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महाराष्ट्र की जनता से बोले उद्धव- कोरोना की लहर नहीं सुनामी है, जरूरत होने पर ही बाहर निकलें

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि वैक्सीन अभी हमारे हाथ में नहीं है. महाराष्ट्र में 12 करोड़ लोग हैं, इसकी दो डोज चाहिए यानी 24 करोड़ डोज. इसे लोगों तक पहुंचाने में कितना वक्त लगेगा, ये स्पष्ट नहीं है. फिलहाल इसका समाधान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सीएम उद्धव ने राज्य को संबोधित किया
  • कहा- सोशल डिस्टेंसिंग-मास्क बहुत जरूरी
  • लोगों का मास्क ना लगाना चिंताजनकः CM

दिल्ली के बाद कोरोना का भयावह रूप महाराष्ट्र में देखा जा रहा है. रविवार को कोरोना के मद्देनजर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य की जनता को संबोधित किया. सीएम ने कहा कि दुनियाभर में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं. ये कोरोना की लहर नहीं सुनामी है. यह एक गंभीर चिंता का विषय है.

सीएम ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, लेकिन जो लोग 8 महीने से इस काम में लगे हैं, उन पर भी दबाव कम करना चाहिए. वैक्सीन अभी हमारे हाथ में नहीं है. महाराष्ट्र में 12 करोड़ लोग हैं. इसकी दो डोज चाहिए यानी 24 करोड़ डोज. इसे लोगों तक पहुंचाने में कितना वक्त लगेगा, ये स्पष्ट नहीं है. फिलहाल इसका समाधान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना है. सीएम ने कहा कि अभी बहुत से लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं, जो चिंता का विषय है

कोरोना के संकट काल में राजनीति नहीं होनी चाहिए. जो ये कहते हैं कि ये खोलें, वो खोलें क्या आप जिम्मेदारी लेंगे? कुछ लोग मुझे रात के कर्फ्यू का सुझाव दे रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हर चीज के लिए ऑर्डर की जरूरत नहीं होती. यदि आवश्यक न हो तो बाहर जाने से बचें. अगर महाराष्ट्र ने कुछ करने की ठान ली तो हम उसे पूरा करते हैं. इसलिए मैं आपसे अपील कर रहा हूं, भीड़ से बचें, बाहर जरूरत पड़ने पर ही जाएं और मास्क जरूर लगाएं.

समीक्षा के बाद लॉकडाउन पर फैसला 

सीएम के संबोधन से पहले महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम ने कहा कि दिवाली के दौरान बाजारों में भीड़ से कोरोना संक्रमण बढ़ा है. उन्होंने कहा कि अगले 8 से 10 दिनों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी, तब लॉकडाउन को लेकर आगे का फैसला किया जाएगा.

डिप्टी सीएम अजीत पवार ने कहा कि दिवाली के दौरान स्थिति ऐसी थी जैसे भीड़ ने ही कोरोना को मार दिया हो. राज्य में स्कूलों को शुरू करने के लिए कई नियम बनाए गए हैं, जो अलग-अलग है कि कैसे स्कूल को सैनेटाइज और स्वच्छता बनाया जाए. 

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