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शिवसेना पर वर्चस्व के लिए निर्वाचन आयोग पहुंचा ठाकरे गुट, कहा- किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले हमारा पक्ष भी सुनें

शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट अब शिवसेना पर वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. ठाकरे गुट ने निर्वाचन आयोग में पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि अगर दूसरा गुट दावा करे तो नजीते पर पहुंचने से पहले हमारा पक्ष भी सुना जाए.

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उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ठाकरे गुट ने लिखा निर्वाचन आयोग को खत
  • शिवसेना पर अपने दावे की लगाई गुहार

महाराष्ट्र में सरकार और विधायकों से पकड़ गंवाने के बाद उद्धव ठाकरे गुट पार्टी पर वर्चस्व को लेकर अदालत से आयोग तक दौड़ लगा रहा है. सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली, तो निर्वाचन आयोग में केविएट दाखिल कर पहले अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी. शिवसेना के निशान, विधान और प्रधान की कुर्सी पर अपना वर्चस्व बनाए और बचाए रखने के लिए उद्धव ठाकरे गुट ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है.

आयोग के सूत्रों के मुताबिक शिवसेना के ठाकरे गुट के नेता अनिल देसाई ने अपने पत्र में आयोग से आग्रह किया है कि शिवसेना की ओर से कोई दूसरा गुट चुनाव चिह्न, पार्टी का नाम, ध्वज या अन्य संबंधित चीज पर दावा करे तो आयोग किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले हमारा पक्ष भी सुने. देसाई ने लिखा कि शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे हैं और पार्टी का अधिकृत चुनाव चिह्न तीर कमान है. इस पर किसी और का दावा नहीं बनता, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने ही ये निशान शिवसेना को अधिकृत तौर पर दशकों पहले आवंटित किया था. इस चिह्न पर ही पार्टी सभी चुनाव में शामिल होती और जीतती रही है.

निर्वाचन आयोग के उच्च पदस्थ अधिकारी के मुताबिक यह एक तरह का आपत्ति पत्र है. मुमकिन है कि दूसरा पक्ष भी आयोग का रुख कर अपना दावा पेश करे. ऐसी स्थिति में आयोग दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर बुलाएगा. दोनों की दलीलें और पार्टी में विभाजन के प्रमाण पर विचार करेगा. उसके बाद तय करेगा कि किसका दावा कितना मजबूत है.

सबसे मजबूत दावेदार को पार्टी का नाम, निशान, प्रधान और विधान का इस्तेमाल करने का अधिकार आयोग सौंप देगा. लेकिन आयोग अगर दोनों पक्षों से संतुष्ट नहीं हुआ तो पार्टी का नाम, निशान और झंडा सीज कर दोनों गुट से इनके लिए विकल्प मांगेगा. 
 
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पिछले महीने के अंत में शिवसेना में बागी विधायकों का नेतृत्व किया था. इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी सरकार गिर गई थी. अल्पमत सरकार गिरने के बाद बहुमत का दावा कर शिंदे ने 30 जून को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. चार दिन बाद यानी चार जुलाई को विधानसभा में विश्वास मत जीता. अब सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबा खिंचने के आसार देखते हुए ठाकरे गुट ने पार्टी को लेकर अपनी पेशबंदी शुरू कर दी है.

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