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Money Laundering: 16 करोड़ वसूले, दाऊद की बहन को 55 लाख कैश दिए! नवाब मलिक के खिलाफ ED की चार्जशीट में खुलासा

Money Laundering: मुंबई के गोवावाला कंपाउंड से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक के गले की फांस बनता नजर आ रहा है. ED ने मलिक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं.

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नवाब मलिक (File Photo) नवाब मलिक (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ईडी ने मलिक के खिलाफ दाखिल किया आरोप पत्र
  • मुंबई के गोवावाला कंपाउंड से जुड़ा है मामला

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपने आरोप पत्र में मलिक के खिलाफ कई सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं. 

ED के आरोप पत्र के मुताबिक नवाब मलिक 16 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोपी हैं. ED के मुताबिक मुंबई के गोवावाला कंपाउंड के किराएदारों से 14 साल में किराए के तौर पर 11 करोड़ रुपए लिए गए. इसमें से मलिक ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पार्कर को 55 लाख रुपए कैश दिए.

ED ने आरोप लगाया है कि नवाब मलिक के खिलाफ जो मामला दर्ज किया गया है, वह 15.99 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है. इसमें 2007-08 से कुर्ला में गोवावाला कंपाउंड के किरायेदारों से किराए के रूप में एकत्र किए गए 11.7 करोड़ रुपए भी शामिल हैं. इसे ED प्रोसेस ऑफ क्राइम मान रही है.

मलिक और 3 अन्य के खिलाफ दायर आरोपपत्र में ED ने कहा कि 2003 में मलिक ने सॉलिडस इन्वेस्टमेंट्स कंपनी को गुमराह कर हासिल कर लिया था. ये कंपनी गोआ वाला कंपाउंड के ही एक किराएदार की थी. मलिक ने कंपनी को बताया कि वह गोवावाला कंपाउंड में गरीब झुग्गी निवासियों के लिए आवास प्रदान करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

ED ने अपने आरोप पत्र में सॉलिडस के एक पूर्व कर्मचारी के बयान को शामिल किया है. वह 2002-2003 में मलिक से मिले थे, जब वो मंत्री थे. नवाब मलिक से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर कर्मचारी ने कहा कि करीब 30 मिनट की बैठक में मलिक ने कुर्ला के झोपड़पट्टी में रहने वाले गरीबों की प्रस्तावित सार्वजनिक सेवा के बारे में बताया था.

चार्जशीट में कहा गया है कि मलिक ने झोपड़ियों में रहने वाले 360 परिवारों को स्थानांतरित करने के लिए गोवावाला परिसर  का पूर्ण स्वामित्व लेने का प्रस्ताव रखा. मलिक ने तब कंपनी को बताया था कि ये 360 परिवार कुर्ला में दो बड़े सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के रास्ते में आ रहें है.

ED ने कहा कि मलिक ने सॉलिडस के मालिक से यह कहते हुए मदद मांगी कि यह राष्ट्रीय हित में है. जब तक कि दोनों इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं पूरी नहीं हो जाती, वह सरकार को कंपाउंड में बने गोदामों को एक रुपए प्रति वर्ष के हिसाब से पट्टे पर देने की योजना बना रहे हैं. इसके बाद शेष भूमि पर एक एसआरए परियोजना आएगी.

आरोपपत्र में कहा गया है कि झोपड़ियों को फिर से बसाने के बाद, मलिक अपने पारिवारिक व्यवसाय के लिए परिसर का उपयोग करने की योजना बना रहे थे. कर्मचारी ने अपने बयान में कहा है कि 2003 में, सॉलिडस को मलिक के परिवार के सदस्यों ने 10 लाख रुपए में लिया. कंपनी के मालिक नवाब मलिक के प्रस्तावित अच्छे विचारों से प्रभावित थे, इसीलिए उन्होंने ये कंपनी नवाब मलिक को बेच दी.

ED ने आगे दावा किया है कि सॉलिडस ने 2010-2011 तक परिसर में रहने वाले किरायेदारों से किराया एकत्र किया गया. उसके बाद मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर का गठन किया गया. इसने परिसर के किराए, मरम्मत और रखरखाव के 1 संग्रह के लिए सॉलिडस के साथ एक पट्टे का समझौता किया और इन फर्मों द्वारा किरायेदारों से 11.7 करोड़ रुपए का किराया लिया गया. ED ने आरोप लगाया कि दोनों कंपनियों के बीच लीज एग्रीमेंट के जरिए अपराध से होने वाली आय को एक स्तर पर रखा गया था. नवाब मलिक, उनके दो बेटों और पत्नी  को इन कंपनियों में निदेशक नामित किया गया था.

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