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श्रीनगर: 8 साल में पहली बार -7.8 डिग्री पहुंचा पारा, हिमालयन हिरण का रखा जा रहा खास ख्याल

कश्मीर में हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद आम लोगों के साथ-साथ जंगली जानवर भी भोजन की कमी का सामना कर रहे हैं और भोजन की तलाश के लिए पहाड़ों से मैदानों की ओर रुख कर रहा है. जम्मू-कश्मीर के वन्यजीव विभाग ने दाचीगाम राष्ट्रीय पार्क में लुप्त होने की कगार पर हिमालयी हिरण (हंगुल) को खिलाने की व्यवस्था की थी.

घाटी में लगातार बढ़ रही ठंड़ घाटी में लगातार बढ़ रही ठंड़
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हिमालयन हिरण का रखा जा रहा खास ख्याल
  • श्रीनगर में शून्य से 7.8 डिग्री नीचे पहुंचा पारा
  • बर्फबारी के कारण जन जीवन अस्त-व्यस्त

कश्मीर में हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद आम लोगों के साथ-साथ जंगली जानवर भी भोजन की कमी का सामना कर रहे हैं और भोजन की तलाश के लिए पहाड़ों से मैदानों की ओर रुख कर रहे हैं. जम्मू-कश्मीर के वन्यजीव विभाग ने दाचीगाम राष्ट्रीय पार्क में लुप्त होने की कगार पर हिमालयी हिरण (हंगुल) को खिलाने की व्यवस्था की थी.

दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान कश्मीर में हिमालयी हिरण (हंगुल) के लिए विश्व प्रसिद्ध नेशनल पार्क है. कश्मीर में हाल ही में हुई भारी बर्फबारी के बाद, पहाड़ के अधिकांश हिस्से पूरी तरह से कई फीट बर्फ से ढक गए हैं. इन पहाड़ों के जंगली जीव कश्मीर के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं, पिछले एक सप्ताह के दौरान तीन तेंदुए और दो काले भालू श्रीनगर के आसपास के रिहायशी इलाकों में देखे गए थे. कश्मीर में खतरनाक हिमालयन हंगुल को बचाने के लिए वन्य जीवन विभाग इन जंगली जानवरों को आवश्यक भोजन प्रदान कर रहा है.

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वाइल्ड लाइफ वार्डन अल्ताफ अहमद कहते हैं कि हंगुल केवल दाचीगाम नेशनल पार्क में पाया जाता है, सर्दियों में भारी बर्फबारी के दौरान ये जानवर मैदानों की ओर बढ़ते हैं. इस राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न प्रकार के पक्षियों के साथ लंगूर, काले भालू और तेंदुए जैसे जानवरों की संख्या काफी है, कश्मीर में भारी बर्फबारी के बाद इन जानवरों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है. 1900 की शुरुआत में यहां 5000 से अधिक हंगुल थे लेकिन अब दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में केवल 240 से 250 ही हंगुल बचे हैं, जो वन्य जीवन विभाग के लिए इस लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

सर्दियों के कठिन दौर से गुजर रहा कश्मीर

गौरतलब है कि कश्मीर में बर्फबारी के कारण ठंड जारी है, श्रीनगर में बुधवार को न्यूनतम तापमान शून्य से 7.8 डिग्री नीचे दर्ज किया गया, यह इस महीने में 8 साल के बाद दर्ज किया गया सबसे कम न्यूनतम तापमान है, पिछली बार इतना न्यूनतम तापमान 14 जनवरी 2012 को दर्ज किया गया था. ठंड के कारण शहर में रहने वाले लोगों को मुश्किलें हो रही हैं, लोगों को जमे हुए नलों और फिसलन भरी सड़कों का सामना करना पड़ रहा है.

घाटी अभी भी सर्दियों के सबसे कठोर दौर से गुजर रही है जिसे परंपरागत रूप से चिल्लई कलां के नाम से जाना जाता है. यह 40 दिनों की अवधि है, जिसे सर्दियों में बहुत ठंडा माना जाता है. इसके बाद 20 दिनों का एक और चरण होता है इस चरण को चिल्लई खुर्द के नाम से जाना जाता है. अंत में अंतिम चरण 10 दिनों का होता है, इसे स्थानीय रूप से चील बाचे के रूप में जाना जाता है.


 

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