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झारखंड में अपना स्पीकर नहीं चाहती कांग्रेस, 5 मंत्री पद की है डिमांड

झारखंड में कांग्रेस क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को साधने के लिए हेमंत सोरेन के सामने पांच मंत्री पद की मांग कर रही है. कांग्रेस झारखंड में 16 सीटें जीतने में कामयाब रही है, ऐसे में उसी लिहाज से सरकार में अपना प्रतिनिधित्व भी चाहती है. इसीलिए कांग्रेस ने सियासी नफा-नुकसान देखते हुए अपने पांच मंत्री बनाना चाहती है.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Courtesy- PTI) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Courtesy- PTI)

  • झारखंड में कांग्रेस के दो विधायक पहले ही ले चुके हैं मंत्री पद की शपथ
  • झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 16 सीटों पर दर्ज की थी जीत

झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार बने पांच दिन गुजर गए हैं, लेकिन अभी तक कैबिनेट का गठन नहीं हो सका है. मंत्री पद पाने के लिए कांग्रेस के विधायकों की दिल्ली दौड़ तेज हो गई है तो जेएमएम के विधायक रांची में ही लॉबिंग करने में जुट गए हैं. कांग्रेस हेमंत सोरेन सरकार में अपने लिए पांच मंत्री पद चाहती है. इसीलिए मंत्रिमंडल का विस्तार अटका हुआ है. ऐसे में कांग्रेस स्पीकर पद को भी छोड़कर पांच मंत्रालय के अरमान को पूरा कर सकती है.

दरअसल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ 29 दिसंबर को कांग्रेस कोटे से दो विधायक आलमगीर आलम और रामेश्वर उरांव मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं. इसके अलावा आरजेडी के इकलौते विधायक सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली है. कांग्रेस हेमंत सोरेन सरकार में अपने लिए पांच मंत्री पद चाहती है, जबकि विधायकों की संख्या के आधार पर जेएमएम कांग्रेस को चार मंत्रीपद देना चाहती है. ऐसे में कांग्रेस स्पीकर के पद को लेकर एक मंत्री अतिरिक्त देने का फॉर्मूला निकाल सकती है.

कांग्रेस क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को साधने के लिए हेमंत सोरेन के सामने पांच मंत्री पद की मांग कर रही है. कांग्रेस झारखंड में 16 सीटें जीतने में कामयाब रही है, ऐसे में उसी लिहाज से सरकार में अपना प्रतिनिधित्व भी चाहती है. इसीलिए कांग्रेस ने सियासी नफा-नुकसान देखते हुए अपने पांच मंत्री बनाना चाहती है.

कांग्रेस दक्षिणी छोटानागपुर से आदिवासी चेहरे रामेश्वर उरांव और संथाल परगना से अल्पसंख्यक चेहरे आलमगीर आलम को मंत्री बना चुकी है. कांग्रेस के बचे कोटे के लिए राजेन्द्र प्रसाद सिंह, बन्ना गुप्ता, विक्सल कोंगाड़ी और बादल पत्रलेख लगातार दिल्ली में आला नेताओं का दरवाजा खटखटा रहे हैं. इस तरह से कांग्रेस सवर्ण समुदाय को साधने के लिए राजेंद्र सिंह को मंत्री बनाने का दांव चल सकती है. कांग्रेस से चार महिलाएं विधायक बनकर आई हैं. इनमें अंबा प्रसाद, पूर्णिमा सिंह, ममता देवी और दीपिका पांडेय सिंह चुनकर आई हैं, जिनमें से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है.

JMM के 6 मंत्री और बनाए जा सकते हैं

वहीं, जेएमएम से इस बार तीस विधायक चुनकर आए हैं. हेमंत सोरेन के सीएम बनने के बाद 6 मंत्री और भी बनाए जा सकते हैं. जेएमएम झारखंड में अपने मंत्रिमंडल के जरिए क्षेत्रीय समीकरण को साधना चाहती है. इसके तहत झारखंड के सभी पांचों रीजन से प्रतिनिधित्व देना चाहती है. कोल्हन क्षेत्र में 14 विधानसभा सीटें आती है, जेएमएम 11 सीटें जीतने में कामयाब रही है और कांग्रेस को दो सीटें मिली है. यहां बीजेपी को महज एक सीट मिली है. जेएमएम के यहां चंपाई सोरेन और जोभा मांझी जैसे नेता जीते हैं. इनमें से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है.

संथाल परगना में 18 विधानसभा सीटें आती हैं. यहां भी बीजेपी का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है. बीजेपी को तीन और जेवीएम को एक सीट मिली है. जेएमएम से स्टेफीमन मरांडी और हाजी हुसैन अंसारी जैसे वरिष्ठ नेता जीतकर आए हैं. ये दोनों नेता शिबू सोरेन के करीबी माने जाते हैं, जिनमें से एक को मंत्री बनाए जाने की संभावना है. हजारीबाग इलाके से भी किसी एक को जेएमएम मंत्री बनाने का दांव चल सकती है. ऐसे ही पलामू में जेएमएम इस बार खाता खोलने में कामयाब रही है, ऐसे में पलामू परगना से मिथलेश ठाकुर को मंत्री बनाया जा सकता है.

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