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मुंबई: मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने बिल्डर विजय मचिंदर की 7 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

घर खरीदारों और निवेशकों से करोडो़ं रुपयों से ज्यादा की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए बिल्डर विजय मचिंदर से जुड़ी सात करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने कुर्क कर दिया है. FIR में दावा किया गया था कि विजय ने ओशिवारा प्रोजेक्ट में फ्लैट बुकिंग करने के लिए 2012 और 2019 के बीच कलेक्ट किए गए रूपयों का दुरुपयोग किया.

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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने बिल्डर विजय मचिंदर की 7 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क (फाइल फोटो)
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने बिल्डर विजय मचिंदर की 7 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिल्डर और ऑर्नेट स्पेसेज प्राइवेट लिमिटेड (Ornate Spaces Private Limited) के निदेशक विजय मचिंदर (Vijay Machinder) की 7.04 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है. ये सभी संपत्तियां अचल रूप में हैं, जिनमें मुंबई के कई फ्लैट्स भी शामिल हैं. विजय मचिंदर को ईडी ने 3 जनवरी को ओशिवारा इलाके में उनकी कंपनी द्वारा शुरू किए गए एक प्रोजेक्ट में कई खरीदारों और निवेशकों से 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. मौजूदा वक्त में वह न्यायिक हिरासत में है.

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ईडी ने विजय मछिंदर के खिलाफ ओशिवारा पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें दावा किया गया था कि विजय ने ओशिवारा प्रोजेक्ट में फ्लैट बुकिंग करने के लिए 2012 और 2019 के बीच कलेक्ट किए गए रूपयों का दुरुपयोग किया था. एफआईआर में कहा गया है कि उसने गलत तरीके से खरीदारों के साथ 74 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी.

ईडी को जांच में क्या मिला?
जांच में सामने आया है कि ऑर्नेट स्पेसेज ने एक प्लॉट के डेवलपमेंट के लिए साल 2010 में समझौता किया था, जो मूल रूप से महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपिंग अथॉरिटी द्वारा यूनाइटेड ट्रस्ट ऑफ इंडिया के कर्मचारियों को आवंटित किया गया था.

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विजय मचिंदर ने 2012 से ओशिवारा प्रोजेक्ट के बिक्री योग्य क्षेत्र के खिलाफ वित्तीय संस्थानों से एडवांस फ्लैट बुकिंग के साथ-साथ लोन लेना शुरू कर दिया. उन्होंने प्रोजेक्ट के लिए एडवांस बुकिंग के हिस्से के रूप में कई फ्लैट खरीदारों से लगभग 93 करोड़ रुपये इकट्ठा किए. उन्होंने करीब 710 करोड़ रुपये का लोन भी लिया था, जिसमें से 470 करोड़ रुपये की मूल रकम चुकानी बाकी है.

हालांकि, ईडी को पता चला है कि खुदाई कार्य को छोड़कर ओशिवारा प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है.

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