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मुंबई पुलिस में कैसे और क्यों हुई सचिन वाजे की वापसी? कमिश्नर ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट

सचिन वाजे की मुंबई पुलिस में वापसी पर कई तरह के सवाल खड़े हुए थे. अब मुंबई पुलिस के नए कमिश्नर हेमंत नगराले ने सचिन वाजे की वापसी को लेकर राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सबमिट की है, जिसमें बताया है कि क्यों सचिन वाजे की वापसी हुई थी. 

सचिन वाजे की नियुक्ति पर खड़े हुए थे सवाल (फाइल फोटो) सचिन वाजे की नियुक्ति पर खड़े हुए थे सवाल (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सचिन वाजे की वापसी पर कमिश्नर की रिपोर्ट
  • राज्य सरकार को दी गई है रिपोर्ट

एंटीलिया केस मामले में महाराष्ट्र पुलिस के सचिन वाज़े की भूमिका ने राज्य सरकार की काफी किरकिरी करवाई. सचिन वाजे की मुंबई पुलिस में वापसी पर कई तरह के सवाल खड़े हुए थे. अब मुंबई पुलिस के नए कमिश्नर हेमंत नगराले ने सचिन वाजे की वापसी को लेकर राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सबमिट की है, जिसमें बताया है कि क्यों सचिन वाजे की वापसी हुई थी. 

हेमंत नगराले ने जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें इन बिंदुओं पर बात की गई है. 

1.    सचिन वाजे की वापसी कैसे हुई, वापसी किसने करवाई?
सूत्रों की मानें तो हेमंत नगराले की रिपोर्ट के मुताबिक, सचिन वाजे की नियुक्ति का फैसला कमिश्नर लेवल पर एक बैठक के बाद किया गया था. इस मीटिंग में कमिश्नर, ज्वांइट कमिश्नर, डीसीपी और मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल थे.

2.    वापसी के बाद सचिन वाजे की नियुक्ति कहां हुई?
रिपोर्ट में बताया गया है कि सचिन वाजे को वापसी के बाद आर्म्ड पुलिस फोर्स में भेजा गया था. जो कि नॉन एक्जक्यूटिव ब्रांच है. 

3.    सचिन वाजे को CIU में क्यों नियुक्त किया गया?
सचिन वाजे को मुंबई की मीटिंग में नियुक्त करने का फैसला लिया गया था. ज्वाइंट कमिश्नर क्राइम के 9 जून 2020 के आदेश पर सचिन वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) में नियुक्त किया गया था. 

आपको बता दें कि सचिन वाजे पर अभी एंटीलिया मामले और मनसुख हिरेन हत्या मामले में तलवार लटकी हुई है. सचिन वाजे अभी एनआईए की कस्टडी में हैं. सचिन वाजे को बीते दिन ही एनआईए की टीम मुंबई के रेलवे स्टेशन ले गई थी, जहां पर सीन को रिक्रिएट किया गया था. सचिन वाजे पर UAPA के तहत धाराएं लगाई गई हैं, जिसके बाद उन्हें सात अप्रैल तक NIA की कस्टडी में भेज दिया गया है.

गौरतलब है कि सचिन वाजे की वापसी पर बीजेपी की ओर से बड़े आरोप लगाए गए थे. बीजेपी ने राज्य सरकार को घेरा था, तो वहीं सरकार ने इस फैसले के पीछे तत्कालीन कमिश्नर परमबीर सिंह के निर्णय को बताया था. बता दें कि इसी विवाद के बाद परमबीर सिंह को कमिश्नर पद से हटा दिया गया था. 

 

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