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महाराष्ट्र: एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में की नई नियुक्तियों की घोषणा, विश्वासपात्रों को इनाम

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में नई नियुक्तियां की है. शिवसेना से बगावत के दौरान शिंदे का पक्ष रखने वाले दीपक केसरकर को शिंदे ने पार्टी का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है. इसके अलावा कई विश्वासपात्रों को नियुक्तियों के रूप में तोहफा दिया गया है.

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एकनाथ शिंदे ने की शिवसेना में नई नियुक्तियों की घोषणा
  • किरण पावस्कर, संजय मोरे शिवसेना के सचिव बने
  • दीपक केसरकर मुख्य प्रवक्ता नियुक्त

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में नई नियुक्तियों की घोषणा की है. उन्होंने पार्टी प्रवक्ता और कोषाध्यक्ष पद पर अपने विश्वासपात्रों को नियुक्त किया है. इसी के साथ शिंदे कैंप की ओर से शिवसेना पर दावा ठोकने की मुहिम तेज होती नजर आ रही है. 

एनसीपी से विधानपरिषद के सदस्य रहे किरण पावस्कर को एकनाथ शिंदे ने शिवसेना का सचिव नियुक्त किया गया है. साथ ही ठाणे के पूर्व मेयर संजय मोरे को शिंदे ने सचिव नियुक्त किया है. बता दें कि उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना सचिव सांसद अनिल देसाई, मिलिंद नार्वेकर, सूरज चव्हाण और आदेश बांदेकर हैं. एकनाथ शिंदे ने नेता और उपनेता पद की नियुक्ति के बाद अब सचिव पद पर नियुक्ति कर उद्धव ठाकरे को फिर एक बार चुनौती दी हैं.

एकनाथ शिंदे ने विधायक दीपक केसरकर को शिवसेना का मुख्य प्रवक्ता नियुक्ति किया है. इसके अलावा शिवसेना का उपनेता गुलाबराव पाटिल को चुना गया है. उदय सामंत समेत किरण पावस्कर और दहिसर की पूर्व पार्षद शीतल म्हात्रे को प्रवक्ता चुना गया है. अंबरनाथ के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर को पार्टी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. बुधवार को एकनाथ शिंदे ने किरण पावस्कर और संजय मोरे को नियुक्ति पत्र सौंपा है.  

दरसअल 8 अगस्त को शिंदे गुट और उद्धव गुट को चुनाव आयोग के सामने पार्टी का दस्तावेज लेकर हाजिर होना है. इस बीच शिवसेना के उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने के मांग की है. इधर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दूसरी याचिकाओं के साथ 1 अगस्त को करने का फैसला दिया है. 

उद्धव गुट की याचिका में कहा गया है कि अभी शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता का मामला लंबित है. ऐसे में आयोग ये तय नही कर सकता कि असली शिवसेना कौन है? अब सभी की निगाहें कोर्ट और चुनाव आयोग पर टिकी है, जहां से ये फैसला आने वाला है कि शिवसेना पर आखिरकार किसकी दावेदारी होगी?  

 

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