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विडंबना: 5000 महिलाओं का प्रसव कराने वाली नर्स की खुद की डिलीवरी में मौत

ज्योति ऑपरेशन थियेटर में नॉर्मल डिलीवरी के साथ-साथ सिजेरियन डिलीवरी में भी महिलाओं की मदद करती थीं. उनके निधन से मरीजों सहित पूरा अस्पताल शोक में डूबा है.

प्रतीकात्मक फोटो (Getty) प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में 38 साल की नर्स ज्योति की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई. स्वास्थ्य अधिकारी ने मंगलवार को एजेंसी को बताया कि नर्स ने करीब 5000 महिलाओं की डिलीवरी में सहायता की थी और अपने बच्चे को जन्म देने के बाद कॉम्प्लिकेशन (जटिलताओं) के चलते उनकी मौत हो गई. 

हिंगोली सिविल अस्पताल के रेसिडेंट मेडिकल अफसर गोपाल कदम ने एजेंसी को बताया कि ज्योति गवली हिंगोली सिविल अस्पताल के लेबर रूम में तैनात थीं. उनकी विडंबना देख‍िए कि अपनी प्रेग्नेंसी के अंतिम दिन तक उन्होंने काम किया और फिर अपनी डिलीवरी के लिए चली गईं. वो डिलीवरी के बाद मातृत्व अवकाश लेने जा रही थीं. उन्होंने कहा कि गवली पिछले दो साल में सिविल अस्पताल में नर्स के रूप में काम रही थी. इससे पहले, करीब तीन साल वह दो अन्य हेल्थ सेंटर्स में काम कर चुकी थीं. 

अधिकारी ने कहा कि उन्हें डिलीवरी के लिए दो नवंबर को सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया. जटिलताओं की वजह से उन्हें उसी दिन नांदेड़ के अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया. उन्होंने कहा कि बाद में गवली को डबल निमोनिया (Bilateral Pneumonia) की शिकायत होने के बाद नांदेड़ में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया गया. उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया. 

अधिकारी ने कहा कि रविवार को उनकी मौत हो गई. हम आम तौर पर एक दिन में अपनी मेडिकल फेसिलिटी में 15 डिलीवरी करते हैं. गवली ने अपनी पांच साल की सर्विस में करीब 5,000 डिलीवरी में मदद की होगी.

बता दें कि नर्स का काम करने वाली ज्योति गवली डिलीवरी के लिए सबसे पसंदीदा नर्स थीं. लेकिन प्रसव में उनकी मौत से हड़कंप मच गया है. सिजेरियन सेक्शन से ज्योति ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है, लेकिन प्रसव के बाद उसकी हालत बिगड़ गई. ज्योति का खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था. उसे नांदेड़ के एक अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी मौके पर ही मौत हो गई. 

एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार एक तरफ जहां डॉक्टर खून बहने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहे थे. वहीं दूसरी तरफ ज्योति को भी सांस लेने में तकलीफ होने लगी. फिर उन्हें औरंगाबाद के एक अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया. हालांकि, वहां पहुंचने से पहले एक निजी अस्पताल में उनकी मौत हो गई. ज्योति हिंगोली से पहले गोरेगांव अस्पताल में काम करती थीं. ज्योति ऑपरेशन थियेटर में नॉर्मल डिलीवरी के साथ-साथ सिजेरियन डिलीवरी में भी महिलाओं की मदद करती थीं. उनके निधन से मरीजों सहित पूरा अस्पताल शोक में डूबा है.

 

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