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आदित्य ठाकरे बोले- जो छोड़ गए वे चुनाव लड़कर दिखाएं, जो आना चाहते हैं उनके लिए दरवाजे खुले

महाराष्ट्र में जारी वर्तमान सियासत पर आदित्य ठाकरे ने बड़ा बयान दिया है. उनके मुताबिक जो बागी अभी भी शिवसेना में वापस आना चाहते हैं, उनके लिए मातोश्री के दरवाजे खुले हैं.

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शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आने वाले बीएमसी चुनाव में उद्धव की अग्निपरीक्षा
  • पार्टी के साथ-साथ चुनाव चिन्ह की भी लड़ाई

महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन हुए तो कुछ दिन बीत गए हैं, लेकिन शिवसेना के अंदर जारी घमासान शांत होने का नाम नहीं ले रहा. जो लड़ाई पहले सिर्फ महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के इस्तीफे तक सीमित थी, अब शिवसेना के वर्चस्व पर आ गई है. सीएम एकनाथ शिंदे लगातार दावे कर रहे हैं कि उनके पास ही असली शिवसेना है.

अब उन तमाम दावों के बीच आदित्य ठाकरे ने फिर जोर देकर कहा है कि वे ही असल शिवसेना हैं और जमीन का हर नेता उनके साथ जुड़ा हुआ है. उनकी तरफ से बागियों को चेतावनी दी गई है कि वे या तो चुनाव लड़ें या फिर वापस आ जाएं. वे कहते हैं कि जो खुशी-खुशी हमे छोड़कर गए हैं, उनमें अब चुनाव लड़ने की हिम्मत भी होनी चाहिए. लेकिन जो अभी भी वापस आना चाहते हैं, उनके लिए मातोश्री के दरवाजे खुले हुए हैं.

आदित्य ठाकरे का ये बयान काफी मायने रखता है क्योंकि उन्हें अभी भी इस बात की उम्मीद है कि कुछ बागी वापस उद्धव ठाकरे के पास आ सकते हैं. ऐसी स्थिति में शिंदे गुट कमजोर पड़ जाएगा और सत्ता गंवाने के बाद भी पार्टी पर ठाकरे अपना दांव ठोक पाएंगे. वैसे आदित्य ने निष्ठा यात्रा के दौरान सत्ता परिवर्तन से लेकर शिवसैनिकों के बागी तेवर पर विस्तार से बात की.

उनके मुताबिक जमीनी नेता आज भी उस शिवसेना के साथ खड़े हैं जो उनके पिता उद्धव ठाकरे की अगुवाई में चल रही है. वे कहते हैं कि जिन्हें सेना को छोड़ना था उन्होंने छोड़ दिया. लेकिन जितने भी जमीनी नेता हैं, वे आज भी हमारा समर्थन करते हैं, वे मेरे पिता उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं. आदित्य ने इस बात पर भी जोर दिया कि हर क्षेत्र में आज भी इतने शिवसैनिक खड़े हैं जो अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार हैं.

वैसे महाराष्ट्र में इस समय उद्धव ठाकरे के सामने असल चुनौती बीएमसी चुनाव की है क्योंकि वहां पर हमेशा से ही शिवसेना का दबदबा रहा है. ऐसे में इस चुनाव में जब उनकी पार्टी ही दो हिस्सों में बंटी हुई है, तब किस तरह से ये चुनाव लड़ा जाएगा, कौन से चुनाव चिन्ह पर लड़ा जाएगा, ये बड़ा सवाल है.

खबर है कि उद्धव खेमे के कुछ विधायक चाहते हैं कि एक बार फिर बागी विधायकों से बात की जाए. कुछ ने तो बीजेपी से भी हाथ मिलाने की सलाह दी है. लेकिन उद्धव ठाकरे की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, उनकी क्या रणनीति रहने वाली है, ये अभी तक स्पष्ट नहीं.

 

 

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