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'गुजरात दंगे के केस को राजनीतिक आकाओं के इशारे पर सनसनीखेज बनाया गया'

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली SIT रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को 24 जून को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थीं, वो इसीलिए इस मामले में लगातार घुसी रहीं.

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1 जुलाई तक पुलिस रिमांड में भेजी गईं तीस्ता (फाइल फोटो) 1 जुलाई तक पुलिस रिमांड में भेजी गईं तीस्ता (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तीस्ता, श्रीकुमार 1 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजे गए
  • पूर्व IPS संजीव भट्ट की गिरफ्तारी में जुटी पुलिस टीम

गुजरात दंगा मामले में फर्जी सबूत गढ़ने के आरोप में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार को रविवार को अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन कोर्ट के रूम नंबर 22 में पेश किया गया. इस दौरान क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि तीस्ता सीतलवाड़ और अन्य आरोपियों ने गुजरात दंगों के मामले को सनसनीखेज और राजनीतिक रंग दिया. सुप्रीम कोर्ट में झूठे हलफनामे और बयान पेश किए गए. 

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि आरोपी निर्दोष लोगों को हत्या और बलात्कार के आरोपों में फंसाना चाहते थे और मौत की सजा दिलाना चाहते थे. पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर ऐसा किया. पुलिस ने कोर्ट से कहा कि इसकी जांच होनी चहिए कि इनके राजनीतिक आका कौन हैं. आरोपियों को अपने राजनीतिक आकाओं से राजनीति धन या कुछ और लाभ मिला, जिसकी भी पड़ताल होनी चाहिए. 

1 जुलाई तक पुलिस रिमांड में भेजे गए आरोपी

कोर्ट ने अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के तर्क सुनने के बाद आरोपियों को 1 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है. हालांकि पुलिस ने 14 दिन की हिरासत की मांग की थी. पुलिस हिरासत में लेने से पहले तीस्ता को 5 मिनट के लिए उनके पति जावेद आनंद से मिलने दिया गया. तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट को पुलिस अभी गिरफ्तार नहीं कर पाई है.

पुलिस हिरासत में जाने से पहले पति से मिलीं तीस्ता

अब 2 जुलाई को कोर्ट में होगी पेश

तीस्ता सीतलवाड़ को 2 जुलाई को कोर्ट में पेश किया जाएगा. पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि 1 जुलाई को अहमदाबाद में जगन्नाथ रथ यात्रा है इसलिए पुलिसबल बंदोबस्त में लगा रहेगा. इसके बाद कोर्ट ने पुलिस के अनुरोध पर 2 जुलाई को दोपहर से पहले तक तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार को पेश करने की छूट दे दी.

वहीं तीस्ता ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया. वहीं कोर्ट के आदेश पर पुलिस हिरासत में भेजने से पहले तीस्ता सीतलवाड़ का दो बार मेडिकल कराया गया.

कोर्ट के फैसले के आधार पर दर्ज हुआ केस

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की तरफ से वकील ने कोर्ट में कहा, 'मैंने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़ा है. कोर्ट के फैसले के आधार पर आरोपियों पर बिना देरी के एफआईआर दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में झूठे बयान और हलफनामे पेश किए गए, जो अपने आप में ही एक अपराध है. मैं हिरासत में पूछताछ की मांग कर रहा हूं. पूरे मामले को सनसनीखेज और राजनीतिक रंग क्यों दिया जा रहा है.'

इन धाराओं में आरोपियों पर दर्ज किया केस

आईपीसी की इन छह धाराओं में दर्ज हुआ केस

468- धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी करना.

471- जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना.

194- दोष साबित करने के इरादे से झूठे सबूत देना.

212- अपराधी को शरण देना.

218- पब्लिक सर्वेंट द्वारा किसी को सजा या संपत्ति जब्ती से बचाने के इरादे से गलत रिकॉर्ड तैयार करना.

211- खुद को चोट पहुंचाकर हमले का झूठा आरोप लगाना.

तीस्ता के पीछे सोनिया का सपोर्ट: संबित पात्रा

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने 25 जून को आरोप लगाते हुए कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ के पीछे सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी थी. तीस्ता सोनिया गांधी (यूपीए के दौरान) द्वारा गठित राष्ट्रीय सलाहकार समिति की सदस्य थीं. 

सोनिया गांधी के निर्देश पर केंद्र ने शिक्षा के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये मुहैया कराए थे. तीस्ता ने मोदीजी को बदनाम करने के लिए पैम्फलेट छापने के लिए इस राशि का इस्तेमाल किया. अदालत ने भी माना कि जो पैसा गरीबों के पास जाना था, उसका इस्तेमाल व्यक्तिगत और भौतिकवादी उपयोगों के लिए किया गया था. तीस्ता एंड कंपनी ने इन पैसों का निजी इस्तेमाल किया है.

हालांकि कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने संबित पात्रा के आरोप पूरी तरह से फर्जी और निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि ये आरोप सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना ​​हैं. 

SC ने आरोपियों पर यह की थी टिप्प्णी

- 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे पर एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को रद्द कर दिया था. इस याचिका को जाकिया जाफरी ने दाखिल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द करते हुए कहा था तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी.

- कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ इसीलिए इस मामले में लगातार घुसी रहीं, क्योंकि जकिया अहसान जाफरी इस पूरे मामले में असली पीड़ित हैं. तीस्ता अपने हिसाब से उनको इस मुकदमे में मदद करने के बहाने उनको नियंत्रित कर रही थीं, जबकि वो अपने हित साधने की गरज से बदले की भावना रखते हुए इस मुकदमे में न केवल दिलचस्पी ले रही थीं बल्कि अपने मनमुताबिक चीजें भी गढ़ रही थीं. जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने यह फैसला सुनाया था.

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल होने के दावेदारों के बयान मामले को राजनीतिक रूप से सनसनी पैदा करने वाले थे. दरअसल संजीव भट्ट, हिरेन पंड्या और आरबी श्रीकुमार ने SIT के सामने बयान दिया था जो कि निराधार और झूठे साबित हुए, क्योंकि जांच में पता चला कि ये लोग तो लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई गई उस मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए थे.

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