुंबई में जब 26/11 आतंकी हमले के बाद फोर्स-1 (Force One) कमांडो बल बनाया गया. इसे महाराष्ट्र की सरकार ने बनाया था ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो. यह किस भी समय आपदा या हमले का सामना करने के लिए तैयार रहते है. दुनिया की सबसे तेज कमांडो फोर्स में से एक है. असल में इसमें महाराष्ट्र पुलिस के ही जवानों को लेकर घातक ट्रेनिंग दी जाती है. फिलहाल इस फोर्स में 300 कमांडो हैं. इनकी ट्रेनिंग NSG कराती है. (फोटोः AFP)

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सीआईएसएफ कमांडो (CISF Commando Force): इसका गठन 10 मार्च 1969 में हुआ था. सीआईएसएफ का पूरा नाम सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (Central Industrial Security Force) है. ज्यादातर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा करते है, जैसे-दिल्ली, मुंबई के एयरपोर्ट और यह वीआईपी जगहों की भी देखभाल करते हैं. जैसे- भाभा एटॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, इसरो के केंद्र, एटॉमिक पावर प्लांट्स आदि. 26/11 मुम्बई हमले के बाद प्राइवेट सेक्टर की सिक्योरिटी में भी इनकी तैनाती होने लगी. (फोटोः गेटी)

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स्वाट कमांडो (SWAT Commando Force): इनका पूरा नाम स्पेशल वेपंस एंड टैक्टिक्स (Special Weapons and Tactics) हैं. इनका गठन 1965 की भारत पाकिस्तान जंग के बीच हुआ था. कहा जाता है उनकी और एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग में कोई अंतर नहीं होता. इस कमांडो ग्रुप में सभी जवान 28 की उम्र से कम के होते है. इन्हें हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार किया जाता है. ये आमतौर पर अर्बन वॉरफेयर के लिए ट्रेन्ड होते हैं. यह घात लगाकर हमला करने में माहिर होते है. (ये स्टोरी इंटर्न आदर्श ने लिखी है)