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पन्ना प्रमुख की तर्ज पर एमपी उपचुनाव में कांग्रेस बना रही मतदाता इंचार्ज

मध्य प्रदेश की 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को उसी के फॉर्मूले से मात देने की रणनीति बनाई है. बीजेपी के पन्ना प्रमुख की तर्ज पर कांग्रेस ने उपचुनाव वाले क्षेत्रों में मतदाता इंचार्ज बनाने का काम शुरू कर दिया है, जिसके तहत पार्टी अपने बूथ मैनेजमेंट को मजबूत करना चाहती है.

मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी और कमलनाथ मध्य प्रदेश: जीतू पटवारी और कमलनाथ

  • एमपी में कांग्रेस एक बूथ पर 25 पन्ना प्रभारी नियुक्त
  • MP में BJP के फॉर्मूले से मात देना का कांग्रेस का प्लान

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी को उसी के फॉर्मूले से मात देने की रणनीति बनाई है. बीजेपी के पन्ना प्रमुख की तर्ज पर कांग्रेस ने उपचुनाव वाले क्षेत्रों में मतदाता इंचार्ज बनाने का काम शुरू कर दिया है, जिसके तहत पार्टी अपने बूथ मैनेजमेंट को मजबूत करना चाहती है. कांग्रेस ने इसे पन्ना प्रभारी का नाम दिया गया है. उपचुनाव में कांग्रेस एक बूथ पर 25 पन्ना प्रभारी बना रही है. देखना है कि कांग्रेस इस फॉर्मूले के जरिए क्या सत्ता में वापसी का रास्ता तय कर पाएगी?

मध्य प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने aajtak.in से बातचीत करते हुए बताया कि उपचुनाव को देखते हुए हमने संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने का काम शुरू किया है. उपचुनाव वाले क्षेत्रों में संगठन स्तर पर हम कई तरह के काम कर रहे हैं, जिनमें से सबसे अहम पन्ना प्रभारी बनाने का तेजी से चल रहा है. एक बूथ पर 25 पन्ना इंचार्ज बनाने का काम कर रहे हैं. इस तरह से हर विधानसभा सीट पर तकरीबन साढ़े छह हजार से लेकर सात हजार पन्ना प्रभारी होंगे.

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विधानसभा क्षेत्र में 250 से 300 बूथ होते हैं जबकि एक बूथ पर 800 से लेकर 1000 मतदाता होते हैं. मतदाता लिस्ट के एक पन्ने पर 50 मतदाता होते हैं. कांग्रेस ने मतदाता लिस्ट के एक पन्ने की जिम्मेदारी कहीं एक तो कहीं दो कार्यकर्ताओं को सौंपी है. कांग्रेस के पन्ना प्रभारी का काम मतदाता सूची पर ध्यान रखने के रखने के साथ ही उसके पन्ने में कहीं कोई गड़बड़ी दिखती है तो उसकी शिकायत चुनाव आयोग से करने और उसे ठीक करवाने का होगा. इसके अलावा मतदाताओं से संपर्क भी स्थापित करने और उन्हें वोटिंग के दिन बूथ स्तर तक ले जाने का जिम्मा भी सौंपा गया है.

दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 कांग्रेस विधायकों के बीजेपी में चले जाने के बाद कांग्रेस के संगठन को नए स्तर से तैयार करने की एक बड़ी चुनौती है. कई सीटों पर विधायकों के साथ-साथ पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ता भी पार्टी का साथ छोड़ गए हैं. इसीलिए कांग्रेस का मानना है कि पार्टी संगठन में बूथ लेबल पर कुछ कमियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

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प्रदेश में जिन 27 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होना है, उनमें तकरीबन 58 लाख मतदाता है. इन सभी मतदाताओं को संपर्क स्थापित करने के लिए कांग्रेस के करीब पौने दो लाख कार्यकर्ता मैदान में रहेंगे. इन सभी के कंधों पर उप चुनाव वाले विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को मजबूत करने से लेकर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने की भी जिम्मेदारी होगी.

जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने हर विधान सभा क्षेत्र में कमिटी बनाई है. सेक्टर मंडलम बने हैं. वोटिंग के लिए वे जनता को जागरूक करेंगे. साथ ही वोटिंग के दिन सक्रियता से काम करेंगे. कांग्रेस उप चुनाव वाले क्षेत्रों में इंचार्ज बनाने के लिए आनुसांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं की मदद ले रही है, जिनमें युवा कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े कार्यकर्ताओं, किसान कांग्रेस, सेवादल से जुड़े सेवकों की भूमिका प्रमुख होगी.

जीतू पटवारी का कहना है कि हम संगठन को मजबूत करने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. इसके नतीजे उप चुनावों में सामने आएंगे और निश्चित रूप से हम बड़ी जीत दर्ज करेंगे. उन्होंने कहा कि आखिरकार हमारी 15 महीने की उपलब्धियां जनता के सामने हैं, जनता ने पिछली बीजेपी सरकार का 15 साल और वर्तमान कार्यकाल भी देखा है.

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