दिल्ली सरकार द्वारा संचालित LNJP अस्पताल में जिस नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद कथित तौर पर मृत घोषित कर दिया गया था और बाद में जीवित पाया गया उसकी हालत नाजुक बनी हुई है. वह नवजात अब तक वेंटिलेटर पर रखा गया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी कि उसकी मां 23 सप्ताह की गर्भवती थी और जन्म के वक्त उसका वजन सिर्फ 490 ग्राम था. डॉक्टरों के उसे मृत घोषित करने के बाद उसे तब जीवित पाया गया जब परिवार उसे दफनाने की योजना बना रहा था.
अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, 'बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है और वेंटिलेटर सपोर्ट पर है. उसकी निगरानी की जा रही है.' एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि बच्ची के बचने की संभावना 'कम' है. उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय दृष्टि से इस तरह के गर्भधारण को अव्यवहार्य माना जाता है.
अस्पताल करेगा इस मामले की जांच
डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया है और रिपोर्ट बुधवार को सौंपी जाएगी. डॉक्टर ने कहा कि पैनल ने घटनाओं के क्रम का पता लगाने के लिए उस दिन ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों से बात की है.
डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएगा परिवार
बच्चे के परिवार ने कहा कि वे इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे. परिवार ने कहा, 'बच्ची वेंटिलेटर पर नहीं है. इसके बजाय उसे सिर्फ नर्सरी में भर्ती कराया गया है. हम आज पुलिस शिकायत दर्ज करेंगे और चाहते हैं कि दोषी डॉक्टरों को दंडित किया जाए.'
बॉक्स खोला तो जिंदा निकली बच्ची
बच्ची के चाचा मोहम्मद सलमान ने फोन पर कहा, हम चाहते हैं कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाए और मेरी भतीजी को मृत घोषित करने वाले डॉक्टरों को भी निलंबित किया जाए. बच्ची की 35 वर्षीय मां की तीन साल की एक और बेटी है. परिवार ने कहा कि बच्चे के पिता साधारण टूलमेकिंग के व्यवसाय में काम करते हैं. पीड़ित सलमान ने सोमवार को कहा था, 'बच्ची को हमें एक बॉक्स में सौंप दिया गया था और हम उसे न्यू मुस्तफाबाद में अपने घर ले गए. हमने उसे दफनाने की तैयारी शुरू कर दी थी और उसके लिए कब्र तैयार करने का आदेश दिया था. लगभग 7.30 बजे, जब हमने बॉक्स खोला, हम बच्चे को पैर और हाथ हिलाते हुए देखा. हम तुरंत उसे वापस अस्पताल ले गए.'
इस तरह की नवजातों को कहते हैं 'गर्भपात शिशु'
अस्पताल ने कहा है कि ऐसे बच्चों को 'गर्भपात शिशु' माना जाता है और बच्ची में जीवन के लक्षण दिखने के बाद उसे तुरंत जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया. आपको बता दें कि 2,000 बिस्तरों वाला एलएनजेपी अस्पताल कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ सरकार की लड़ाई का मुख्य आधार था.