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शांतिपूर्ण विरोध के दावों के बावजूद किसान आंदोलन में हिंसक घटनाएं क्यों?

किसान महापंचायत स्थल पर जिस शख्स ने शामियाना लगाया था, उसके मुताबिक उसे 10 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ा. घटना के वक्त शामियाने फाड़ दिए गए, मेज कुर्सियां और गमले जमीन पर फेंके गए.

करनाल की घटना ने खड़े किए सवाल (फोटो- आजतक) करनाल की घटना ने खड़े किए सवाल (फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • करनाल की घटना ने खड़े किए सवाल, 71 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज
  • दोगुनी संख्या में पुलिसकर्मी फिर भी प्रदर्शनकारियों पर पा नहीं सके काबू
  • पंजाब और हरियाणा में अब तक हो चुके हैं दर्जन भर हिंसक प्रदर्शन

किसान संगठनों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दावों के बावजूद कृषि कानूनों के खिलाफ कुछ किसानों के तेवर उग्र होते जा रहे हैं. पंजाब और हरियाणा, दोनों राज्यों में अब तक दर्जनभर हिंसक मामले सामने आ चुके हैं. सबसे ताजा घटना रविवार को करनाल के कैमला गांव में हुई जहां विरोध के नाम पर तोड़फोड़ की गई. 

स्थानीय लोगों ने ‘आजतक’ को बताया कि किसान महापंचायत के मंच पर तोड़फोड़ करने आए प्रदर्शनकारियों ने 10 से 12 एकड़ गेहूं की फसल भी पैरों से रौंद डाली. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस हिंसक घटना में शामिल कई लोगों ने हाथों में डंडे और कुछ धारदार हथियार भी उठा रखे थे.

कैमला गांव के आसपास 3-4 किसानों को रविवार की घटना से सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा. इनकी कई महीनों की मेहनत पर कुछ ही देर में पानी फेर दिया गया. इन किसानों के मुताबिक पैरों से रौंदी गई फसल ना तो अब खुद खड़ी हो सकती है और ना ही उसकी जगह पर गेहूं की दोबारा बिजाई ही मुमकिन है. इन किसानों ने अब बीजेपी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार से मुआवजे की मांग की है. 

बता दें कि रविवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर करनाल जिले के कैमला गांव में ‘किसान महापंचायत’ को संबोधित करने वाले थे. तभी अचानक 800 से 1000 प्रदर्शनकारी मंच पर आ धमके. उनके सामने जो भी सामान आया उसे जमीन पर पटकते चले गए.

किसान महापंचायत स्थल पर जिस शख्स ने शामियाना लगाया था, उसके मुताबिक उसे 10 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ा. घटना के वक्त शामियाने फाड़ दिए गए, मेज कुर्सियां और गमले जमीन पर फेंके गए.

इस घटना ने हरियाणा पुलिस की कारगुजारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रदर्शनकारियों से दोगुनी संख्या होने के बावजूद भी पुलिसकर्मी उन पर काबू पाने में नाकाम रहे और राज्य के मुख्यमंत्री को अपने ही गृह जिले में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने से वंचित रहना पड़ा.

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इस महापंचायत को सुरक्षा देने के लिए 2,200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और जबकि प्रदर्शनकारियों की संख्या 800 से 1000 के बीच में थी.

इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जब भी किसान आंदोलन के समानांतर कोई भी कार्यक्रम आयोजित करेगी तो उनका यही हश्र होगा.

इस बीच, करनाल पुलिस ने गुरनाम सिंह चढूनी सहित 71 लोगों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया है. इसके अलावा आठ सौ अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी कई धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं.

यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री खट्टर को अपने ही राज्य में किसानों का आक्रोश झेलना पड़ा है. पिछले साल 22 दिसंबर को अंबाला में उनके काफिले को निशाना बनाया गया था. पुलिस ने उस मामले में 13 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किए.

इसके अलावा हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष रणवीर सिंह गंगवा पर हमला बोलने के लिए 27 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए. इस हमले में गंगवा तो बाल-बाल बच गए लेकिन उनके एक सुरक्षाकर्मी को चोटें आई. यह घटना बीते शनिवार को हुई.

प्रदर्शन के नाम पर हिंसक घटनाएं सिर्फ हरियाणा तक ही सीमित नहीं है. पड़ोसी राज्य पंजाब में भी किसान बीजेपी नेताओं और उनके द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को अपना निशाना बना रहे हैं.

25 दिसंबर को बठिंडा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जंयती पर आयोजित समारोह में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के सदस्यों ने हमला बोल दिया और बीजेपी के नेताओं को भागकर जान बचानी पड़ी. इस मामले में एकता उगराहां के 40 कार्यकर्ताओं पर आपराधिक केस दर्ज किए गए.


 

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