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आधार कार्ड नहीं तो कोरोना वैक्सीन कैसे लगेगी? बॉम्बे HC का केंद्र से सवाल

इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस तब छिड़ी जब प्रोफेसर विजय राघवन की तरफ से इस बात पर चिंता जाहिर की गई कि आधार कार्ड नहीं होने की वजह से कई कैदियों को वैक्सीन नहीं लग पा रही है.

बॉम्बे हाई कोर्ट बॉम्बे हाई कोर्ट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बॉम्बे HC ने पूछा- वैक्सीन के वक्त आधार जरूरी
  • जेल में बंद कैदियों को नहीं लग पा रही वैक्सीन
  • मुद्दे पर केंद्र से मांगा गया जवाब

कोरोना की बिगड़ती स्थिति के बीच देश की न्याय पालिका भी अब सक्रिय भूमिका निभा रही है. हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, सभी जगह सवाल-जवाब का सिलसिला जारी है और कोविड पर एक नेशनल प्लान की अपील है. इस बीच बॉम्बे हाई कोर्ट की तरफ से टीकाकरण को लेकर एक बड़ा सवाल उठा दिया गया है. सवाल है कि क्या कोरोना वैक्सीनेशन के वक्त आधार कार्ड जरूरी है?

कोरोना वैक्सीनेशन के वक्त आधार कार्ड जरूरी है?

ये सवाल कोर्ट की तरफ से तब उठाया गया जब ये मुद्दा सामने आया है कि कई लोगों को सिर्फ इसलिए वैक्सीन नहीं लग पा रही है क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं है. इसी मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र से पूछा है कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें वैक्सीन कैसे लगेगी. इस मुद्दे पर जल्द कोई फैसला होना चाहिए. वहीं कोर्ट की तरफ से उन कैदियों का भी मुद्दा उठाया गया है जो जेल में बंद हैं और उनका आधार कार्ड नहीं बनवाया गया है. ऐसे में उन्हें कोविड की वैक्सीन लगवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

कैदियों को नहीं लग पा रही वैक्सीन

इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस तब छिड़ी जब प्रोफेसर विजय राघवन की तरफ से इस बात पर चिंता जाहिर की गई कि आधार कार्ड नहीं होने की वजह से कई कैदियों को वैक्सीन नहीं लग पा रही है. राघवन की टीम महाराष्ट्र की 6 जेलों के साथ काम करती है, ऐसे में उस अनुभव के आधार पर ही ये सवाल भी कोर्ट के सामने रखा गया. ऐसे में कोर्ट ने दो सवाल केंद्र और राज्य सरकार के सामने रखे. पहला तो ये कि क्या कोई ऐसा मैकेनिज्म है, जिसके जरिए ये पता लगाया जा सके कि कैदियों का आधार कार्ड बना है या नहीं. वहीं दूसरा सवाल ये रखा गया कि अगर उनके पास आधार कार्ड नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति में क्या किया जाएगा.

केंद्र से मांगा गया जवाब

चीफ जस्टिस की तरफ से ये सुझाव दिया गया कि जेल में आधार कार्ड के कैंप लगाए जा सकते हैं जिसके जरिए फिर सभी कैदियों के पास खुद के आधार हो जाएंगे. लेकिन इस सुझाव पर दूसरे जज ने जोर देकर कहा कि जेलों में कई विदेशी कैदी भी कैद हैं जिनके पास आधार नहीं हो सकता है. ऐसे में कोई दूसरे ही विकल्प के बारे में सोचना पड़ेगा. कोर्ट की तरफ से स्पष्ट कहा गया है कि इस मुद्दे पर जल्द किसी समाधान की जरूरत है क्योंकि कोरोना की लड़ाई में वैक्सीनेशन ही सबसे बड़ा हथियार है. केंद्र से इस मुद्दे पर जवाब मांगा गया है
 

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