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ठाकरे या शिंदे... किसकी होगी शिवसेना? 16 बागी विधायकों की किस्मत, कोर्ट में होगी सुप्रीम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में आज महाराष्ट्र की राजनीति पर बड़ा फैसला आना है. बागी विधायकों की अयोग्यता पर कोर्ट क्या रुख रखता है, ये शिंदे सरकार की किस्मत भी तय करने वाला है.

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सीएम एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे
सीएम एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तय होगा भविष्य का रुख
  • उद्धव के लिए आगे की राह तय करने वाली है सुनवाई

महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम का आज सुप्रीम कोर्ट में क्लाइमेक्स तय होने वाला है. उद्धव ठाकरे और उनके समर्थन वाले गुट की तरफ से कुल दो याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं. पहली याचिका तो पुरानी वाली है जहां पर 16 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला होना है, दूसरी याचिका वो है जो शुक्रवार को दायर की गई थी. उस याचिका में राज्यपाल के 30 जून वाले फैसले को चुनौती दी गई है जहां पर सरकार बनाने के लिए एकनाथ शिंदे को बुलाया गया था. अब इन दोनों ही अहम मुद्दों पर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना है.

सबसे बड़ा मुद्दा तो 16 बागी विधायकों की अयोग्यता को लेकर चल रहा है. जब से एकनाथ शिंदे ने अपने समर्थक विधायकों के साथ मिलकर उद्धव सरकार को गिराया था, उन पर अयोग्यता की तलवार लटक रही है. पहली सुनवाई के दौरान तो बागी विधायकों को 11 जुलाई तक का अतिरिक्त समय मिल गया था, उन पर कोई एक्शन भी नहीं लिया गया, लेकिन अब आज कोई फैसला संभव है. ये एक फैसला ही महाराष्ट्र की राजनीति में कई चीजें तय कर जाएगा. अभी तक महाराष्ट्र की नई सरकार ने मंत्रालय नहीं बांटे हैं, कोई मंत्रिमंडल विस्तार नहीं किया गया है.

ऐसी खबर है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई स्पष्ट निर्णय नहीं आ जाता, शिंदे सरकार इस पर कोई फैसला नहीं ले पाएगी. ऐसे में इस वजह से भी सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आज की सुनवाई मायने रखती है. अगर फैसला एकनाथ शिंदे के पक्ष में आ जाता है तो नई सरकार के लिए ये बड़ी राहत रहेगी. मंत्रिमंडल विस्तार भी हो जाएगा और अयोग्यता की जो तलवार लटक रही है, उससे भी मुक्ति मिल जाएगी.

इस सब के अलावा उद्धव ठाकरे के लिए भी आज की सुनवाई आगे की राह तय करने वाली है. असल में शुक्रवार को दायर हुई याचिका में सिर्फ राज्यपाल के फैसले को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया गया है कि राज्यपाल के पास ये ताकत नहीं है कि वे बता पाएं कि कौन सा गुट असल शिवसेना है. ये चुनाव आयोग का कार्यक्षेत्र है और उन्होंने उद्धव ठाकरे को ही शिवसेना का अध्यक्ष माना है. ऐसे में कल जब सुनवाई होगी, तब इस पहलू पर भी जमकर बहस होती दिख सकती है और इस पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहता है, ये शिवसेना और उद्धव ठाकरे के भविष्य के लिए काफी मायने रखने वाला है.

यहां ये जानना भी जरूरी हो जाता है कि उद्धव ठाकरे और शिंदे गुट के बीच कानूनी लड़ाई एकनाथ शिंदे और भरत गोगावले व 14 अन्य शिवसेना नेताओं की याचिका से शुरू हुई थी, जिसमें डिप्टी स्पीकर द्वारा जारी अयोग्यता नोटिस को चुनौती दी गई थी. उसी याचिका पर 27 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी और तब फैसले में बागी विधायकों को अयोग्यता नोटिस पर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था. अब आज उस अयोग्यता नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख रखता है, उससे ही महाराष्ट्र की आगे की राजनीति तय होने वाली है.

वैसे इस पूरे विवाद पर एनसीपी नेता अजित पवार मानकर चल रहे हैं कि कोर्ट से उद्धव खेमे को राहत मिलेगी और 16 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. इस बारे में वे कहते हैं कि मैंने जितने भी वकीलों से बात की है, कानून के मुताबिक तो ये फैसला उन बागी विधायकों के खिलाफ ही रहना चाहिए. हम सब जानते हैं कि पिछले दिनों क्या हुआ है. नियम क्या कहते हैं, कानून क्या है? एक्सपर्ट और तमाम वकील इन्हीं पहलुओं पर बहस करने वाले हैं. अजित पवार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि उनके लिए उद्धव ठाकरे का खेमा ही असल शिवसेना है.

 

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