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मुंबई: रेलवे स्टेशन पहुंचा कोई वांटेड अपराधी तो फौरन होगा गिरफ्तार

महाराष्ट्र के कई रेलवे स्टेशनों पर चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक इंस्टॉल की जाएगी. इससे वांटेड अपराधियों का भी पता लगाया जा सकेगा.

घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर चेहरा पहचान करने वाली तकनीक इंस्टॉल होगी (फाइल फोटो) घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर चेहरा पहचान करने वाली तकनीक इंस्टॉल होगी (फाइल फोटो)

  • कई रेलवे स्टेशनों पर इंस्टॉल होगी चेहरे की पहचान वाली तकनीक
  • गुमशुदा लोगों को ढूंढने और भीड़ के नियंत्रण में भी मिलेगी मदद

मुंबई के घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर जल्दी ही चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक इंस्टॉल होगी. इस तकनीक से भीड़ वाली जगहों का बेहतर प्रबंधन करने और गुमशुदा लोगों की तलाश करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही वांछित अपराधियों का भी पता लगाया जा सकेगा. पायलट आधार पर इस तकनीक को मुंबई के घाटकोपर रेलवे स्टेशन के अलावा नासिक और मनमाड स्टेशनों पर भी इस्तेमाल किया जाएगा.

तकनीक साधारण, पर उपयोगी

सेंट्रल रेलवे के पीआरओ शिवाजी सुतार ने इंडिया टुडे को बताया, 'अभी यह सिस्टम सर्वे और प्रयोग के स्तर पर है. ये तकनीक बहुत साधारण है लेकिन बहुत उपयोगी है. चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, पुलों और एंट्री-एग्जिट पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों से जोड़ दी जाएगी. कंट्रोल रूम में हम अपने सिस्टम में वांछित अपराधियों के रिकॉर्ड से जुड़ा डेटा फीड कर देंगे. अगर ऐसा कोई भी वांछित इन सीसीटीवी कैमरों के पास से गुजरेगा तो वहां से एक अलर्ट मेन कंट्रोल रूम को जाएगा. जहां दिन के 24 घंटे मॉनीटरिंग की जाएगी.'  

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सुतार ने कहा, 'इस तकनीक का दूसार मकसद भीड़ का प्रबंधन है. किसी एक स्थान पर भीड़ रूकी हुई दिखाई देगी तो तत्काल अलर्ट कंट्रोल रूम में आएगा. ऐसी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल भेजा जाएगा. अगर सब सही रहा तो इस तकनीक को अन्य जगहों पर भी इंस्टॉल किया जाएगा.'

थर्मल स्क्रीनिंग की स्थिति बचना मुश्किल

इस विषय पर इंडिया टुडे ने टेक एक्सपर्ट अंकुर पुराणिक से भी बात की. पुराणिक ने कहा, 'इस तकनीक का इस्तेमाल अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और चीन में पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है. ये बहुत कारगर है और पलक झपकने की देर में ही नतीजा देती है. ये हमारे ऑफिस के अटैंडेस सिस्टम की तरह काम करती है. जैसे कर्मचारियों का डेटा स्टोर कर रखा जाता है और उसके कैमरे के सामने आते ही अटैंडेस मार्क हो जाती है. चेहरे के 80 से ज्यादा फीचर्स को इसके जरिए पकड़ा जाता है. चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक थर्मल स्क्रीनिंग के साथ अधिक उपयोगी रहती है. कई बार अपराधी अपना हुलिया, चेहरे का स्टाइल बदल लेते हैं या कपड़े से ढंक लेते हैं. लेकिन थर्मल स्क्रीनिंग की स्थिति में वो बच कर नहीं निकल सकता.'

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पुराणिक ने कहा, 'ये तकनीक बहुत उपयोगी होगी और मुंबई के हर एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स, अहम रेलवे स्टेशनों पर इंस्टॉल की जा सकती है. इससे कोई अपराधी शहर छोड़ कर भागने में कामयाब नहीं हो पाएगा, इससे गुमशुदा लोगों को ढूंढने में भी मदद मिलेगी. इस तकनीक को तत्काल पूरे शहर में लागू किया जाना चाहिए.' 

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