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जमीन सरकारी और दिल्‍ली के दबंग बने उसके व्‍यापारी

दिल्ली के कुछ इलाकों में सरकारी जमीन को निजी बताकर करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है और ये सब हो रहा है प्रशासन और कांग्रेस के कुछ नेताओं की मिली भगत से. ताजा किस्सा दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके का है, जहां लैंड शार्क बने प्रॉपर्टी डीलरों ने एक शख्स को 4 करोड़ 40 लाख रुपये में सरकारी जमीन बेच दी.

वाईके शर्मा वाईके शर्मा

दिल्ली के कुछ इलाकों में सरकारी जमीन को निजी बताकर करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है और ये सब हो रहा है प्रशासन और कांग्रेस के कुछ नेताओं की मिली भगत से. ताजा किस्सा दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके का है, जहां लैंड शार्क बने प्रॉपर्टी डीलरों ने एक शख्स को 4 करोड़ 40 लाख रुपये में सरकारी जमीन बेच दी. इस मामले में कांग्रेस के दो नेताओं समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

पेशे से गुड़गांव की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में डायरेक्टर वाईके शर्मा दिल्‍ली के गोकुलपुरी इलाके में रहते हैं. शर्मा की पत्‍नी का सपना एक स्कूल खोलने का था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने गोकुलपुरी में ही एक प्रापर्टी फर्म से 300 वर्ग गज की जमीन का सौदा किया. सौदा करने वाले लोग स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर थे और कुछ कांग्रेस के स्थानीय नेता भी. जमीन का सौदा 4 करोड़ 40 लाख में तय हुआ. 40 लाख उन्होंने पेशगी दी और बाकी रकम लोन पास होने के बाद देना तय हुआ.

जमीन के सच का खुलासा तब हुआ जब शर्मा ने बैंक लोन के लिए अर्जी लगायी. ना तो जमीन के मालिक का पता था और ना ही जमीन से जुड़ा एक भी कागज असली. शर्मा ने आरटीआई के जरिए सवाल पूछे तो पता चला जमीन ग्रामसभा की है जो बेची ही नहीं जा सकती.

पुलिस से लेकर नेता और प्रशासन तक पूरे सिस्टम से हारकर शर्मा ने कोर्ट में अर्जी लगाई और कोर्ट ने ना सिर्फ पुलिस को दो स्थानीय कांग्रेस नेता सुरेंद्र शर्मा और सतीश उपाध्याय समेत 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए बल्कि मामले में शामिल सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का निर्देश दिए.

योगेंद्र शर्मा के पास मौजूद कागजात साफ करते हैं कि जमीन की इस दलाली में पटवारी से लेकर तहसीलदार तक और पुलिस से लेकर नेता तक सभी प्रॉपर्टी की दलाली में काले हैं. जो ये भी साफ करते हैं कि जमीन के दलाल पूरे सिस्टम को ही भ्रष्ट कर चुके हैं.

जमीन की असलियत का पता लगाने निकले वाईके शर्मा को हर जगह निराशा हाथ लगी. पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, पुलिस सभी ने उनसे झूठ बोला और चुपचाप मामले को रफादफा करने की बात भी कही. पिछले 7 महीने में योगेंद्र शर्मा ने जो भोगा है वो किसी भी दिल्लीवाले के साथ हो सकता है.

वाईके शर्मा का कहना है कि उनके दिन और रात खौफ के साए में बीत रहे हैं. उनकी पत्‍नी बीमार रहने लगी हैं और व्यापार चौपट हो गया है.

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