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महाराष्ट्र का नया पावर सेंटर बना ठाणे, अंतुले-राणे से ज्यादा असरदार रहे एकनाथ शिंदे

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार का तख्तापलट करने वाले एकनाथ शिंद मुख्यमंत्री बन गए हैं. शिंदे महाराष्ट्र के ठाणे इलाके से आते हैं, जो कोंकण रीजन में आता है. एकनाथ शिंदे से पहले कोंकण क्षेत्र से एआर अंतुले और नारायण राणे मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन सियासी प्रभाव नहीं जमा सके.

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एकनाथ शिंदे, नारायण राणे, एआर अंतुले
एकनाथ शिंदे, नारायण राणे, एआर अंतुले
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ठाणे जिले से आते हैं
  • एआर अंतुले कोंकण के पहले मुख्यमंत्री बने थे
  • कोंकण इलाका शिवसेना का सबसे मजबूत गढ़

महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने हैं, जो ठाणे इलाके से आते हैं. आनंद दिघे के बाद शिवसेना में ठाणे जिले के मजबूत चेहरा माने जाने वाले एकनाथ शिंदे के सिर मुख्यमंत्री का ताज सजने के साथ ही ठाणे को महाराष्ट्र का अब नया पावर सेंटर माना जा रहा है. शिंदे से पहले कोंकण रीजन से आने वाले नारायण राणे और एआर अंतुले भले ही सीएम बने थे, लेकिन सत्ता रिमोर्ट कंट्रोल किसी और के हाथ में रहता था. ऐसे में देखना है कि शिंदे क्या सियासी प्रभाव जमाते हैं? 

बता दें कि महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में पालघर, ठाणे, रायगढ़, मुंबई, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिले आते हैं. यह शिवेसना का शुरू से ही मजबूत गढ़ माना जाता है और सत्ता का पहला स्वाद ठाणे से ही शिवसेना ने चखा था. कोंकण के ठाणे इलाके में शिवसेना के मजबूत नेता आनंद दिघे हुआ करते थे तो नारायण राणे भी कभी बाल ठाकरे के राइट हैंड थे, जो सिंधदुर्ग जिले से हैं. 

शिंदे ने कोंकण में कायम किया जलवा

आनंद दिघे के निधन बाद और नारायण राणे के पार्टी छोड़ने के बाद एकनाथ शिंदे शिवसेना और ठाकरे परिवार के करीबी बने. इस तरह उन्होंने ठाणे जिले सहित पूरे कोंकण इलाके में अपना सियासी प्रभाव स्थापित किया. नारायण राणे और एआर अंतुले के बाद एकनाथ शिंदे कोंकण क्षेत्र से तीसरे मुख्यमंत्री बने हैं. इस तरह शिंदे की ताजपोशी के साथ ही ठाणे और कोंकण रीजन का सियासी महत्व एक बार फिर बढ़ गया है. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को देर शाम आनंद दिघे की समाधी 'शक्ति स्थल' का दर्शन किया और कहा कि हमारी सरकार अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी. 

महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार ठाणे की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद हुई है, क्योंकि एकनाथ शिंदे की सियासी कर्मभूमि ठाणे है. ऐसे में एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने से ठाणे ही नहीं कोंकण के जिलों की राजनीति में भी तेजी से बदलाव आएगा. मुख्यमंत्री शिंदे के साथ ठाणे और पालघर के सभी शिवसेना विधायक खड़े हैं और कोंकण क्षेत्र में उद्धव ठाकरे के लिए सियासी संकट खड़ा हो गया है. 

कोंकण में बजता रहा है शिवसेना का डंका

दरअसल, 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था. महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी भले ही शिवसेना के बड़े भाई की भूमिका में चुनावी मैदान में थी, लेकिन कोंकण इलाके में शिवसेना की ही तूती बोलती रही. यही वजह है कि शिवसेना कोंकण इलाके में बीजेपी से ज्यादा सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी थी और उसे जीत भी मिली थी. 

महाराष्ट्र का कोंकण शिवसेना का शुरू से ही मजबूत गढ़ रहा है, जिसके चलते बाला साहेब ठाकरे ने मनोहर जोशी के बाद नारायण राणे को मुख्यमंत्री बनाया था. राणे मुख्यमंत्री बने, पर सत्ता का रिमोट बाल ठाकरे के हाथों में रहा. राणे महाराष्ट्र के कोंकण इलाके के सिंधुदुर्ग जिले से आते हैं और शिवसेना के प्रभावशाली नेता रहे हैं, लेकिन उद्धव ठाकरे के साथ नारायण राणे के रिश्ते ऐसे खराब हुए कि 2005 में शिवसेना को छोड़ दिया. राणे के पार्टी छोड़ने का असर कोंकण में कोई खास नहीं हो सका. 

एआर अंतुले बने थे सीएम

कोंकण रीजन से सबसे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वालों में कांग्रेस नेता एआर अंतुले का नाम आता है, जो रायगढ़ जिले से आते थे. अंतुले साल 1980 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे जबकि उनसे पहले मराठावाड़ा का सियासत में दबदबा था. अंतुले ने सत्ता की कमान संभाली, लेकिन सियासी प्रभाव नहीं छोड़ सके. उस वक्त कांग्रेस में दिल्ली दरबार मजबूत होने के चलते अंतुले को तमाम फैसलों के लिए शीर्ष नेतृत्व से गुहार लगानी पड़ती थी. 

एकनाथ शिंदे कोंकण से तीसरे मुख्यमंत्री बने हैं, जो ठाणे जिले से आते हैं. ठाणे के शिवसेना के मजूबत नेता आनंद दिघे की उंगली पकड़कर एकनाथ शिंदे ने सियासी दांवपेच सीखे. वहीं, उद्धव के मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवसेना की मुंबई लॉबी ने ठाकरे परिवार के चारों तरफ घेरा बना रखा था, जिसके चलते कोंकण रीजन के दूसरे क्षेत्र के नेता साइड लाइन थे. ऐसे में उद्धव का तख्तापलट करने के बाद शिंदे ने जिस तरह से कोंकण के शिवसेना विधायकों को अपने साथ रखा है, उससे साफ है कि सत्ता में इस इलाके का प्रभाव दिखेगा. 

बता दें कि महाराष्ट्र के ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, उल्हासनगर महानगर पालिका के चुनाव होने हैं. कोंकण क्षेत्र में सभी आठ नगर निगमों में शिवसेना और भाजपा का कब्जा है. ठाणे, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में शिवसेना का दबदबा है. वहीं, भाजपा ठाणे और पालघर में अपना वर्चस्व बनाए हुए है. इन निकायों पर कब्जे के लिए मुख्यमंत्री शिंदे की शिवसेना और बीजेपी के अलावा उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना की नजर है. इसलिए शिंदे मंत्रिमंडल में जिले के दोनों दलों के कुछ विधायकों की लॉटरी निश्चित रूप से लग सकती है. इतना ही नहीं, कोंकण में अपने सियासी प्रभाव को भी बनाए रखने के लिए क्षेत्र के तमाम नेताओं को कैबिनेट में मौका मिल सकता है. 

शिवसेना के बाद बीजेपी का भी प्रभाव ठाणे से लेकर कोंकण इलाके में काफी बढ़ा है. 2019 के विधानसभा चुनाव के पहले एनसीपी छोड़ बीजेपी में आने वाले ऐरोली के विधायक और नवी मुंबई के कद्दावर नेता गणेश नाईक हैं. रविंद्र चव्हाण, संजय केलकर, निरंजन डावखरे हैं. वहीं, शिवसेना के दलित नेता डॉ. बालाजी किणीकर, शांताराम मोरे, आदिवासी नेता श्रीनिवास वनगा, रविन्द्र फाटक एकनाथ शिंदे की गुड बुक में हैं. वहीं, बीजेपी नारायण राणे को केंद्रीय मंत्री बनाकर कोंकण इलाके में अपना प्रभाव जमाने में जुटी है.  


 

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