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किसान आंदोलन में महिलाओं का पावर शो, बोलीं- किसानी भी करते हैं, ट्रैक्टर भी चलाते हैं...

नए कृषि कानून के विरोध में अब महिलायें भी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हो गई हैं. सोमवार को दिल्ली की सीमाओं पर चले रहे आंदोलन में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

सिंघु बॉर्डर पर जुटी महिलाओं की भीड़ सिंघु बॉर्डर पर जुटी महिलाओं की भीड़
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 24 घंटे के अनशन पर बैठीं महिलायें
  • ट्रैक्टर मार्च निकालकर जताया विरोध
  • आंदोलन का नेतृत्व करती दिखीं महिलायें

नए कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन बड़ा रूप धारण करता जा रहा है. दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले 50 से ज्यादा दिनों से किसान आंदोलन कर रहे हैं. सरकार से हो रही बातचीत में जब कोई नतीजा नहीं निकला, तो किसानों ने आंदोलन को और भी तेज कर दिया है. इस आंदोलन में अब महिलाएं भी कूद पड़ी हैं. 

दिल्ली की तीनों सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में 18 जनवरी को महिलाओं ने मोर्चा संभाला. सभा का संचालन करने के साथ ही महिलाओं ने मंच से अपनी बात को खुलकर रखा. उत्तर भारत के कई राज्यों से महिलाओं का समूह सिंघु बॉर्डर पहुंचा. मंच के किनारे बैरिकेड के पास सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी भी महिलाओं ने ही संभाली, जिनमें एक आकाश दीप कौर भी थीं.

आकाशदीप कौर अमृतसर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं. आजतक से बातचीत में आकाशदीप ने कहा वैसे तो महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी हैं, लेकिन यहां हमें संचालन की जिम्मेदारी देकर हमारे किसान परिवारों ने न सिर्फ हौसला अफजाई की है, बल्कि हमें सम्मान भी दिया है. 

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बास्केटबॉल कोच और किसान इकबाल जीत कौर सिंघु बॉर्डर पर मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सम्मान का दिन है, जब किसानों ने हमें जिम्मेदारी दी है. इकबाल जीत ने कहा कि हम किसानी भी करते हैं, ट्रैक्टर भी चलाते हैं और रिपब्लिक डे पर होने वाली ट्रैक्टर परेड में हिस्सा भी लेंगे. गांव कस्बों से आई हुई महिलाओं ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि इससे बड़ा सम्मान महिलाओं के लिए क्या होगा, जब घर संभालने से लेकर हर क्षेत्र में नेतृत्व करने वाली महिलाओं को यहां अब तक के इस सबसे बड़े आंदोलन में भी नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है.

रोज की तरह आंदोलन में प्रबंधन का काम देखने वाले गुरमीत ग्रेवाल ने कहा कि यह उन महिलाओं के लिए सम्मान जताने का तरीका है जो गांव में खेती भी करती हैं और यहां कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में पहले दिन से हमारे साथ शामिल हैं, लेकिन आज के दिन वह मंच संचालन से लेकर प्रबंधन में नेतृत्व कर रही हैं. 

24 घंटे के अनशन पर बैठीं महिलायें
दिल्ली-जयपुर राजमार्ग 48 पर किसान आंदोलन जारी है. संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि में और आंदोलन में महिलाओं के विशेष स्थान को देखते हुए 18 जनवरी को महिला किसान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी. सोमवार को महिलाओं ने मोर्चा संभाला. क्रमिक अनशन में भी महिलाओं ने ही भाग लिया. 24 घंटे के अनशन पर आधा दर्जन से अधिक महिलायें बैठीं.

नुक्कड़ नाटक भी किया
महाराष्ट्र व गुजरात से हजारों महिलायें शाहजहांपुर मोर्चे पर पहुंची. सर्वोच्च न्यायालय में महिलाओं की भागीदारी के प्रति नकारात्मक टिप्पणी से आहत होकर महिला किसानों का दल गुजरात व महाराष्ट्र से शाहजहांपुर के लिए रवाना हुआ था. आज सभा का संचालन महिलाओं ने किया और भाषण भी केवल महिलाओं के हुए. अध्यक्ष मंडली में प्रतिभा शिंदे, चन्द्रकला, निशा, राजबाला और वर्षा शामिल रहीं. महिला किसान दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया गया. इस दौरान महिलाओं ने ट्रैक्टर मार्च निकाल कर आंदोलन में भाग लिया.

 

 

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