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महाराष्ट्र: फाइनल हो गया शिंदे कैबिनेट का स्ट्रक्चर, 65-35 के फॉर्मूले पर बनाए जा सकते हैं मंत्री

शिवसेना से बगावत के बाद महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बने, लेकिन बीजेपी के सहयोग से बनी इस सरकार में मंत्रालयों का बंटवारा होना अभी बाकी है. राज्य में कुल 42 मंत्री बन सकते हैं और अभी 40 पद खाली हैं. तो देखना होगा कि शिवसेना से टूटकर आए शिंदे गुट के कितने विधायकों को मंत्री पद मिलेगा और बीजेपी के खाते से कितने मंत्री बनेंगे?

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एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फडणवीस (फाइल फोटो)
एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फडणवीस (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र में बन सकते हैं कुल 42 मंत्री
  • लागू हो सकता है 65-35 का फॉर्मूला

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार शपथ ले चुकी है, लेकिन अभी तक मंत्रालयों का बंटवारा नहीं हुआ. शिवसेना से बगावत कर आए शिंदे ने बीजेपी के सहयोग से नई सरकार बना ली है और पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया है. ऐसे में देखना है कि खाली पड़े 40 मंत्री पदों में से किसके हाथ कितने मंत्रालय आते हैं.

महाराष्ट्र में बन सकते हैं 42 मंत्री

महाराष्ट्र सरकार में कुल 42 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसमें मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री का पद शामिल है. अब एकनाथ शिंदे जहां मुख्यमंत्री बन चुके हैं, तो वहीं उप-मुख्यमंत्री पद पर देवेन्द्र फडणवीस हैं. यानी महाराष्ट्र सरकार में अभी 40 मंत्री पद खाली हैं. 

शिंदे के साथ आए थे 9 मंत्री

शिवसेना से बगावत कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए विधायकों में 9 ऐसे हैं, जो उद्धव ठाकरे की महा विकास अघाड़ी सरकार में मंत्री थे. इनमें 5 कैबिनेट मंत्री और 4 राज्यमंत्री थे. उम्मीद की जा रही है नए मंत्रिमंडल में इन सभी को फिर से जगह मिल सकती है. इस तरह एकनाथ शिंदे के गुट से नई सरकार में 15 से 16 मंत्री शामिल हो सकते हैं. 

लागू होगा 65-35 का फॉर्मूला?

एकनाथ शिंदे की सरकार में बीजेपी के खाते में ज्यादा मंत्री पद आ सकते हैं. बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पार्टी और शिंदे गुट के बीच 65 और 35 प्रतिशत के हिसाब से मंत्री पदों का बंटवारा हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी के खाते 24 से 25 मंत्री आएंगे, जबकि शिंदे गुट के 15 से 16 मंत्री नई सरकार की मंत्री परिषद का हिस्सा हो सकते हैं. इसके अलावा कई छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों ने भी नई सरकार को समर्थन दिया है. ऐसे में उन्हें भी नई मंत्री परिषद में जगह मिल सकती है.

इससे एक बात तो साफ है, कि भले जेपी के पास चाहे मुख्यमंत्री पद हो या ना हो, लेकिन स्पीकर, उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों के साथ ही उसके पास सरकार में ज्यादा मंत्री होंगे और उन्हें महत्वपूर्ण विभाग भी दिए जाएंगे.

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