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अमरनाथ यात्रा रद्द हुई तो श्रद्धालुओं ने लगाए पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे

श्रद्धालु इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बता रहे हैं. जम्मू में पिछले एक सप्ताह से फंसे उत्तर प्रदेश के जालौन निवासी कई श्रद्धालुओं  ने आज तक से बात करते हुए अपना दर्द बयान किया.

अमरनाथ यात्रा अमरनाथ यात्रा

  • पाकिस्तान को ठहराया यात्रा रद्द होने के लिए जिम्मेदार
  • यात्रा अधूरी छोड़कर अपने घरों को मायूस होकर लौटे यात्री

अपने घर से बाबा बर्फानी अमरनाथ के दर्शन का अरमान संजोए तीर्थ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं में यात्रा रद्द होने से नाराजगी है. अमरनाथ यात्रा स्थगित होने के बाद यात्रा से वंचित रहे श्रद्धालुओं में पाकिस्तान के प्रति जबरदस्त आक्रोश है. पिछले एक सप्ताह से बाबा के दरबार के लिए अपना जत्था रवाना होने का इंतजार कर रहे दर्जनों श्रद्धालुओं का आक्रोश शनिवार को फूट पड़ा.

श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली और मुर्दाबाद के नारे लगाए. जम्मू में पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगा तो हिंदुस्तान जिंदाबाद भी गूंजा. श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा रद्द होने से उन्हें तकलीफ उठानी पड़ रही है. श्रद्धालु इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार बता रहे हैं. जम्मू में पिछले एक सप्ताह से फंसे उत्तर प्रदेश के जालौन निवासी कई श्रद्धालुओं  ने आज तक से बात करते हुए अपना दर्द बयान किया.

श्रद्धालुओं ने कहा कि वह एक साल से बाबा के दर्शन के लिए यात्रा शुरू होने का इंतजार कर रहे थे. जब दर्शन की बारी आई, तब यात्रा रद्द हो गई. अब बाबा का दर्शन करने के लिए एक साल और इंतजार करना पड़ेगा. यात्रा रद्द होने के बाद श्रद्धालु वापस अपने घर लौटने लगे हैं. अमरनाथ यात्रा के दौरान हमेशा यात्रियों से गुलजार रहने वाला जम्मू का यात्री निवास और यात्रियों की सहायता के लिए बने सहायता कक्ष सूने पड़ गए हैं.

गिने-चुने यात्री अभी भी यात्री निवास पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यादातर यात्रा रद्द होने के बाद अपने घर के लिए कूच कर गए हैं. जो बचे भी हैं, वह लौट रहे हैं और तीर्थ यात्रा पूरी किए बगैर ही लौटने की मायूसी चेहरे पर साफ झलक भी रही है. जालौन निवासी साकेत कुमार दो बार यात्रा रद्द होने के कारण वह जम्मू से आगे नहीं बढ़ पाए.

साकेत ने मायूसी के साथ कहा, "हम लोग 30 जुलाई को पहुंच गए थे. हमें बताया गया था कि 1 अगस्त से यात्रा शुरू होगी. देर रात 2 बजे जगा भी दिया गया और हम लोग तैयार होकर बैठ गए. उसके बाद हमें फोन पर सूचना दी गई कि बारिश ज्यादा हो गई है और भूस्खलन के कारण यात्रा रोकी जा रही है."

साकेत ने कहा कि हमने अगले दिन भी इंतजार किया और तब से लगातार इंतजार कर रहे थे. शुक्रवार (2 अगस्त) को बताया गया कि अब यात्रा होगी ही नहीं. बताया गया कि यात्रा के मार्ग पर आतंकवादी गतिविधियां देखी गई हैं. हथियार पकड़े गए हैं. उन्होंने निराशा के साथ कहा कि हम पिछले एक साल से यात्रा का इंतजार कर रहे थे और अब यात्रा रद्द होने से एक साल और इंतजार करना होगा.

जालौन के ही विवेक ने कहा, "पहली अगस्त को मेरा यहां से निकलने का कार्यक्रम था. फिर हमें यह बताया गया कि 4 दिन तक श्रद्धालुओं का कोई जत्था रवाना नहीं किया जाएगा. अब जानकारी दी गई कि भूस्खलन और आतंकवादी गतिविधियों के चलते यात्रा रद्द कर दी गई है."

यह दर्द केवल साकेत और विवेक का नहीं, नीरज और विकास समेत उन सभी श्रद्धालुओं का है जिनकी आस्था और श्रद्धा के साथ अपने घर से शुरू हुई यात्रा बाबा के दरबार तक पहुंचने की बजाय जम्मू में ही थम गई.

बता दें कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अमरनाथ यात्रा 15 अगस्त तक चलनी थी, लेकिन आतंकी खतरे का  हवाला देते हुए इसे दो अगस्त को ही रोक दिया गया. जम्मू कश्मीर के गृह सचिव ने एडवाइजरी कर अमरनाथ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को तुरंत घाटी छोड़ने की सलाह दी थी.

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