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गुजरात: 2022 में भी 2017 दोहराएगी बीजेपी? पाटीदार समाज के रुख ने माहौल गरमाया

पाटीदार समाज ने सरदार सम्मान संकल्प अभियान के तहत नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम बदलकर सरदार पटेल स्टेडियम करने की मांग की है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2022 के चुनाव में भी पाटीदार समाज गुस्सा दिखाने की तैयारी कर रहा है.

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वर्तमान में पाटीदार समाज के अधिकांश नेता अन्य दलों में भी बंटे नजर आ रहे हैं. वर्तमान में पाटीदार समाज के अधिकांश नेता अन्य दलों में भी बंटे नजर आ रहे हैं.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • स्टेडियम का नाम सरदार पटेल करने की मांग
  • 14 परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की मांग

गुजरात में कुछ ही महीने बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. यहां 25 साल से बीजेपी की सरकार है. इस बीच, पाटीदार समाज के रुख को लेकर चर्चाएं तेज हैं. 2017 के चुनाव में बीजेपी से नाराज रहने वाला पाटीदार समाज का रुख इस बार भी ठीक नहीं है. पाटीदार समाज के युवा नेताओं ने बीजेपी के सामने अपनी मांगें रखी हैं और विरोध करने का ऐलान किया है.

पाटीदार समाज ने सरदार सम्मान संकल्प अभियान के तहत नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम बदलकर सरदार पटेल स्टेडियम करने की मांग की है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2022 के चुनाव में भी पाटीदार समाज गुस्सा दिखाने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, बीजेपी संगठन की पूरी कोशिश है कि पाटीदार समाज को तवज्जो दी जाए. हाल ही में पाटीदार आंदोलन के नेता रहे हार्दिक पटेल ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है.

हालांकि, पाटीदार समाज के लिए विरोध करना इतना आसान नहीं होगा. वर्तमान में समाज के अधिकांश नेता अन्य दलों में भी बंटे नजर आ रहे हैं. इनमें कई नेता बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में सक्रिय हैं. हाल ही में हार्दिक पटेल के बीजेपी में शामिल होने से भी भरोसे पर काफी असर पड़ा है.

इससे पहले, 2015 में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन में पाटीदार समाज के सभी नेता पूरी तरह से एक हो गए थे. आंदोलन के बाद अधिकांश नेता अलग-अलग राजनीतिक दलों में शामिल हो गए. तब हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए थे. हाल ही में उन्होंने बीजेपी जॉइन की है. वरुण पटेल और चिराग पटेल बीजेपी में शामिल हुए. रेशमा पटेल बीजेपी और बाद में एनसीपी में शामिल हुईं. नरेंद्र पटेल, मनोज पटेल, जयेश पटेल, अतुल पटेल जैसे नेता कांग्रेस में शामिल हो गए.

इसके अलावा, गोपाल इटालिया, निखिल सवानी जैसे नेता इस समय आम आदमी पार्टी में हैं. कुछ नेता अभी भी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं और पाटीदार नेताओं के रूप में काम कर रहे हैं. इनमें अल्पेश कथिरिया, धार्मिक मालवीय जैसे नेता पाटीदार संगठनों को चला रहे हैं. चूंकि, सभी नेता इस समय अलग-अलग पार्टियों में हैं, ऐसे में भरोसा सबसे बड़ा फैक्टर होगा. 

सरदार सम्मान संकल्प अभियान से जुड़े अतुल पटेल ने कहा- हम पाटीदार समाज का विश्वास हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. हार्दिक पटेल ने छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है. उनसे पाटीदार समाज आहत है. उन्हें अब स्वीकार नहीं किया जाएगा. हमने नरेंद्र मोदी स्टेडियम को सरदार पटेल स्टेडियम में बदले जाने की मांग की है. ये सरदार पटेल का अपमान है. हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे. हम आने वाले दिनों में विरोध तेज करने जा रहे हैं. अगर सरकार हमारी मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो पाटीदार समाज बीजेपी के खिलाफ वोट करेगा.

पाटीदार समुदाय की अन्य मांगें भी हैं. इनमें 2015 के आंदोलन के दौरान पाटीदारों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी केसों को वापस लेने की है. इसके अलावा, आंदोलन में मारे गए 14 पाटीदारों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए और उन्हें शहीद का दर्जा देना जाना चाहिए. पाटीदार नेता धार्मिक मालवीय ने कहा कि अगर ये मांगें नहीं मानी गईं तो हम 2017 की तरह बीजेपी और खासकर हार्दिक पटेल के खिलाफ प्रचार करेंगे.

बता दें कि पाटीदार समाज के 2015 में आंदोलन किए जाने का असर 2017 में देखने को मिला था. बीजेपी को 2017 के चुनाव में कई सीटें गंवानी पड़ी थीं. इसके अलावा, बीजेपी कई सीटों पर मामूली बढ़त के साथ जीतने में कामयाब हो सकी थी. 2012 में गुजरात में बीजेपी की 115 सीटें आई थीं. कांग्रेस को 61 सीटें मिली थीं. जबकि 2017 के चुनाव में ये आंकड़ा कम हो गया और बीजेपी की 99 सीटें आ सकीं. कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थीं.

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