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Political Crisis In Maharashtra: 16 शिवसेना विधायकों पर लटकी तलवार, अयोग्य हुए तो क्या होगा?

16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की शिवसेना की मांग पर विचार करने के बाद डिप्टी स्पीकर नोटिस जारी कर सकते हैं, जिसमें एकनाथ शिंदे भी शामिल हैं. नोटिस जारी करने के बाद शिवसेना की शिकायत पर स्पष्टीकरण के लिए 16 विधायकों की सुनवाई होगी.

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Maharashtra Political Crisis (PTI) Maharashtra Political Crisis (PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र में सियासी टकराव बढ़ता ही जा रही है
  • बागियों के खिलाफ शिवसेना का तल्ख तेवर
  • 16 विधायकों को अयोग्य करने की मांग

महाराष्ट्र में सियासी टकराव बढ़ता ही जा रही है. शिवसेना के बागी नेताओं के खिलाफ पार्टी ने भी तेवर तल्ख कर दिए हैं. 12 विधायकों पर एक्शन की मांग के बीच अब इसमें चार और नए नाम जुड़ गए हैं. ऐसे में अब कुल 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए के लिए पार्टी ने विधानसभा स्पीकर को लेटर दिया है. शिवसेना का लीगल विंग विधानसभा पहुंच चुका है.

16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की शिवसेना की मांग पर विचार करने के बाद डिप्टी स्पीकर नोटिस जारी कर सकते हैं, जिसमें एकनाथ शिंदे भी शामिल हैं. नोटिस जारी करने के बाद शिवसेना की शिकायत पर स्पष्टीकरण के लिए 16 विधायकों की सुनवाई होगी.

बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी के बीच सुनवाई के लिए वर्चुअल मौजूदगी पर विचार किया जा सकता है. अगर अनुमति मिल जाती है तो  National Informatics Centre (NIC) के मुताबिक, एक दिन में 2 से 4 विधायकों की सुनवाई हो सकती है.

हालांकि, यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया (quasi judicial procedure) होगी, जिसमें समय लगेगा. इसकी कोई समय सीमा नहीं है, लेकिन विधानसभा जल्द से जल्द अयोग्यता याचिका के निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करेगी.

इन विधायकों को अयोग्य करने की मांग

1- एकनाथ शिंदे, 2- महेश शिंदे, 3- अब्दुल सत्तार, 4- भारत गोगावाले, 5- संजय शिरसातो, 6- यामिनी जाधव, 7- अनिल बाबरी, 8- तानाजी सावंत, 9- लता सोनवणे, 10- प्रकाश सुर्वे, 11- बालाजी किनीकारो, 12- संदीपन भुमरे, 13- बालाजी कल्याणकारी, 14- रमेश बोर्नारे, 15- चिमनराव पाटिल, 16- संजय रायमुनकरी

शिवसेना में जो हुआ, वो कल्पना करनी भी मुश्किल था!

बाला साहेब के पसीने पर खड़ी हुई पार्टी से कई नेता बिछड़े, लेकिन दशकों से महाराष्ट्र में शिवसेना की सियासी चमक और धमक कभी फीकी नहीं पड़ी. लेकिन वक्त का पहिया घूमा और 21 जून 2022 से शिवसेना में वो हुआ, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल था. कयास यही लगाए जाते थे कि कांग्रेस या फिर एनसीपी में टूट हो सकती है, लेकिन हुआ उलटा. यानी ये बात समझ से परे थी कि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना के अंदर से ही नेतृत्व परिवर्तन की इतनी बुलंद आवाज उठ सकती है. खुल्लम खुल्ला सबसे बड़ी बगावत का ऐलान हो सकता है. ऐसे में अब सवाल है कि आगे क्या होगा. मौजूदा सियासी सूरत-ए-हाल को देखकर ऐसी संभावनाएं बन रही हैं...

1- एकनाथ शिंदे के दवाब में शिवसेना महाअघाड़ी गठबंधन छोड़ दें.

2- एकनाथ शिंदे गुट बीजेपी को समर्थन दे और फणनवीस की सरकार

3-  शिंदे मुख्ममंत्री बने और महाअघाड़ी की सरकार चलती रहे

4- अगर सब अड़े रहे तो विधानसभा में सरकार के भविष्य का फैसला

5- शिवसेना में टूट हुई तो पार्टी पर कब्जे की कानूनी लड़ाई शुरू होगी

यानी महाराष्ट्र की सियासी पिक्चर का ट्रेलर अभी रिलीज हुआ हैं, पूरी पिक्चर अभी बाकी है. 

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