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JNU फीस वृद्धि पर छात्र बोले- पढ़ाई हमारा अधिकार, नहीं भर सकते इतनी फीस

जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सतीश चंद्र यादव ने आजतक की टीम से बात करते हुए कहा, "हमने कुलपति से बात करने की मांग की थी लेकिन वह पूरी नहीं हुई. हम 28 तारीख से प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, इसी वजह से हमें पूर्ण बंद का कदम उठाना पड़ा".

यूजीसी ऑफिस पर प्रदर्शन करते जेएनयू के छात्र (फोटो: PTI) यूजीसी ऑफिस पर प्रदर्शन करते जेएनयू के छात्र (फोटो: PTI)

  • फीस वृद्धि को लेकर छात्रों ने जेएनयू में किया आंदोलन
  • फीस वृद्धि पर छात्र बोले- इतनी राशि वहन नहीं कर सकते

फीस वृद्धि, कर्फ्यू टाइमिंग और एक ड्रेस कोड के खिलाफ बुधवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए स्टूडेंट्स विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में घुस गए थे, जबकि सोमवार के विरोध के बाद 100 मीटर के भीतर किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन प्रतिबंधित था. दरअसल, छात्रों की मांगों के संबंध में एक बैठक प्रशासनिक भवन में होनी थी, जो वहां नहीं हुई. इस वजह से छात्र आंदोलित हो गए क्योंकि उन्होंने कुलपति एम जगदीश कुमार के साथ चर्चा करने की मांग की थी.

जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सतीश चंद्र यादव ने आजतक की टीम से बात करते हुए कहा, "हमने कुलपति से बात करने की मांग की थी लेकिन वह पूरी नहीं हुई. हम 28 तारीख से प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, इसी वजह से हमें पूर्ण बंद का कदम उठाना पड़ा. हमें उम्मीद है कि कुलपति हमारी समस्या सुनेंगे और बातचीत करेंगे, नहीं तो हम अपना प्रदर्शन और तेज करेंगे."

जेएनयू के एक छात्र मोहम्मद आलम ने आजतक की टीम से बात करते हुए कहा , "मैं पश्चिम बंगाल से हूं और बहुत ही गरीब पृष्ठिभूमि से आता हूं. मेरी मां और भाई खेती कर मेरी पढ़ाई का खर्चा उठाते हैं. मुझे महीने में दो हजार से तीन हजार रुपये मुश्किल से मिल पाते हैं महीने के अंत तक खर्च चलाने के लिए मुझे स्थानीय बच्चों को पढ़ाना पड़ता है. अब अचानक हुई इस फीस वृद्धि की वजह से मुझे प्रोफेसर बनने का अपना सपना छोड़ना पड़ेगा क्योंकि मैं इतनी राशि वहन नहीं कर सकता."

हालांकि जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्रों के विरोध-प्रदर्शन ने सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया. केन्द्र सरकार ने आखिरकार बढ़ी हुई हॉस्टल फीस रिवाइज कर दी है जो कि आंशिक रूप से प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर से कम है. इसके साथ ही गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता देने के लिए एक योजना प्रस्तावित की गई है. इस बात की जानकारी एचआरडी मिनिस्ट्री ने ट्वीट कर दी है.

फीस वृद्धि कम करने का निर्णय तब लिया गया जब बीजेपी की छात्र इकाई एबीवीपी ने जेएनयू कैंपस से यूजीसी ऑफिस तक पैदल मार्च किया. उस मार्च का हिस्सा रहीं स्नेहा ने आजतक की टीम को बताया, "हम इस फीस वृद्धि का अनुपालन नहीं कर रहे हैं क्योंकि पढ़ाई करना हमारा अधिकार है. हम में से अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं और इस तरह के भारी शुल्क को लागू करना हमारे लिए आसान नहीं है".

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