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Indian Railways: MP में बदलेगा एक और रेलवे स्टेशन का नाम, 'टंट्या मामा' से पहचाना जाएगा पातालपानी स्टेशन

Patalpani Railway Station Name Changed, Indian Railways: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन करने के बाद शिवराज सरकार एक और रेलवे स्टेशन का नाम बदलने जा रही है. अब पातालपानी रेलवे स्टेशन (Patalpani Railway Station) का नया नाम टंट्या मामा रेलवे स्टेशन (Tantya Mama Railway Station) होगा.

Patalpani Railway Station (फोटो: इंडियन रेल इंफो) Patalpani Railway Station (फोटो: इंडियन रेल इंफो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने किया ऐलान
  • हाल में हबीबगंज का नाम हुआ है कमलापति स्टेशन

Patalpani Railway Station Name Changed: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने घोषणा की है कि इंदौर के पास पातालपानी झरने के पास बने पातालपानी रेलवे स्टेशन (Patalpani Railway Station) का नाम बदलकर अब आदिवासियों के जननायक टंट्या मामा (Tantya Mama Railway Station) के नाम पर किया जाएगा.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंडला मे जनजातीय गौरव सप्ताह के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनजातीय महानायकों के नाम पर अनेक स्थानों के नाम करने की घोषणा की. 

मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि मंडला में बनने वाले मेडिकल कॉलेज का नाम राजा हृदय शाह के नाम से होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि 4 दिसंबर को जननायक टंट्या मामा जो बड़े क्रांतिकारी थे, उनका बलिदान दिवस है. अंग्रेज भी उनसे घबराते थे. उन्होंने भी अपने आप को देश के लिए बलिदान कर दिया, इसलिए हमने तय किया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर का नाम टंट्या भील के नाम रखा जाएगा और पातालपानी में जो टंट्या मामा का मंदिर है, उसका भी जीर्णोद्धार किया जाएगा. इंदौर के पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम भी टंट्या मामा के नाम पर होगा. 

मुख्यमंत्री ने कहा, ''जिस तरीके से भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन नाम बदलकर कमलापति रखा है. वैसे ही पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम जननायक टंट्या भील के नाम पर रखा जाएगा.'' यह स्टेशन इंदौर-अकोला रेल लाइन पर पड़ने वाला एक छोटा सा स्टेशन है, जिसका पातालपानी झरना पर्यटन स्थल घूमने आए लोग इस्तेमाल करते हैं.

बता दें कि टंट्या भील की आज भी आदिवासी घरों मे पूजा होती है. टंट्या भील को आदिवासी देवता कि तरह मानते हैं. टंट्या भील ने अंग्रेजों की आदिवासियों पर दमनकारी नीतियों का जबरदस्त तरीके से विरोध किया और इसलिए उन्हें इंडियन रॉबिनहुड भी कहा गया है. 

 

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