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Maharashtra: क्या महा विकास अघाड़ी में दरार पड़ गई? राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने द्रौपदी मुर्मू का किया समर्थन तो भड़की कांग्रेस

राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का ऐलान किया है. महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए की उम्मीदवार का समर्थन करने के शिवसेना के रुख पर सवाल उठाए हैं.

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Maharashtra Politics (PTI)
Maharashtra Politics (PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवसेना ने NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का ऐलान किया है
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट ने खड़े किए सवाल

महाराष्ट्र में 'तख्तापलट' हो चुका है. महा विकास अघाड़ी की सरकार सत्ता गंवा चुकी है और सूबे के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हैं. हालांकि राज्य में लगातार चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच अब यहां सत्ता से दूर हो चुकी महा विकास अघाड़ी में दरार के आसार दिख रहे हैं. इस बगावत की वजह है- राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना का NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन. 

राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का ऐलान किया है. इस घोषणा के बाद शिवसेना को अपने सहयोगी कांग्रेस के तंज झेलने पड़ रहे हैं. महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने के शिवसेना के रुख पर चिंता व्यक्त की है. बालासाहेब थोराट ने ट्वीट करके शिवसेना के वैचारिक दलबदल पर सवाल उठाया है, जो अभी भी MVA का हिस्सा है. 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव एक वैचारिक लड़ाई है. ये लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चल रहा संघर्ष है. ये महिला बनाम पुरुष या आदिवासी बनाम गैर-आदिवासियों का सवाल नहीं है. वो सभी जो संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में हैं, यशवंत सिन्हा का समर्थन कर रहे हैं. शिवसेना ने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन क्यों किया? उन्होंने इसके कुछ कारण बताए, लेकिन इसके पीछे शिवसेना नेतृत्व की वास्तविक भूमिका के बारे में कुछ नहीं कहा. 

उन्होंने कहा कि शिवसेना एक अलग राजनीतिक पार्टी है, इसलिए वो अपने फैसले स्वतंत्र रूप से ले सकती है. हालांकि, जब गैर-लोकतांत्रिक रास्ता अपनाकर राज्य सरकार को उखाड़ फेंका गया और शिवसेना के अस्तित्व को चुनौती दी गई, उसके बाद ऐसा फैसला, समझ से बाहर है. शिवसेना महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने यह फैसला लेते समय हमसे कोई चर्चा नहीं की. 

 

इधर, महा विकास अघाड़ी के सहयोगी दल एनसीपी ने कहा है कि शिवसेना ने एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करने का फैसला किया है, वो चाहते हैं कि राज्य में उनका गठबंधन बरकरार रहे. एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि हर राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना ने अपनी पसंद बनाई है. ये एनडीए का समर्थन नहीं है. कई निर्णय व्यक्तिगत पार्टी स्तर पर लिए जाते हैं, जहां गठबंधन सहयोगियों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. वहीं, एनसीपी ने ये भी कहा है कि शिवसेना ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा करने से पहले चर्चा नहीं की थी.

क्या द्रौपदी मुर्मू के समर्थन की ये वजह है?  

बता दें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि उनकी पार्टी NDA की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी. शिवसेना बिना किसी दबाव के मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा कर रही है. उनके इस फैसले के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

कहा जा रहा है कि विधायकों के बाद अब शिवसेना सांसदों के भी उद्धव ठाकरे को छोड़कर जाने का खतरा बना हुआ है. इसलिए ऐसा कदम उठाया है. बीते सोमवार को उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक बुलाई थी. इसमें राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा हुई. शिवसेना के पास 18 सांसद हैं, लेकिन बैठक में 10 ही पहुंचे थे. चर्चा ये भी है कि उद्धव ठाकरे ने पार्टी की लड़ाई को ध्यान में रखते हुए गठबंधन के साथी एनसीपी और कांग्रेस के खिलाफ जाकर मजबूरी में फैसला लिया है.

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