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सरकार ने बदली रणनीति, अब श्रीनगर से ही रखी जाएगी JK पर नजर

जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने और उसका विभाजन किए जाने के बाद प्रदर्शन और अन्य हिंसक गतिविधियां हो सकती हैं. ऐसे में वहां पर सुरक्षा में भारी इंतजाम किए गए हैं और घाटी समेत कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा हुआ है.

JK में शांति व्यवस्था रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती (फाइल-REUTERS) JK में शांति व्यवस्था रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती (फाइल-REUTERS)

अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद वहां की स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखना केंद्र सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है. अब खबर है कि सरकार ने अपनी योजना में बदलाव लाते हुए फैसला लिया है कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अब श्रीनगर से ही नजर रखी जाएगी.

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने अपनी योजना बदलाव करते हुए श्रीनगर से न सिर्फ पूरी घाटी बल्कि जम्मू और लद्दाख दोनों ही क्षेत्रों पर नजर बनाए रखने का फैसला लिया है.

माना जा रहा है जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने और उसका विभाजन किए जाने के बाद प्रदर्शन और अन्य हिंसक गतिविधियां हो सकती हैं. ऐसे में वहां पर सुरक्षा में भारी इंतजाम किए गए हैं और घाटी समेत कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा हुआ है.

घाटी का दौरा कर रहे NSA

इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस को मिले साक्ष्यों पर अध्ययन करने के बाद सरकार ने विदेशी पर्यटकों को वहां से वापस भेज दिया और जेल में बंद कैदियों को वहां से निकालकर दूर दूसरे राज्यों की जेल में शिफ्ट करा दिया.

इस बीच स्थानीय हालात का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल राज्य के कई शीर्ष अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं. वह लगातार घाटी का दौरा कर चुके हैं. डोभाल की टीम का अहम हिस्सा राज्य के मुख्य सचिव बीआर सुब्रहम्णयम और राज्य की डीजीपी दिलबाग सिंह भी अलग-अलग जगहों का दौरा कर रहे हैं. साथ ही स्थानीय लोगों से मिल भी रहे हैं और उनसे यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद क्षेत्र का किस तरह से विकास होगा.

गृह मंत्री अमित शाह के 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के महज घंटे भर बाद अजीत डोभाल श्रीनगर पहुंच गए थे. डोभाल पहले ऐसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) हैं, जिन्हें कैबिनेट रैंक हासिल है.

घाटी में अजीत डोभाल ने अब तक वहां के कई इलाकों का दौरा किया. इसमें दक्षिण कश्मीर का वो शोपियां क्षेत्र भी शामिल है जो स्थानीय आतंकवादियों का बड़ा केंद्र है.

लोगों के करीब जाने की कोशिश में NSA

सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों का कहना है कि अजीत डोभाल, सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जुटाए गए इनपुट के बजाय निजी तौर पर मैदान में उतर कर जायजा लेना चाहते थे.

पिछले दिनों अजीत डोभाल की कश्मीर यात्रा एक सोशल मीडिया सनसनी बन गई जब दक्षिण कश्मीर की सड़कों पर लोगों के साथ भोजन करते हुए उनका वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गई थी.

जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और सेना ये 3 बल नए बने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा संभालेंगे. यह नई व्यवस्था 31 अक्टूबर से प्रभावी होगी.

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