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जहां से जुड़ा हूं, वहां की सेवा जिंदगी भर करूंगा, ये कहने में क्या हर्ज: अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक व्यक्ति दो पद के मसले पर स्पष्ट किया कि ये अनावश्यक बहस छिड़ी है. मीडिया में पहले आ रहा था कि मैं मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहता हूं, जब तक कोई कहे नहीं कि मुझे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए खड़ा होना है, तब तक कोई क्या बोलेगा. साइलेंट रहा.

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिरडी में साईबाबा के दर्शन किए.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिरडी में साईबाबा के दर्शन किए.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केरल के कोच्चि से शुक्रवार को महाराष्ट्र के शिरडी पहुंचे. यहां उन्होंने साईबाबा के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया. उसके बाद मीडिया से बातचीत में कांग्रेस अध्यक्ष के दावेदार होने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद छोड़ने की चर्चाओं पर खुलकर बातचीत की. गहलोत ने कहा कि जब तक हाईकमान से आदेश नहीं मिलेगा, तब तक मैं कैसे कुछ बोल सकता था. मगर, मेरी चुप्पी का गलत मतलब निकाला जाने लगा. उन्होंने कहा कि आज साईबाबा का आशीर्वाद लिया है. सभी मित्रों से बात कर आगे की रणनीति तय करेंगे.

एक व्यक्ति दो पद के मसले पर गहलोत ने स्पष्ट किया कि ये अनावश्यक बहस छिड़ी है. मीडिया में पहले आ रहा था कि मैं मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहता हूं, जब तक कोई कहे नहीं कि मुझे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए खड़ा होना है, तब तक कोई क्या बोलेगा. साइलेंट रहा. मीडिया ने मायने लगाए कि मैं मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहता. मैंने ये जरूर कहा और आज भी कहता हूं- फॉर्म भरने के बाद भी कहूंगा कि मैं राजस्थान से आता हूं और वहां की सेवा जिंदगीभर करता रहूंगा. ये कहने में क्या हर्ज है. उसके लोग अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं. मीडिया इंटरपीट करती है. 

साई से भाईचारे की प्रार्थना की

गहलोत ने साई दर्शन के बाद कहा कि सभी देशवासी भाईचारे से रहें. हिंसा ना हो. सभी परेशानी से जनता को छुटकारा मिले, यही प्रार्थना आज की है. गहलोत ने आगे कहा कि राहुल गांधीजी की यात्रा का मकसद भी यही है. साथ में बेरोजगारी, महंगाई ये बड़े कारण है.

आज लोकतंत्र खत्म हो गया...

उन्होंने कहा कि डेमोक्रेसी में कई बार उतार-चढ़ाव आते हैं. अभी जो हालात बने हैं, उससे हम लोग वाकिब हैं. फिर से हम लोगों का दिल जीतेंगे. हमें उम्मीद है कि देश के हित के अंदर कांग्रेस की पॉलिसी, प्रोग्राम प्रिंसिपल है, वो संविधान के अनुकूल है. आज संविधान की धज्जियां उड़ रही हैं. आज डेमोक्रेसी खत्म हुई है. एजेंसियों का मिस यूज हो रहा है. ईडी, सीबीआई, ज्यूडिशियरी पर दबाव है. मैं चाहता हूं कि देश को इन बातों से छुटकारा मिले. देश में सभी जाति-धर्म के लोग प्यार से रहें. भाईचारे से रहें.

पीएम मोदी को अपील करनी चाहिए

गहलोत का कहना था कि मैं प्रधानमंत्री मोदीजी से बार-बार मांग करता हूं कि देश को अपील करें कि शांति, सद्भाव प्यार से रहो और हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. ये आज अपील करनी चाहिए. आज देश में तनाव है. हर गांव-जिले में जातियों में तनाव है. ये नहीं होना चाहिए. 

कांग्रेस गांवों तक है...

एक तरफ भारत जोड़ो अभियान शुरू हुआ है और दूसरी तरफ कांग्रेसी नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, इस सवाल पर गहलोत ने स्पष्ट किया कि एक बार चुनाव हो जाएं. पार्टी में डेमोक्रेसी है. सब मिलजुल के काम करेंगे. गांव से लेकर प्रदेश तक कांग्रेस कैसे मजबूत हो, इस पर बात करेंगे. क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है. देश के 6 लाख गांवों में कांग्रेस मिलेगी. एकमात्र ऐसी पार्टी है जो देश में और पूरे गांव में है.

पार्टी की सेवा करनी है...

उन्होंने कहा कि डेट तय करनी है. बाकी कोई मुश्किल नहीं है. खड़ा होना तो होना है. पार्टी की सेवा करनी है. पार्टी ने मुझे 3 बार केंद्रीय मंत्री, 3 बार एआईसीसी का महामंत्री, 3 बार पीसीसी प्रेसिडेंट और 3 बार मुख्यमंत्री बनाया है. मुझे जिंदगी में सम्मान ही मिला है. जिम्मेदारी मिली है. सोनिया गांधी और हाईकमान मुझे जो कुछ कहेगा, वो करना ही है और करना ही चाहिए, इसलिए मैंने यह भी कहा, मेरे लिए कोई पद महत्व नहीं रखता. अगर मेरे बस चले तो मैं पद पर नहीं रहूं. राहुल गांधीजी के साथ में यात्रा पर निकल जाऊं.

इस बार गांधी फैमिली से अध्यक्ष नहीं होगा

इससे पहले गहलोत ने ट्वीट किया- 'मैंने पहले भी कहा एक बार मुझे राहुलजी को रिक्वेस्ट करनी थी, जब सब PCCs प्रस्ताव पास कर रही हैं कि आपको (राहुल गांधी) अध्यक्ष बनना चाहिए तो फिर आप स्वीकार कीजिए. मैंने काफी बातचीत करने की कोशिश की, पर उनका कहना है कि हमने फैसला कर लिया कि एक बार कोई गांधी फैमिली का व्यक्ति उम्मीदवार नहीं बनेगा.'

हम नई शुरुआत करेंगे...

आगे कहा- 'ये उन्होंने स्पष्ट कह दिया है कि मुझे मालूम है सब लोग चाहते भी हैं और मैं सम्मान करता हूं उनकी बातों का. PCCs ने प्रस्ताव पास किया. कार्यकर्ता चाहते हैं तो मेरे दिल में उनके प्रति सम्मान बहुत ज्यादा है पर एक बार हमने तय कर लिया कि इस बार नॉन-गांधी फैमिली का कोई व्यक्ति अध्यक्ष बने. ये तय है कि मुझे अध्यक्ष पद के लिए कॉन्टेस्ट करना है, पर मैं देखता हूं ये पार्टी इनर डेमोक्रेसी की बात है. एक नई शुरुआत हम लोग करें सब मिलकर और मुझे उम्मीद है कि जो हालात देश के हैं, उसके लिए प्रतिपक्ष का मजबूत होना बहुत जरूरी है, उसके लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.'

 

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