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महाराष्ट्र सीएम शिंदे का उद्धव ठाकरे पर तंज, पूछा- किसने किसको धोखा दिया? हमने या...

एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाते थे, लेकिन हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर नई सरकार बनाई और महाराष्ट्र के 20वें सीएम के रूप में शपथ ली. महाराष्ट्र में अभी तक नई कैबिनेट भी गठन नहीं हो सकी है, लेकिन इसी बीच शिंदे के नए बयान ने राज्य में सियासी हलचल मचा दी है.

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महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ( फाइल फोटो ) महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ( फाइल फोटो )
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे चार बार चुने गए विधायक
  • बीेजेपी के साथ मिलकर बनाई महाराष्ट्र में नई सरकार

महाराष्ट्र में शुरू हुई सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है. सत्ता पलट के बाद अब एकनाथ शिंदे ने सीएम की कुर्सी संभाल ली है तो दूसरी तरफ राज्य के पूर्व सीएम रह चुके देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी मिली है. दोनों ही नेताओं ने शपथ भी ले ली है. लेकिन पूरा महीना होने के बाद भी अब तक महराष्ट्र सरकार की कैबिनेट का गठन नहीं किया जा सका है. ऐसे में शिंदे ने एक नया बयान देकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है. 

दरअसल, पुणे में सीएम शिंदे ने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बगैर उनसे अलग होने के अपने निर्णय पर खुलकर बोला है. उन्होंने कहा है कि, हमारी सरकार आम जनता की सरकार है जिसे हमने फिर से तैयार किया है. यह शिवसेना की नई सरकार है.

शिंदे ने कहा कि बालासाहेब के साथ काम कर चुके वरिष्ठ नेताओं को भी 'वर्षा' से वापस जाना पड़ा. ऐसी पावर होने का क्या फायदा है? हमें अलग होने का फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि, आगामी विधानसभा चुनाव में शिवसेना के चुनिंदा ही विधायक रह जाते. साथ ही उन्होंने कहा कि शिवसेना को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे थे लोगों को जेल में डाला जा रहा था और खुद को बचाने के लिए उनसे अपनी पार्टियों में शामिल की होने की बात कही जा रही थी.

महाराष्ट्र सीएम ने कहा कि मैं और उदय सामंत भी मंत्री थी फिर भी हमने सरकार से अलग होने का फैसला किया. मुझे किसी भी चुनाव चिन्ह की जरुरत नहीं है. मैं किसी भी पार्टी और चुनाव चिंह पर चुनकर आ सकता हूं इतना काम मैंने ठाणे में किया है.

कुछ ऐसा है शिंदे का राजनीतिक सफर

महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे के राजनीतिक सफर की बात करें तो शिंदे 1980 के दशक में शिवसेना में शामिल हुए और 1997 में पहली बार ठाणे नगर निगम के लिए पार्षद चुने गए थे. वे 2001 में ठाणे नगर निगम में सदन के नेता के पद पर निर्वाचित हुए. साल 2002 में, दूसरी बार ठाणे नगर निगम के लिए चुने गए. 2004 में वह पहली बार महाराष्ट्र विधान सभा के लिए चुने गए. साल 2005 में शिवसेना के ठाणे जिला प्रमुख के रूप में नियुक्त किए गए. शिंदे 2009 में महाराष्ट्र विधान सभा के लिए दूसरी बार निर्वाचित हुए और 2014 में उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाई थी.

शिंदे अक्टूबर 2014 से दिसंबर 2014 तक महाराष्ट्र विधान सभा में विपक्ष के नेता रहे थे. साल  2014 से 2019 तक, महाराष्ट्र राज्य सरकार में पीडब्ल्यूडी विभाग के कैबिनेट मंत्री बने. 2018 में उन्हें शिवसेना पार्टी के नेता के रूप में नियुक्त किया गया. एकनाथ शिंदे 2019 में लगातार चौथी बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए और शिंदे को सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया था.
 

 

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