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MCD Elections: नवंबर के बाद कभी भी हो सकते हैं चुनाव, वार्ड निर्धारण के ड्राफ्ट पर परिसीमन कमेटी ने मांगी आपत्तियां

दिल्ली में एमसीडी के चुनाव नवंबर के बाद कभी भी हो सकते हैं. परिसीमन कमेटी ने दिल्ली की तीनों एमसीडी के एकीकरण और इसके बाद अस्तित्व में आने वाले 250 वार्ड का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. इसे लेकर परिसीमन कमेटी ने लोगों से तीन अक्टूबर तक आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं. दिल्ली के लोग भी परिसीमन की विसंगतियां बताते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं.

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दिल्ली एमसीडी (फाइल फोटो)
दिल्ली एमसीडी (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीनों एमसीडी के एकीकरण की प्रक्रिया चल रही है. दिल्ली नगर निगम के लिए वार्ड की संख्या और सीमा निर्धारित करने के लिए गठित परिसीमन कमेटी ने ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया है. परिसीमन कमेटी ने ड्राफ्ट पर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं. आम नागरिक 3 अक्टूबर तक परिसीमन पर आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकते हैं.

परिसीमन कमेटी की ओर से तैयार ड्राफ्ट पर आपत्तियां आने भी लगी हैं. ईस्ट दिल्ली के निवासी वीएस वोहरा ने ड्राफ्ट को लेकर आपत्तियों की झड़ी लगा दी. उन्होंने इसे जल्दबाजी में तैयार किया गया ड्राफ्ट बताया और कहा कि एक वॉर्ड की जनसंख्या 83782 और दूसरे की 35684 है. 208 अनारकली, 209 जगतपुरी, 210 गीता कॉलोनी और 211 कृष्णा नगर के मैप साइज में भी अनियमितता है. अनारकली की पॉपुलेशन 49180 है तो जगतपुरी की 83636. क्या दोनों को जोड़कर समान रूप से नही बांटा जा सकता था? गांधीनगर में आबादी 53385 है तो आजाद नगर में 74621.  

ईस्ट दिल्ली में कई आरडब्लूए फेडरेशन से जुड़े वोहरा ने कहा कि समझ नहीं आ रहा कि भविष्य में क्या ज्यादा पॉपुलेशन वाले एरिया को विकास के लिए ज्यादा बजट दिया जाएगा? इसे लेकर क्या मैकैनिजम अपनाया जाएगा? यूनाइटेड रेजिडेंट्स जॉइंट एक्शन ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष अतुल गोयल ने इसे लेकर कहा कि मसौदे में आउटर दिल्ली जैसे दूर-दराज के इलाकों को भी शामिल कर लिया गया है और निगम चुनाव अब बिना किसी देरी के कराए जाने चाहिए.

परिसीमन के लिए गठित कमेटी की ओर से दिल्ली नगर निगम के प्रस्तावित 250 वार्ड में 35509 की जनसंख्या वाले चांदनी चौक वार्ड और 35 हजार 684 की जनसंख्या पर लक्ष्मी नगर वार्ड का प्रस्ताव किया है. वहीं इससे लगभग 3 गुना 93381 की जनसंख्या पर वार्ड मयूर विहार फेस वन, 91991 की जनसंख्या पर वार्ड त्रिलोकपुरी के गठन का भी प्रस्ताव तैयार किया है. 2011 की जनगणना के मुताबिक दिल्ली नगर निगम क्षेत्र की 1.64 करोड़ जनसंख्या को 250 वार्ड के लिए औसतन 65000 प्रति वार्ड चिह्नित किए जाने की बातें भी कही जा रही हैं.

साल 2022 में होने वाला ये परिसीमन 11 साल पहले यानी 2011 के आंकड़ों पर हो रहा है. जनसंख्या में तो और अधिक वृद्धि हुई है तो जाहिर है यह असमानता और अधिक हो सकती है. आपत्ति लगाने वाले जगदीश ममगाई ने कहा कि पूरी दिल्ली में समानता न हो पाए तो कम से कम प्रत्येक विधानसभा के तहत गठित होने वाले वार्ड में ही हो जाए.

विशेष परिस्थिति में हुआ परिसीमन  

दरअसल नगर निगम, पंचायत, लोकसभा, या विधानसभा सीटों की संख्या का निर्धारण जनसंख्या के अनुपात में होता है. सीटों का सीमांकन स्वाभाविक सीमा, प्राकृतिक सीमा या फिर क्लस्टर के आधार पर किया जाता है. दिल्ली नगर निगम एक्ट के मुताबिक हर जनगणना के बाद परिसीमन होना चाहिए. विशेष परिस्थिति यह रही कि 2021 की जनगणना हुई नहीं ऐसे में जो परिसीमन होना था वह अधर में लटक गया.

एकीकृत करने के नाम पर केंद्र सरकार ने निगम के 272 वॉर्ड को कम करके 250 कर दिया. जनगणना के जो आंकड़े उपलब्ध हैं, वे 2011 के ही हैं. लिहाजा 250 वार्ड का सीमांकन करने का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े ही बने. जनगणना के आधार पर निगम क्षेत्र में जनसंख्या 1 करोड़ 64 लाख थी और  करीब ढाई सौ सीटों के लिए औसतन 65000 की आबादी पर एक सीट बनी थी.

परिसीमन कमेटी ने यह तय किया कि वार्ड का सीमांकन विधानसभा के तहत होगा जिसमें न्यूनतम 3 और अधिकतम 6 वार्ड होंगे. ऐसे में ड्राफ्ट में कोई वॉर्ड 35 हजार जनसंख्या वाला तो कोई 93 हजार जनसंख्या वाला हो गया. यानी लगभग बराबर वाली नीति पर परिसीमन नहीं हुआ. इसे लेकर लोगों को सबसे अधिक आपत्ति है.

जगदीश ममगाई कहते हैं कि कुछ हजार का डिफरेंस चलता है. किसी भी वेलफेयर स्कीम के तहत आने वाले पैसे का 93 और 35 हजार की आबादी वाले इलाकों में बंटवारा कैसे होगा? ये समझ नहीं आ रहा. उन्होंने ये भी कहा कि विधानसभा क्षेत्र के लिहाज से भी देखें तो परिसीमन में काफी विसंगतियां हैं. पूर्व मेयर हरिशंकर गुप्ता का कहना है कि आबादी, वार्ड की साइज और बाउंड्री पर लोगों को ऐतराज है. हम राज्या निर्वाचन आयोग को आपत्ति और सुझाव देंगे.   

जितना ज्यादा शिकायतें, चुनाव में उतनी देरी

ड्राफ्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद गजट नोटिफिकेशन होगा और इसके बाद कभी भी चुनाव हो सकता है. परिसीमन आयोग अलग ऑटोनॉमस बॉडी है. ये फाइनल पब्लिकेशन की कॉपी चुनाव आयोग को भेजेगा. राज्य चुनाव आयोग पहले 42 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करेगा और इसमें भी पहली, तीसरी और पांचवीं सीट महिला के लिए आरक्षित होगी. इसका आधार जनसंख्या होता है. बाकी 208 सीटों में भी चुनाव आयोग यह तय करता है कि पहली, तीसरी और पांचवी सीट महिला के लिए आरक्षित होगी. ये पूरी प्रक्रिया 35 दिन की होती है. इसके बाद चुनाव की तिथियों का ऐलान किया जा सकता है. चुनाव की भी कुल प्रक्रिया करीब 30 से 35 दिन की होती है. इसमें भी करीब 20 दिन प्रचार के होंगे. सात दिन नॉमिनेशन के होते हैं. 3 दिन नाम वापसी और स्क्रूटनी के होते हैं.

 

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