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मोरबी हादसा: ठेकेदार, मैनेजर, टिकट क्लर्क और सिक्योरिटी गार्ड समेत 9 गिरफ्तार

मोरबी हादसे में 141 लोगों की जान जाने के बाद अब पुलिस एक्शन में आ गई है. हादसे के अगले दिन सोमवार को पुलिस ने 9 लोगों से काफी देर तक पूछताछ की, लंबी पूछताछ के बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया. इनसे अब भी पूछताछ की जा रही है.

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गुजरात के मोरबी में हुए हादसे को एक दिन बीच चुका है, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अब तक जारी है. (फोटो-एजेंसी)
गुजरात के मोरबी में हुए हादसे को एक दिन बीच चुका है, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अब तक जारी है. (फोटो-एजेंसी)

गुजरात के मोरबी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब पुलिस का एक्शन शुरू हो गया है. पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. सभी से पूछताछ जारी है. इन 9 लोगों को आज ही पूछताछ के लिए बुलाया गया था. शुरुआत में इनमें से 4 को गिरफ्तार किया गया. कुछ देर बाद ही सभी 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया.

राजकोट रेंज के IG अशोक कुमार यादव ने इस मुद्दे पर सोमवार शाम प्रेस कांफ्रेंस की. उन्होंने बताया कि जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उनमें ओरेवा कंपनी का मैनेजर दीपक भाई नवीनचंद्र भाई पारेख (44), एक और मैनेजर नवीन भाई मनसुख भाई दवे, टिकट क्लर्क मनसुख भाई वालजी भाई टोपिया(59), एक और टिकट क्लर्क मदनभाई लाखा भाई सोलंकी, ब्रिज रिपेयरिंग कॉन्ट्रेक्टर प्रकाशभाई लालजी भाई परमार और एक और कॉन्ट्रेक्टर देवांग भाई लालजी भाई परमार (31) शामिल हैं. इसके अलावा 3 सिक्योरिटी गार्ड्स को भी अरेस्ट किया गया है.

पुलिस की जांच जारी है. गिरफ्तार होने वाले लोगों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है. बता दें कि रविवार शाम मोरबी में बेहद पुराना केबल ब्रिज गिरने से 141 लोगों की मौत हो गई. हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. हादसे वाला ब्रिज 7 महीने तक चले रिनोवेशन के बाद दिवाली के अगले दिन लोगों के लिए खोला गया था.

143 साल पुराना था ब्रिज

हादसे के बाद अब तक पुल से जुड़े कई खुलासे हो चुके हैं. सामने आया है कि मोरबी का 765 फुट लंबा और 4 फुट चौड़ा पुल 143 साल पुराना था. इस पुल का उद्घाटन 1879 में किया गया था. इस केबल ब्रिज को 1922 तक मोरबी में शासन करने वाले राजा वाघजी रावजी ने बनवाया था. वाघजी ठाकोर ने पुल बनाने का फैसला इसलिए लिया था, ताकि दरबारगढ़ पैलेस को नजरबाग पैलेस से जोड़ा जा सके.

ओरेवा ग्रुप ने कराई मरम्मत

राजधानी गांधीनगर से 300 किलोमीटर दूर मच्छु नदी पर बना ये केबल ब्रिज 7 महीने से बंद था. पुल की मरम्मत का काम अजंता मैनुफैक्चरिंग (ओरेवा ग्रुप) को मिला था. ये कंपनी घड़ियां, एलईडी लाइट, सीएफएल बल्ब, ई-बाइक बनाती है. हालांकि, अब ये जानकारी सामने आई है कि अजंता मैनुफैक्चरिंग ने मरम्मत का ठेका किसी दूसरी कंपनी को दे दिया था.

सामने आईं दर्दनाक तस्वीरें

रविवार को हुए हादसे के बाद कई दर्दनाक मंजर सामने आए थे. हादसे की कई तस्वीरें सामने आई थीं, जिसमें ब्रिज टूटने के बाद लोग तैरकर निकलने की कोशिश करते दिख रहे थे. वहीं, कई लोग टूटे हुए पुल पर लटकते हुए भी नजर आ रहे थे. ये लोग पुलिस के हिस्से को पकड़कर ऊपर आने की कोशिश में लगे थे.

सांसद के 12 रिश्तेदारों की जान गई

हादसे में मारे गए लोगों में ज्यादातर छोटे बच्चे हैं. राजकोट से लोकसभा सांसद मोहन कुंदरिया के 12 रिश्तेदार भी इस हादसे में मारे गए. कुंदरिया ने न्यूज एजेंसी को बताया कि हादसे में उनके बड़े भाई के साले की चार बेटियां, उनमें से तीन के पति और 5 बच्चे मारे गए हैं.

युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ की 5 टीम, एसडीआरएफ की 6 प्लाटून, वायुसेना की एक टीम, सेना के दो कॉलम और नौसेना की दो टीमें लगी हैं. इनके अलावा स्थानीय लोग भी रेस्क्यू ऑपरेशन में साथ दे रहे हैं.

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