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संजय गांधी नेशनल पार्क में नहीं होंगे गणपति विसर्जन, गेट पर आर्टिफिशियल तालाब बनाएगा वन विभाग

इस मामले में बॉम्बो हाईकोर्ट में जस्टिस पीबी वराले और जस्टिस एसएम मोदक की बेंच ने सुनवाई की. डबल बेंच ने निर्देश दिया- 'SGNP के क्षेत्र में मूर्तियों के विसर्जन को लेकर यदि कोई नियमों का उल्लंघन या जारी किए गए निर्देशों का पालन नहीं करता है तो राज्य सरकार का वन विभाग जरूरी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है.

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बॉम्बो हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई की है.
बॉम्बो हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई की है.

मुंबई के संजय गांधी नेशनल पार्क में (SGNP) में गणपति की मूर्तियों का विसर्जन नहीं हो पाएगा. इस संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के वन विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने वन विभाग को बाहर गेट पर आर्टिफिशयल तालाब बनाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की छूट दी है, जो राज्य द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन कर सकते हैं. 

इस मामले में जस्टिस पीबी वराले और जस्टिस एसएम मोदक की बेंच ने सुनवाई की. डबल बेंच ने निर्देश दिया- 'SGNP के क्षेत्र में मूर्तियों के विसर्जन को लेकर यदि कोई नियमों का उल्लंघन या जारी किए गए निर्देशों का पालन नहीं करता है तो राज्य सरकार का वन विभाग जरूरी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है. राज्य सरकार या वन विभाग द्वारा वन प्राधिकरण उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं. इसके अलवा, यदि वन विभाग अतिरिक्त पुलिसबल की सहायता या पुलिस बल की तैनाती के लिए अनुरोध करता है तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनुरोध पर विचार करें और स्वयं उचित निर्णय लें.'

'आर्टिकल पढ़ने से तो समझ में आएगा अनुमति है'

बता दें कि इस मामले में मुंबई के एक NGO ने मार्च में याचिका दायर की थी. NGO की तरफ से अधिवक्ता SS पटवर्धन, SR नारगोलकर, सुद्युम्न नारगोलकर, अर्जुन कदम और केतन जोशी ने पैरवी की. याचिका में एक न्यूज आर्टिकल की तरफ ध्यान आकर्षित कराया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मूर्तियों को SGNP में विसर्जित किया जा सकता है. उन्होंने दावा किया कि इस आर्टिकल को पढ़ने से आम आदमी को यह समझ में आएगा कि वन अधिकारियों ने SGNP के अंदर स्थित जल निकायों में मूर्तियों को विसर्जित करने की अनुमति दी है. 

SGNP में मूर्ति विसर्जन रोकने की याचिका दायर की गई थी

याचिका में लोगों को SGNP के भीतर स्थित जलाशयों में गणेश प्रतिमाओं को विसर्जित करने से रोकने के निर्देश देने की मांग की गई थी. वहीं, महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील पूर्णिमा कंथारिया ने कहा कि याचिका यह साबित करने में विफल रही कि अनुमति दी गई थी? हालांकि उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी और वन्यजीवों (Ecology and Wildlife) को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारी काफी सतर्क हैं.

कोर्ट ने कहा- बयान दीजिए कि अनुमति नहीं दी

इस पर जस्टिस वराले ने कहा- 'अगर आप कह रहे हैं कि अनुमति नहीं दी है और किसी ने खुद ही ऐसा कहा है तो आप बयान देते हैं कि अनुमति नहीं है. न्यूज आर्टिकल से पता चलता है कि अनुमति दी गई है. एक आम आदमी को क्या जानना चाहिए? यह एक सीधा संकेत है कि अनुमति मांगी गई थी और इसे नेशनल पार्क में मूर्ति विसर्जन की अनुमति दे दी गई है.'

न्यूज आर्टिकल को अनुमति नहीं माना जाए

कोर्ट ने कंथारिया को स्पष्ट रूप से बयान देने के लिए कहा कि विसर्जन के लिए ना तो लिखित अनुमति दी गई और ना ही मौखिक आश्वासन दिया गया. हालांकि, कंथारिया ने ऐसा बयान देने में असमर्थता जताई. ऐसे में कोर्ट ने कहा कि वह एक आदेश जारी करेंगे कि न्यूज आर्टिकल को अनुमति के रूप में नहीं माना जाए.

नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार पर कृत्रिम तालाब बनाया जाए

कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश जारी किया और कहा कि नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार के पास एक कृत्रिम तालाब स्थापित किया जाए और महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएं. इसके लिए वन विभाग को जिम्मेदारी दी जाए. कोर्ट ने न्यूज आर्टिकल की आशंका पर दायर याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं पाया.

शरारत करने वालों पर कार्रवाई कर सकते हैं

हालांकि, बेंच ने कहा- 'यदि कुछ गलत बयान देकर जनता को गुमराह करने का कोई प्रयास किया जाता है तो राज्य सरकार कानून के प्रावधानों के तहत इस तरह की शरारत को रोकने के लिए उचित कदम उठा सकती है. कोर्ट ने राज्य को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की अनुमति दी है.  

 

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