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Maharashtra: 'कांग्रेस को कमजोर करने में जुटी NCP...', क्या महाराष्ट्र में फिर बड़ा उलटफेर होने जा रहा है?

Maharashtra Congress के नेता महाविकास अघाड़ी गठबंधन (Mahavikas Aghadi ) में खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं, ये बात खुलकर सामने आ गई है. नाना पटोले ने आरोप लगाया है कि नगर निगमों में कांग्रेस प्रतिनिधियों को पर्याप्त फंड तक नहीं दिया जाता है.

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महाराष्ट्र कांग्रेस चीफ ने सोनिया गांधी से NCP की शिकायत की है (फाइल फोटो) महाराष्ट्र कांग्रेस चीफ ने सोनिया गांधी से NCP की शिकायत की है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र कांग्रेस चीफ का आरोप
  • NCP, कांग्रेस को कमजोर कर रही है

महाराष्ट्र(Maharashtra) की सत्ता में काबिज महाविकास अघाड़ी गठबंधन (Mahavikas Aghadi) में क्या भूचाल आने वाला है?  दरअसल महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले (Nana Patole) के एक बयान ने सबको चौंका दिया है. नाना पटोले ने कहा है कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बता दिया है कि किस तरह से शरद पवार की एनसीपी राज्य में कांग्रेस को कमजोर करने में जुटी है. उनके इस बयान के बाद से ऐसा लग रहा है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक नागपुर एयरपोर्ट पर एक पत्रकार के सवाल पर नाना पोटोले ने कहा है कि ऐसा लग रहा है कि एनसीपी बीते ढाई सालों से महाराष्ट्र में कांग्रेस को कमजोर करने में जुटी है. नाना पटोले ने दावा किया है कि जिला परिषदों और अलग निकायों में कांग्रेस के प्रतिनिधियों को विकास के कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं दिया जा रहा है.

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भिवंडी-निजामपुर में कांग्रेस के 19 पार्षदों ने पार्टी को छोड़कर एनसीपी ज्वाइन किया है. इतना ही नहीं पटोले ने कहा कि इसी महीने गोदिया जिला परिषद का अध्यक्ष चुनने के दौरान एनसीपी ने गठबंधन की दुश्मन बीजेपी से हाथ मिला लिया.  पटोले ने कहा कि एनसीपी की ओर से की जा रही इन हरकतों को राजस्थान में हुए चिंतन शिविर के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बता दिया गया है.

गौरतलब है कि साल 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद एक नाटकीय घटनाक्रम में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने मिलकर महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन बनाया और सरकार बना ली. इस सरकार में सीएम शिवनेता नेता उद्धव ठाकरे को चुना गया था. महाराष्ट्र में हिंदुत्व की राजनीति करने वाली शिवसेना के साथ कांग्रेस और एनसीपी का गठबंधन अभूतपूर्व है. क्योंकि शिवसेना के नेता आज भी खुलकर हिंदुत्व की राजनीति के पक्ष में बयान देते हैं. वहीं कांग्रेस और एनसीपी खुद को सेक्युलर दिखाने की कोशिश करती हैं.

 

 
 

 

 

 

 

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